अमरीश पुरी ने साफ बोला था- जो मेरा हक है, वो मुझे मिलना चाहिए

अमरीश पुरी ने साफ बोला था- जो मेरा हक है, वो मुझे मिलना चाहिए

गुजरे जमाने के फेमस विलेन अमरीश पुरी की आज (22 जून को) 87वीं बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर उनकी जिंदगी के कुछ किस्सों पर नजर डालते हैं. मसलन, पुरी साहब की आदत थी कि वो वीडियो या ऑडियो साक्षात्कार नहीं देते थे.

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कई मौकों पर उनकी फुटेज दिखती भी है तो वो शूटिंग के दौरान की होती है. अखबारों या मैगजीन को साक्षात्कार देते वक्त भी वो अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे. वो ऐसा इसलिए करते थे ताकि लोग उनकी आवाज को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में ही सुनें. साक्षात्कार लेने वाले से वो साफ कह देते थे कि प्लीज, अपना रिकॉर्डर बंद कर लीजिए. जब मैगजीन से उन्हें साक्षात्कार के लिए फोन आता था, तो वो कहते थे कि अगर कवर स्टोरी में स्थान मिलेगी तभी साक्षात्कार दूंगा.

  1. निगेटिव भूमिका से आरंभ करने वाले अमरीश पुरी ने 90 के दशक में पॉजिटिव के भूमिका निभाने प्रारम्भ किए थे. उनका कद बहुत ज्यादा बढ़ चुका था व कई बार ऐसा भी होता था कि मुंहमांगी फीस न मिलने पर वो फिल्म छोड़ दिया करते थे. 1998 के एक साक्षात्कार में इस बात का जिक्र है कि एन। एन। सिप्पी की एक फिल्म उन्होंने सिर्फ इसलिए छोड़ दी थी, क्योंकि उन्हें मांग के मुताबिक 80 लाख रुपए नहीं दिए जा रहे थे.

    अमरीश ने साफ बोला था- पैसे नहीं तो फिल्म नहीं

    अमरीश ने साक्षात्कार में कहा, "जो मेरा हक है, वो मुझे मिलना चाहिए. मैं एक्टिंग के साथ कोई समझौता नहीं करता. तो फिल्म के लिए कम पैसा स्वीकार क्यों करूं. लोग मेरी एक्टिंग देखने आते हैं. प्रोड्यूसर्स को पैसा मिलता है, क्योंकि मैं फिल्म में होता हूं. तो क्या प्रोड्यूसर्स से मेरा चार्ज करना गलत है? जहां तक सिप्पी की फिल्म की बात है तो वह मैंने बहुत पहले साइन की थी. वादा था कि वर्ष के अंत में फिल्म प्रारम्भ होगी. लेकिन तीन वर्ष बीत चुके हैं. बाजार का भाव बढ़ गया है. अगर वो मुझे उतना पैसा नहीं दे सकते तो मैं उनकी फिल्म नहीं कर सकता."

  2. मशहूर फिल्म डायरेक्टर श्याम बेनेगल ने एक साक्षात्कार में बताया था, "एक बार हमारे एक दोस्त व उसकी फैमिली का दुर्घटना हो गया. पत्नी सरवाइव कर गई, लेकिन दोस्त व उसका बेटा क्रिटिकल थे. हॉस्पिटल में उनके लिए रेयर ब्लड ग्रुप की आवश्यकता पड़ी, जो कि अमरीश का ग्रुप भी था. हमारे उस दोस्त से उनका कोई परिचय नहीं था. बावजूद इसके वो अस्पताल पहुंचे व डॉक्टर्स से बोले, 'मैं ब्लड देना चाहता हूं, जितनी आवश्यकता हो ले लीजिए.' दुर्भाग्य से दोस्त व उसका बेटा बचे नहीं. लेकिन बिना किसी के कहे अमरीश का ब्लड देना मुझे आज भी याद है."

  3. श्याम बेनेगल के मुताबिक सत्यदेव दुबे के थिएटर ग्रुप में वो अमरीश से पहली बार मिले थे. तब अमरीश जीवन इंश्योरेंस एजेंट भी थे व मोटरसाइकिल से इधर-उधर घूमा करते थे. बेनेगल ने बताया था कि अपनी पहली फिल्म अंकुर के लिए उन्होंने एक एक्टर को कास्ट किया, जिसकी शारीरिक मौजूदगी अच्छी थी, लेकिन वह प्रॉपर ढंग से डायलॉग नहीं बोल सकता था.

    वो कहते हैं, "तब मैंने उस लड़के लिए अमरीश से डब कराया. लेकिन बाद में अहसास हुआ कि मैं ये क्यों कर रहा हूं. इसलिए जब मैंने अपनी अगली फिल्म निशांत बनाई तो अमरीश पुरी को भूमिका ऑफर कर दिया." बेनेगल के मुताबिक, निशांत में अमरीश का कार्य लोगों को पसंद आया व वो पॉपुलर हो गए.