प्रियंका गांधी ने केन्द्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति पर उठाए सवाल

प्रियंका गांधी ने केन्द्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति पर उठाए सवाल

कांग्रेस पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी ने 'जिम्मेदार कौन' के अनुसार केन्द्र सरकार की वैक्सीन वितरण नीति पर प्रश्न खड़े किए हैं. उन्होंने बोला कि सरकार हिंदुस्तान की मात्र 3 फीसदी जनसंख्या का वैक्सीनेशन कर पाई है, जोकि टारगेट से बहुत पीछे है. उन्होंने बोला कि ये दंग करने वाली बात है कि दूसरी लहर के कहर के समय जब नरेन्द्र मोदी सरकार को वैक्सीन वितरण की व्यवस्था की बागडोर और अधिक मजबूती से अपने हाथों में लेनी थी, उस समय सरकार ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए वैक्सीन वितरण का दारोमदार प्रदेश सरकारों पर डाल दिया.


प्रियंका गांधी ने बोला कि सरकार ने अप्रैल तक लगभग 34 करोड़ वैक्सीनों का ऑर्डर ही दिया था. अभी की गति के मुताबिक मई में रोजाना औसतन मात्र 19 लाख लोगों को वैक्सीन लग रही है. सरकार ने दिसंबर तक सबको वैक्सीन देने का दावा तो किया है, लेकिन इसके लिए रोजाना 70-80 लाख वैक्सीन लगाने की कोई कार्ययोजना देश के लोगों के सामने नहीं रखी है. प्रियंका गांधी ने वैक्सीन के तीन भिन्न-भिन्न दामों पर हमलावर होते हुए बोला कि जब वैक्सीन देशवासियों को ही लगनी है तो ये भेदभाव क्यों? क्यों एक देश और वैक्सीन के तीन भिन्न-भिन्न दाम.


क्यों आई ऐसी नौबत?
कांग्रेस महासचिव ने केन्द्र सरकार की वैक्सीन वितरण की दिशाहीनता पर भी प्रश्न उठाए हैं. उन्होंने बोला कि केन्द्र सरकार की दिशाहीन नीति के चलते कई प्रदेश वैक्सीनों के लिए ग्लोबल टेंडर निकालने को विवश हुए. आज Pfizer, Moderna जैसी कम्पनियों ने राज्यों से सीधे वैक्सीन की डील करने से इन्कार कर दिया है और केन्द्र से डील करने की बात कही है. प्रियंका गांधी ने पूछा है कि आज आखिर क्यों ऐसी नौबत आई कि प्रदेश सरकारों को ग्लोबल टेंडर निकालकर आपस में ही प्रतिद्वंदिता करनी पड़ रही है.

ग्रामीण कैसे कराएंगे वैक्सीनेशन?
प्रियंका गांधी ने केवल एप आधारित वैक्सीन वितरण प्रणाली पर भी प्रश्न उठाए हैं. उन्होंने बोला कि हिंदुस्तान में 60 फीसदी आबादी के पास इंटरनेट नहीं है. शहरी क्षेत्रों में भी लोगों को कोविन एप में रजिस्टर करके वैक्सीन के स्लॉट पाने में परेशानी हो रही है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में और इंटरनेट से वंचित लोगों के लिए वैक्सीन के स्लॉट पाना तो बड़ा मुश्किल होगा. आखिर क्यों सरकार ने वैक्सीन वितरण नीति बनाते समय डिजिटल साक्षरता एवं इंटरनेट की अनुपलब्धता जैसे बिंदुओं को ध्यान में नहीं रखा.


सरकार की वैक्सीन वितरण नीति ढुलमुल : प्रियंका गांधी
प्रियंका गांधी ने बोला कि सरकार की वैक्सीन वितरण नीति एकदम ढुलमुल है. तमाम जानकार लगातार आगाह करते रहे हैं कि कोविड-19 से निपटने के लिए अधिक से अधिक वैक्सीनेशन महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार ने आज सबको वैक्सीन देने की योजना को गर्त में धकेल दिया है.


शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

मध्य प्रदेश में कई ऐसी नदियां हैं, जहां भारी बारिश के चलते अक्सर जल स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में इन नदियों में मगरमच्छों की भरमार भी मिलती है। कभी-कभी तो पानी बहकर शहरों एवं गावों तक पहुंच जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि बुधवार को शिवपुरी की मीट मार्केट में 15 फीट का मगरमच्छ दिखाई दिया। ऐसे में जब युवाओं ने इसे देखा तो उन्होंने वन विभाग को सूचना देने के बजाय खुद की रस्सी से बांधकर उसके साथ सेल्फी लेने लगे।

पिछले सात दिनों में शिवपुरी में अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं मगरमच्छ

शिवपुरी में पिछले सात दिन में तीन मगरमच्छ अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं। खास बात यह है कि यहां पर युवा इन मगरमच्छों को खुद पकड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी द्वारा इसकी वन विभाग मगरमच्छ की सूचना भी नदीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं युवा इन मगरमच्छों के साथ फो खिंचवा रहे हैं। शिवपुरी में जब लोगों ने 15 फीट के मगरमच्छ को देखा तो जोखिम उठाते हुए खुद ही रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद उसे कंधों पर उठाकर मस्ती करने लगे।

सेल्फी और वीडियो बनाने में जुटे युवा

इतना ही नहीं लोगों ने उसके साथ सेल्फी, फोटो और वी़डियो बनाई। ऐसे में इन युवाओं की लापरवाही उनको भारी पड़ सकती है! क्योंकि मगरमच्छ कभी-भी युवाओं पर हमला कर सकता है।

खतरनाक प्राणी है मगरमच्छ

बता दें कि मगरमच्छ पानी और धरती पर पाया जाने वाला खतरनाक जीव है। खुरदुरी खाल, उबड़-खाबड़ शरीर और मजबूत जबड़े वाला ये प्राणी ऐसा है कि देखने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ये धरती के प्राचीनतम जीवों में से एक हैं और स्तनधारी और सरीसृप दोनों ही श्रेणियों में शामिल है।


भयानक और भयावह इस जीव की खाल बुलेटप्रूफ मानी जाती है, जिसे बंदूक की गोली द्वारा भी भेदा नहीं जा सकने का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मानव द्वारा किये जाने वाले शिकार के कारण इसकी कई प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर है। इसकी खाल विश्व की सर्वश्रेष्ठ खालों में गिनी जाती है और फैशन इंडस्ट्रीज में बहुत लोकप्रिय है।