हरभजन सिंह ने 13 वर्ष बाद उठाया 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की इस बात से पर्दा

 हरभजन सिंह ने 13 वर्ष बाद उठाया 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की इस बात से पर्दा

भारत व पाक के बीच इंटरनेशनल बॉर्डर पर ही नहीं बल्कि क्रिकेट के मैदान का तनाव भी सब जानते हैं। दोनों टीमों के बीच खेले जाने वाले क्रिकेट मैच किसी जंग से कम नहीं होते। 

ऐसे में जो क्रिकेटर बेकार प्रदर्शन करता है, उसे अपने देश में सबसे बड़े विलेन का दर्जा मिलना तय होता है। दोनों राष्ट्रों के बीच इसी तनाव के चलते एक से बढ़कर एक बेहतरीन व रोमांचक मुकाबले खेले गए हैं। लेकिन जो रोमांच दोनों राष्ट्रों की जनता ने 2007 के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले में महसूस किया था, उसका शायद ही कोई जोड़ होगा।

उस ऐतिहासिक मुकाबले में भारतीय क्रिकेट टीम आखिरी ओवर में मैच जीतकर चैंपियन बनी थी। लेकिन इससे पहले एक पल ऐसा भी आया था, जब टीम इंडिया के हर फैन को लगा था कि वर्ल्ड कप ट्रॉफी भारतीय हाथों से खिसक गई है। ये पल था का वो ओवर जिसमें तत्कालीन पाकिस्तानी कैप्टन ने 3 छक्के ठोककर एकबारगी मैच का रुख ही पलट दिया था व निश्चित पराजय के करीब पहुंच गई पाकिस्तानी टीम को जीत का ख्वाब दिखाना प्रारम्भ कर दिया था। इस ओवर में लगातार 3 छक्के खाने के बाद सबसे बड़े विलेन बनते दिख रहे हरभजन सिंह के दिमाग में क्या बात आई थी, इससे पर्दा इस महान भारतीय ऑफ स्पिनर ने 13 वर्ष बाद उठाया है।

19 रन दिए थे भज्जी ने उस ओवर में

हरभजन सिंह उस मैच में 17वां ओवर फेंकने आए थे। उस वक्त पाक को जीत के लिए 24 गेंद में 54 रन की आवश्यकता थी, जो उस जमाने के क्रिकेट स्टाइल की वजह से असंभव सा लक्ष्य दिखाई दे रहा था। लेकिन मिस्बाह ने भज्जी के उस ओवर में 19 रन ठोककर टीम को एकदम से जीत के करीब पहुंचा दिया था। मिस्बाह ने ओवर की पहली व इसके बाद 5वीं व आखिरी गेंद पर छक्के लगाए। इससे महत्वपूर्ण लक्ष्य घटकर 18 गेंद में 35 रन रह गया व मैच पाक के खाते में दिखाई देने लगा था।

किसी भी तरह ओवर समाप्त करना चाहता था मैं

हरभजन सिंह ने एक क्रिकेट वेबसाइट के साथ वार्ता में बोला कि मेरे करियर में टेंशन देने वाले कुछ ही मैच हुए हैं। टी-20 वर्ल्ड कप में पाक के विरूद्ध यह फाइनल मैच उन मैचों में से एक था। हरभजन ने कहा, उस ओवर में पहला छक्का खाने के बाद मैं बहुत ज्यादा प्रेशर में आ गया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि आगे क्या करना है। मैं बस अपना ओवर समाप्त करना चाह रहा था। उन्होंने कहा, कोई भी बल्लेबाज आपको चौका या छक्का मार सकता है, लेकिन आपकी गेंदबाजी ठीक रहनी चाहिए। कई बार हम छक्का खाने से भय जाते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।

यॉर्कर की रणनीति हो गई थी फेल

भज्जी ने बोला कि मैं उस ओवर में मिस्बाह के विरूद्ध भी ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध अपनाई रणनीति आजमाना चाहता था। ऑस्ट्रेलिया के विरूद्ध मुझे ज्यादा से ज्यादा यॉर्कर गेंद फेंकने पर बहुत ज्यादा सफलता मिली थी। जब मैंने यही उपाय मिसबाह के विरूद्ध आजमाया तो ये रणनीति फेल हो गई।   इससे मेरे ऊपर प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ता गया। यही कारण है कि मैंने उस ओवर में बहुत ज्यादा रन लुटा दिए थे।