फिल्म 'सुपर 30' को लेकर  ऋतिक ने खोला ये बड़ा राज

फिल्म 'सुपर 30' को लेकर  ऋतिक ने खोला ये बड़ा राज

ऋतिक कई दिनों से अपनी फिल्म 'सुपर 30' के प्रचार में लगे हों, पर अगर आपको लगता है कि इस वजह से उन पर थकान हावी हो चुकी होगी, तो आप गलत हैं. उनके उत्साह वजोश में अब भी कोई कमी नहीं आई है.

Image result for  ऋतिक

ऐसे वक्त में जब लोग 'ग्रीक गॉड' जैसे दिखने वाले ऋतिक के बिहारी भूमिका निभाने की आलेचना कर रहे हैं, इस पर चुटकुले बना रहे हैं, तब भी वह पूरी तरह संयत हैं व इसे हल्के अंदाज में ले रहे हैं. अपने मजाकिया अंदाज में वह कहते हैं, 'पिछले दिनों मैं ग्रीस गया व वहां मुझे किसी ने नहीं पहचाना. अब अगर मैं सचमुच 'ग्रीक गॉड' होता, तो वहां के लोग यकीनन मुझे पहचानते व कहते, 'हे गॉड, गॉड आए हैं!' पर ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ. इसलिए मैं गुस्से की भावना मन में लिए वापस आ गया. मेरे मन में यही चल रहा था कि मेरे साथ धोखा हुआ है.' ऋतिक व फिल्म 'सुपर 30' में उनकी सह-कलाकार मृणाल ठाकुर के साथ बातों का सिलसिला कुछ यूं आगे बढ़ा.

सच कहूं तो मेरी खुशी का ठिकाना नहीं था. मुझे पूरा यकीन है कि आनंदजी की सुप्रिया बनने की वजह से बहुत सारे लोग मुझसे जलने लगे होंगे. मेरा अनुभव अद्भुत रहा. यह पूरी प्रक्रिया, ऑडिशन देने से लेकर फिल्म के लिए चुने जाने तक सब कुछ मेरे लिए एक सपने के हकीकत होने जैसा था.

हर वो फिल्म जिसमें मैंने कार्य किया, उसने मुझे आगे बढ़ने में मदद की. ये सभी फिल्में मेरी रूह की अभिव्यक्ति जैसी थीं. मैं हमेशा कहता रहता हूं कि मैं कोई बहुत महान एक्टर नहीं हूं. पर जब भी मैं ऐसा कहता हूं, लोगों को लगता है कि मैं खुद को बहुत समझदार साबित करना चाहता हूं. मैं किसी भूमिका की मनोस्थिति में एक निश्चित समय तक ही रहता हूं. उस मनोस्थिति से बाहर आने के बाद अगर आप मुझसे किसी भूमिका को निभाने के लिए कहेंगे, तो मैं ऐसा नहीं कर पाऊंगा.

मेरा मकसद हमेशा से ही विविधतापूर्ण कार्य करना रहा है. एक एक्टर सिर्फ एक्टर होता है. मैं नहीं चाहती कि मेरे नाम के साथ किसी विशेष किस्म के माध्यम का एक्टर होने का विशेषण जोड़ा जाए. मैं हर माध्यम में कार्य करने का अनुभव सहेजना चाहती हूं. मैं प्रारम्भ से ही बेहद प्रयोगधर्मी रही हूं. मेरिल स्ट्रीप मेरी आदर्श हैं. भारतीय एक्टर्स में मैं ऋतिक की बहुत बड़ी प्रशंसक हूं. गुजारिश, कोईमिल गया (2003), लक्ष्य (2004), कृष (2006) व सुपर 30- सभी फिल्मों में उन्होंने गजब का कार्य किया है. उन्होंने विविधतापूर्ण कार्य की एक मिसाल कायम की है.

हां, यह हकीकत है. मैं खुद को मोनोटनी से बचा कर रखने में यकीन रखता हूं. इस हद तक कि मैंने इससे जुड़े एक वाक्य का आविष्कार किया है, जो मैं अपने बच्चों को भी सिखाता हूं. वह वाक्य है- 'एकरसता को समाप्त कर दो, इससे पहले कि वह आपके उत्साह को समाप्त कर दे.' अगर आप साल-दर-साल एक ही कार्य करते रहेंगे, तो आपके उत्साह का स्तर कम होता रहेगा. व एक दिन यह आलम होगा कि आप अपने आप से कहेंगे, 'अरे यार, आज फिर प्रातः काल उठ कर कार्यालय जाना पड़ेगा. मेरा बिलकुल मन नहीं है!' यह बेहद बुरी स्थिति होती है.