वर्ल्ड कप हारने के बाद अब टीम इंडिया जीतेगी ये ट्राफी, जानिए कैसे...

वर्ल्ड कप हारने के बाद अब टीम इंडिया जीतेगी ये ट्राफी,  जानिए कैसे...

साल 2019 में हुए आईसीसी क्रिकेट वर्ल्ड कप पर इंग्लैंड ने अतिक्रमण जमाकर इतिहास रच दिया। इंग्लैंड ने फाइनल में न्यूजीलैंड के विरूद्ध सुपरओवर में जीत दर्ज करते हुए यह उपलब्धि हासिल की।

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लॉर्ड्स पर खेले गए इस ऐतिहासिक मुकाबले का अंत बेहद रोमांचक हुआ। इसके साथ ही क्रिकेट के जनक इंग्लैंड को पहली बार वर्ल्ड कप की ट्रॉफी हाथ में उठाने का मौका भी मिल गया।

अब अगला वर्ल्ड कप 2023 में हिंदुस्तान में खेला जाना है। यह पहला मौका होगा जब भारतीय टीम अकेले वर्ल्ड कप की मेजबानी करेगी। इससे पहले 1996 में हिंदुस्तान व बांग्लादेश व 2011 में भारत, श्रीलंका व बांग्लादेश ने वर्ल्ड कप की संयुक्त मेजबानी की थी। अब जबकि एक बार फिर हिंदुस्तान क्रिकेट के महाकुंभ की तैयारी करेगा तो सभी की निगाहें इस बात पर टिकी होंगी कि आखिरी इस वर्ल्ड को जीतेगा कौन?


अगर पिछले तीन वर्ल्ड कप के नतीजों पर गौर करें तो भारतीय टीम का वर्ल्ड कप जीतना अभी से तय हो गया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि 2011 में जहां हिंदुस्तान वर्ल्ड कप जीतने वाला पहला मेजबान देश बना था तो 2015 में ऑस्ट्रेलिया ने भी अपनी ही जमीन पर दुनिया खिताब जीता। व ये सिलसिला यहीं नहीं रुका, 2019 का वर्ल्ड चैंपियन भी मेजबान देश ही बना, जब इंग्लैंड ने न्यूजीलैंड के विरूद्ध जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। ऐसे में जबकि 2023 का वर्ल्ड कप हिंदुस्तान में होना है तो क्या पता कि टीम इंडिया तीसरी बार वर्ल्ड चैंपियन बन जाए।

2011 : मुंबई में धोनी ने लगाया विजयी छक्का

यूं तो टीम इंडिया ने अपना पहला वर्ल्ड कप 1983 में कपिल देव की अगुआई में जीता था, लेकिन एक नया इतिहास रचने में उसे 28 वर्ष लग गए। क्योंकि 28 वर्ष बाद 2011 का वर्ल्ड कप भारत, श्रीलंका व बांग्लादेश की मेजबानी में खेला गया। सेमीफाइनल में भारतीय टीम ने पाक को पटकनी दी तो श्रीलंका ने न्यूजीलैंड की चुनौती ध्वस्त की। फाइनल में दोनों टीमें वर्ल्ड कप की मेजबान थीं। मुकाबला मुंबई के वानखेडे स्टेडियम में हुआ।

श्रीलंका ने पहले खेलते हुए महेला जयवर्धने के शतक की बदौलत 6 विकेट खोकर 274 रनों का बेहद मजबूत स्कोर खड़ा किया। जवाब में हिंदुस्तान ने 48.2 ओवर में 6 विकेट खोकर 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी के विजयी छक्के की बदौलत इतिहास रच दिया। यह न केवल भारतीय टीम का दूसरा वर्ल्ड कप था, बल्कि पहला ऐसा मौका भी था जब किसी मेजबान देश ने वर्ल्ड कप अपने नाम किया था।