हिंदुस्तान सरकार ने चाइना के साथ जारी तनाव के दौरान बिजली उपकरण आयात को लेकर किया यह निर्णय

हिंदुस्तान सरकार ने चाइना के साथ जारी तनाव के दौरान बिजली उपकरण आयात को लेकर किया यह निर्णय

पूर्वी लद्दाख में असली नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चाइना के साथ जारी तनाव के बीच हिंदुस्तान सरकार ने चाइना से बिजली उपकरण आयात न करने का फैसला लिया है.

 केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने कहा, चाइना ही नहीं, पाक से बिजली के सामान आयात नहीं किए जाएंगे. राज्यों के ऊर्जा मंत्रियों के सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए सिंह ने कहा, चाइना व पाक से उपकरणों के आयात को विशेष रूप से निरीक्षण के आधार पर इजाजत नहीं दी जाएगी. 


राज्यों के डिस्कॉम को भी चीनी कंपनियों को उपकरण की सप्लाई आदेश नहीं देने चाहिए. पूर्व संदर्भित (प्रायर रेफरेंस) राष्ट्रों से उपकरणों की आयात की अनुमति नहीं होगी. इसके तहत केन्द्र सरकार राष्ट्रों की सूची तैयार कर रही है, लेकिन इसमें मुख्य रूप से चाइना व पाक शामिल हैं. प्रायर रेफरेंस राष्ट्रों की श्रेणी में उन्हें रखा जाता है, जिनसे हिंदुस्तान को खतरा है या खतरे की संभावना है. मुख्य रूप से इसमें वे देश हैं जिनकी सीमाएं भारतीय सीमा से लगती हैं.

21 हजार करोड़ के उपकरण चाइना से आयात

केंद्रीय बिजली मंत्री ने कहा, मैंने राज्यों से भी इस दिशा में कदम उठाने को बोला है. हम अपने देश में सभी चीजों का उत्पादन करते हैं. हिंदुस्तान 71,000 करोड़ रुपये के बिजली उपकरण आयात करता है, जिसमें 21,000 करोड़ के उपकरण चाइना से आते हैं. हम प्रभावित हैं. उन उपकरणों में मालवेयर होने कि सम्भावना है, जिसे वे हमारे क्षमता सिस्टम को नुकसान पहुंचाने के लिए दूर से ही सक्रिय कर सकते हैं.

भारत सौर उपकरण निर्यात करने की स्थिति में

मीटिंग के दौरान सिंह ने कहा, हिंदुस्तान सौर ऊर्जा के मुद्दे में चाइना पर निर्भर नहीं है. हमारे पास अपनी आवश्यकता के सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता तो है ही बल्कि अब हम इन्हें निर्यात करने की स्थिति में हैं. यह सौर ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हिंदुस्तान बनने की ओर एक बड़ा कदम होगा. उन्होंने कहा, 2014 के बाद से हिंदुस्तान ने हर साल 15,000 मेगावाट ऊर्जा की क्षमता बढ़ाई. 

अब लद्दाख से अरुणाचल प्रदेश तक पूरा देश एक ग्रिड से जुड़ गया है. हिंदुस्तान के पास 2500 मेगावाट सोलर सेल बनाने की क्षमता है, जिसे इस वर्ष 7000 मेगावाट व बढ़ाने जा रहे हैं. चार जार मेगावाट के टेंडर जारी हो गए हैं. बाकी 3000 मेगावाट के जल्द टेंडर होगा. सरकार की प्रयास है कि इनके दाम बेहद न हों, जिससे सौर ऊर्जा कम दामों पर आम आदमी को उपलब्ध हो.