सतना में एक बरगद के नीचे अचानक दिखी ये रहस्यमयी चीज, जानकर लोग हो रहे हैरान

सतना में एक बरगद के नीचे अचानक दिखी ये रहस्यमयी चीज,  जानकर लोग हो रहे हैरान

सरकार एजुकेशन के बढ़ावा देने व हर बच्चे तक एजुकेशन पहुचाने का दावा करती है। मगर जमीनी सच कुछ व ही है। सतना जिले के अदिवासी बाहुल्य गाँव में सरकार के दावे वनेताओं के वादों की असलियत देखने को मिल रही, यहां 1995 में खुली पाठशाला पिछले 25 वर्षों से पीपल पेड़ की झांव में चल रही, मौसम बेकार हुया तो छुट्टी। खास कर बरसात के मौसम में स्कूल चलना मुस्किल हो जाता है।

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राम की तपो धरती चित्रकूट में राम भरोसे बच्चे

राम की तपो धरती चित्रकूट के बांका पंचायत के टिकरा गाँव मे 1995 में प्राथमिक शासकीय पाठशाला खुली थी। लेकिन आज तक स्कूल का भवन नही बन पाया, 1995 में जब स्कूल खुला था तब से अब तक एक पीड़ी स्कूल बनने का इंतजार करते करते जवान हो गई पर स्कूल भवन नहीं बन पाया। पीपल के नीचे पढ़ने वाले मासूम बच्चे गर्मी में लू की लपट तो ठंडी में ठिठुरन व बरसात में फुहार सहने को मजबूर है। बरसात के मौसम में तो कई हप्ते की छुट्टी करनी पड़ती है। मतलब मौसम के भरोसे चलता है स्कूल।


जंगली जानवरों व कीड़े-मकोड़ो का भी खतरा

वर्षों से लोग जिला प्रशासन को ज्ञापन दे रहे है। लोकल विधायक व सांसद से गुहार लगा रहे है। सतना से सांसद गणेश सिंह ने सांसद निधि से दो कमरे स्वीकृत कराने के लिए राशी जारी की पर ये राशी बोला कब खर्च हुई ग्रामीणों को भी नही मालूम। हालांकि जिला एजुकेशन विभाग भी इस बात से अवगत है कि यहां 25 सोलों से पीपल के नीचे ही स्कूल संचालित हो रहा , बच्चों को जंगली जानवरों व कीड़े-मकोड़ो से खतरा है पर उनकी दलील है कि निर्माण एजेंसी ने राशी डकार ली ऐसे में स्कूल के लिए फिर राशी जारी नही हो सकती।