सुप्रीम न्यायालय ने तलाकशुदा बेटी को लेकर केन्द्र से पूछा यह बड़ा सवाल

सुप्रीम न्यायालय ने तलाकशुदा बेटी को लेकर केन्द्र से पूछा यह बड़ा सवाल

सुप्रीम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को केन्द्र से पूछा है कि स्वतंत्रता सेनानी पेंशन का फायदा स्वतंत्रता सेनानी की तलाकशुदा बेटी को क्यों नहीं मिलना चाहिए?

जस्टिस यूयू ललित की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने तुलसी देवी की इस याचिका पर केन्द्र सरकार को नोटिस जारी किया है. सरकार को जुलाई के आखिरी सप्ताह तक जवाब दाखिल करने के लिए बोला गया है. इससे पहले हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने तुलसी देवी की याचिका को खारिज कर दिया था.


वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से हुई इस सुनवाई में याचिकाकर्ता महिला की ओर से पेश एडवोकेट दुष्यंत पाराशर ने पीठ से बोला कि उनकी मुवक्किल के पिता गोपाल राम स्वतंत्रता सेनानी थे, जिस कारण उन्हें स्वतंत्रता सेनानी पेंशन मिलता था. उनकी तलाकशुदा बेटी तुलसी उनके साथ रहती थी व वह पूरी तरह से अपने माता पिता पर आश्रित थी. पिता की मौत के बाद तुलसी पूरी तरह से अपनी मां कौशल्या पर आश्रित हो गई. 
अपने जीवनकाल में कौशल्या ने जनवरी, 2018 में पीएम को लेटर लिखकर आग्रह किया कि स्वतंत्रता सेनानी पेंशन का फायदा उसके बाद बेटी को मिले, क्योंकि उनकी बेटी पूरी तरह से उसी पर निर्भर है व उसके पास आमदनी का कोई व जरिया भी नहीं है. सितंबर 2018 में उनके इस आग्रह को नकार दिया गया, जिसके बाद तुलसी ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, लेकिन उच्च न्यायालय ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया. उच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में बोला कि स्वतंत्रता सैनिक सम्मान पेंशन योजना के प्रावधानों में इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं है. जिसके बाद तुलसी ने उच्च न्यायालय के इस निर्णय के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की.पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय के 2016 के निर्णय का एडवोकेट ने दिया हवाला

याचिकाकर्ता के एडवोकेट दुष्यंत पाराशर ने पीठ के समक्ष पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय की तरफ से वर्ष 2016 में दिए उस निर्णय का हवाला दिया जिसमें इसी तरह की राहत दी गई थी, जिसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी ठीक ठहराया था. उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय के निर्णय पर हस्तक्षेप करने से मना करते हुए उच्च न्यायालय के निर्णय को प्रगतिशील व सामाजिक रूप से रचनात्मक दृष्टिकोण वाला बताया था. साथ ही पाराशर ने वर्ष 2012 के उस सर्कुलर का भी हवाला दिया है, जिसमें तलाकशुदा बेटी को पेंशन देने का प्रावधान है.