पूर्व भारतीय लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का खुलासा!

पूर्व भारतीय लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन का खुलासा!

नई दिल्ली: इंग्लैंड के 27 वर्षीय गेंदबाज ओली रॉबिन्सन (ollie robinson) ने 2 जून को न्यूजीलैंड के विरूद्ध टेस्ट में अपना अंतर्राष्ट्रीय डेब्यू किया. लेकिन उनका एक पूराना विवादित ट्वीट उनके कॅरियर पर भारी पड़ा. मुद्दे के तूल पकड़ने के बाद इंग्‍लैंड एंड वेल्‍स क्रिकेट बोर्ड ने बड़ा निर्णय लेते हुए रॉबिन्सन को अंतर्राष्ट्रीय मैचों से निलंबित कर दिया. अब रंगभेद के मुद्दे पर भारतीय क्रिकेटर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन ((Laxman Sivaramakrishnan)) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है. जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्हें भी अपने कॅरियर में रंगभेद का सामना करना पड़ा था.

होटल में घुसने से रोक दिया था
टीम इंडिया के पूर्व लेग स्पिनर लक्ष्मण शिवरामकृष्णन (Laxman Sivaramakrishnan) ने एक मीडिया हाउस को बताया कि उन्हें अपने ही देश में मुंबई के एक होटल में घुसने से रोक दिया था. उन्हें अपने क्रिकेट कॅरियर में रंगभेद का सामना करना पड़ा था. ओली रॉबिन्सन को लेकर पूछे गए प्रश्न पर शिवरामकृष्णन ने कहा, 'मैं 16 वर्ष का था तब मेरा भातरीय टीम चयन हुआ था. मेरे पहले दौरे से पहले मुंबई के एक फाइव स्टार होटल में प्रवेश से मुझे रोक दिया गया था. होटल के एंप्लाई को लगा कि मैं 16 वर्ष का लड़का टीम इंडिया के लिए कैसे खेल सकता हूं और उसे इसलिए भी नहीं लगा होगा क्योंकि मेरा रंग काला था. उन्होंने बोला कि मुझे मेरे क्रिकेट कॅरियर में हर देश में रंगभेद का सामना करना पड़ा. मेरा अपमान किया गया.'

बुरे दौर में खेल पर पड़ता है इन चीजों का असर
शिवरामकृष्णन ने बोला कि जब तक आप अच्छा खेल रहे होते हैं तो इन चीजों का असर नहीं पड़ता है. लेकिन जब आउट ऑफ फॉर्म चल रहे होते हैं ये सब चीजें बहुत मैटर करती हैं. जब मैंने अपना अंतिम टेस्‍ट मैच खेला तब मेरी आयु 21 वर्ष की थी. ये कई चीजों का मिश्रण था. साधारण फॉर्म, आत्‍मविश्‍वास की कमी और दर्शकों द्वारा आपके साथ किया गया बेकार बर्ताव.

क्रिकेट बोर्ड्स को खिलाड़ियों से करनी चाहिए बात
भारत के पूर्व स्पिनर ने बोला कि क्रिकेट बोर्ड को रंगभेद के मामले पर अपने खिलाड़ियों से बात करनी चाहिए. उन्हें अवगत कराना चाहिए कि आपको कौनसे—कौनसे राष्ट्रों में खेलते समय रंगभेद का सामना करना पड़ सकता और इससे कैसे निटपना है. खासकर एशियाई राष्ट्रों के क्रिकेट बोर्ड्स को. पिछले वर्ष ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जब गेंदबाज मोहम्मद सिराज के साथ ऐसी घटना हुई तो पूरी टीम इंडिया एकजुट नजर आई. यह देखकर मुझे बहुत ज्यादा अच्छा लगा.


पहली पारी में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय तेज गेंदबाज क्यों रहे इतने सफल

पहली पारी में इंग्लैंड के खिलाफ भारतीय तेज गेंदबाज क्यों रहे इतने सफल

इंग्लैंड के खिलाफ पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में भारतीय तेज गेंदबाजों ने मेजबान टीम के बल्लेबाजों को टिकने का मौका नहीं दिया और पूरी टीम 183 रन के स्कोर पर आउट हो गई। पहली पारी में जसप्रीत बुमराह ने सबसे ज्यादा चार विकेट लिए थे तो वहीं मो. शमी को तीन सफलता मिली थी। शार्दुल ठाकुर को दो तो वहीं मो. सिराज ने पहली पारी में एक विकेट लिए थे। पहली पारी में भारतीय गेंदबाजों की शानदार गेंदबाजी के बाद शमी ने बताया कि, किस तरह से उन्होंने इंग्लिश बल्लेबाजों को बैकफुट पर ला दिया। उन्होंने कहा कि, उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि, वो कहां पर खेल रहे हैं। वो किसी भी तरह की कंडीशन में बस अपने खेल पर विश्वास करते हैं। 

मो. शमी ने कहा कि, टेस्ट मैच धैर्य का खेल है। भूल जाओ कि पहले क्या हुआ है, हमें मौजूदा स्थिति के बारे में सोचना होता है, हमें अधिक दिमाग नहीं लगाना होता।'  शमी ने कहा, 'मेरे नजरिए से टेस्ट मैचों में सामान्य सी बात है, आप जितना अधिक अपने बेसिक्स पर ध्यान दोगे उतना अधिक आपके सफल होने की संभावना होगी। अगर आप जरूरत से ज्यादा सोचोगे तो आप रन लुटाओगे और गैरजरूरी दबाव बनेगा।' हमने यही किया और इंग्लैंड के खिलाफ पहली पारी में सफल रहे। 


उन्होंने आगे कहा कि, मुझे नहीं पता कि मैं इंग्लैंड में विकेट क्यों हासिल नहीं कर पाता (हंसते हुए)। लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया या कहीं और खेल रहा हूं, मैं अपने कौशल पर भरोसा करता हूं।' उन्होंने कहा, 'यहां तक कि जब मैं नेट्स पर गेंदबाजी कर रहा था तब भी हालात को परखने की कोशिश कर रहा था और इसी के हिसाब से प्लान बनाया। इसके बाद मैच में इसे लागू करने की कोशिश की।' यहां पर हमारा प्लान काम कर गया और हमें सफलता मिली।