राम मंदिर को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में जारी रहेगी सुनवाई

अयोध्या मुद्दे को लेकर उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ में 11वें दिन की सुनवाई आज होगी। गुरुवार को याचिकाकर्ता गोपाल सिंह विशारद की ओर से पेश वरिष्ठ एडवोकेट रंजीत कुमार ने बोला था कि मैं श्री राम उपासक हूं व मुझे जन्मस्थान पर उपासना का अधिकार है।

यह अधिकार मुझसे छीना नहीं जा सकता। उन्होंने 80 वर्ष के अब्दुल गनी की गवाही का हवाला देते हुए बोला था कि गनी ने बोला था बाबरी मस्जिद राम जन्मस्थान पर बनी है। ब्रिटिश राज में मस्जिद में सिर्फ जुमे की नमाज़ होती थी, हिन्दू भी वहां पर पूजा करने आते थे। रंजीत कुमार ने बोला था कि मस्जिद गिरने के बाद मुस्लिमों ने नमाज़ पढ़ना बंद कर दिया, लेकिन हिंदुओं ने जन्मस्थान पर पूजा जारी रखी।

इससे पहले बुधवार को रामलला विराजमान के एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन ने अपनी बहस पूरी कर ली थी। उन्होंने बोला था कि विवादित धरती पर मंदिर रहा हो या न हो, मूर्ति हो या न हो, लोगों की आस्था होना बहुत ज्यादा है, यह साबित करने के लिए कि वही रामजन्म जगह है। वैद्यनाथन ने बोला था कि जब संपत्ति भगवान में निहित होती है तो कोई भी उस संपत्ति को ले नहीं सकता व उस संपत्ति से भगवान का हक नहीं छीना जा सकता। ऐसी संपत्ति पर एडवर्स पजेशन का कानून लागू नहीं होगा।

रामलला के एडवोकेट ने बोला था कि मंदिर में विराजमान रामलला कानूनी तौर पर नाबालिग का दर्जा रखते हैं। नाबालिग की संपत्ति किसी को देने या बंटवारा करने का निर्णय नहीं हो सकता।

हज़ारों वर्ष से लोग जन्मस्थान की पूजा कर रहे हैं। इस आस्था को उच्चतम न्यायालय को मान्यता देना चाहिए। उन्होंने बोला था कि 1949 में विवादित इमारत में रामलला की मूर्ति पाए जाने के बाद 12 वर्ष तक दूसरा पक्ष निष्क्रिय बैठा रहा। उन्हें कानूनन दावा करने का हक नहीं है। न्यायालय जन्मस्थान को लेकर हज़ारों वर्ष से लगातार चली आ रही हिंदू आस्था को महत्व दे। इसके साथ ही रामलला विराजमान के एडवोकेट सीएस वैद्यनाथन ने अपनी बहस पूरी कर ली थी।