ट्रंप के मध्य-पूर्व शांति योजना के मुख्य योजनाकार जेसन ग्रीनब्लाट ने पिछले दिनों  दे दिया त्याग पत्र

ट्रंप के मध्य-पूर्व शांति योजना के मुख्य योजनाकार जेसन ग्रीनब्लाट ने पिछले दिनों  दे दिया त्याग पत्र

अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के मध्य-पूर्व शांति योजना के मुख्य योजनाकार जेसन ग्रीनब्लाट ने पिछले दिनों त्याग पत्र दे दिया. माना जाता है कि वे इजराइल व फलिस्तीन को लेकर अमरीकी रुख से नाराज थे. इससे यह तो साफ है कि मध्य-पूर्व में शांति प्रक्रिया पर पुनर्विचार अमरीका की विफलता दर्शाता है. सवाल ये है कि इसे आगे कैसे बढ़ाया जाए? सबसे पहले शांति टीम को दुरुस्त करना चाहिए, जिसे अमरीकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने अपने दामाद जेरेड कुशनर की अध्यक्षता में गठित की थी. समिति ने पूर्वी व पश्चिमी क्षेत्र पर ध्यान दिए बिना यरूशलम में इजराइल की संप्रभुता को मान्यता देकर वार्ता के आधार को तोड़ दिया. टीम ने फलिस्तीनियों के साथ राजनयिक संबंध भी तोड़ लिए. इतना ही नहीं सरकार ने फलिस्तीनियों को मिलने वाली शिक्षा, सुरक्षा व स्वास्थ्य से जुड़ी सभी तरह की सहायता में भी कटौती कर दी. इससे भी आगे अमरीका गोलान पहाडिय़ों पर इजराइल का साथ देकर उसे व हिस्सों पर अतिक्रमण करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है.

अरब राष्ट्रों के लिए बड़ी विफलता
इस बीच कुशनर, ग्रीनब्लेट व डेविड फ्रीडमैन (इजराइल में अमरीकी राजदूत) ने साफ कर दिया है कि अब उनके नेता दोनों राष्ट्रों के बीच निवारण व समर्थन की बजाय उस नीति को बढ़ाएंगे, जिसे उन्होंने फलिस्तीनी स्वायत्तता बोला है. यह न केवल फिलिस्तीन, बल्कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात व अन्य अरब राष्ट्रों के लिए बड़ी विफलता होगी. इस सारी कठिनाई में व्हाइट हाउस वही कर रहा है, जो उसने ओबामाकेयर के साथ किया, यानी रिप्लेस नहीं निरस्त. यह नीति न फिलिस्तीन के लिए अच्छा है व न ही अरब राष्ट्रों के लिए.

ईरान के विरूद्ध नहीं मिलेगा साथ
इजराइल के लिए आम सहमति बनाने बनाने से खुला प्रयत्न समाप्त हो जाएगा, लेकिन यह ईरान के विरूद्ध इजराइल व खाड़ी राष्ट्रों के बीच एक मजबूत गठबंधन की आसार को रोकेगा. हालांकि दोनों राष्ट्रों के बीच निवारण के लिए अमरीका की प्रतिबद्धता को पुनर्जीवित करने में बहुत देर नहीं हुई है, भले ही उसे अगले राष्ट्रपति की प्रतीक्षा करनी पड़े. अमरीका को स्पष्ट करना चाहिए कि यरूशलम में इजराइल की संप्रभुता की मान्यता पश्चिमी यरूशलम पर लागू होती है न कि पूर्वी यरूशलम पर अतिक्रमण करने के लिए, जिसके बारे में स्थिति बातचीत से निर्धारित की जानी है.