इन नारों के साथ हुआ शहीद सुनील कुमार का अंतिम संस्कार

इन नारों के साथ हुआ शहीद सुनील कुमार का अंतिम संस्कार

शहीद सुनील कुमार अमर रहें. जब तक सूरज चांद रहेगा सुनील तेरा नाम रहेगा. वंदे मातरम. एक के बदले सौ लेंगे. इन नारों से गुरुवार की प्रातः काल आसमां गूजं गया.

 भारत-चीन सीमा पर गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प में पटना निवासी शहीद सुनील कुमार का मृत शरीर प्रातः काल बिहटा पहुंचा. दानापुर से निकलने के दौरान ही बड़ी संख्या में लोग साथ होते गए. अपने सपूत के अंतिम दर्शन के लिए जनसैलाब उमड़ पड़ा. कहीं किसी की आंखें नम दिखीं तो कहीं चाइना की हरकत पर गुस्सा भी. बाद में मनेर में शहीद के मृत शरीर का अंतिम संस्कार किया गया. पुत्र आयुष ने शहीद सुनील कुमार को मुखाग्नि दी.

फूट-फूटकर रोये स्वजन

सुबह करीब 5.30 पर जब शहीद सुनील कुमार का मृत शरीर बिहटा स्थित उनके गांव पहुंचा तो माहौल बदल गया. शहीद को देखते ही स्वजन फूट-फूटकर रोने लगे. आसपास के इलाकों से लेकर दूर-दूर रहने वाले दानापुर से ही बिहटा तक शहीद के मृत शरीर के साथ गांव तक आए. इस दौरान स्वजनों के साथ पूरा गांव बिलख पड़ा. सभी की आंखें नम थीं.

300 मीटर का तिरंगा थामे रहे लोग

दानापुर से बिहटा आने के दौरान बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते गए. ग्रामीणों शहीद के मृत शरीर के साथ ही 300 मीटर का झंडा भी लेकर चल रहे थे. झंड़े को बड़ी संख्या में लोगों ने थामे रखा था. भारत माता की जय. वंदे मातरम, सुनील कुमार अमर रहें. जबतक सूरज-चांद रहेगा सुनील तेरा नाम रहेगा. जैसे नारे लगते रहे.

बिहटा के रहने वाले थे सुनील कुमार

गौरतलब हो कि भारत-चीन सीमा पर गलवन घाटी में हुई हिंसक झड़प में बिहार के छह सैनिक शहीद हुए. इसमें बिहटा प्रखंड में सिकरिया पंचायत के तारानगर निवासी बासुदेव साव की छोटे पुत्र हवलदार सुनील कुमार (37) भी शहीद हो गए. सुनील कुमार सन् 2002 से सेना में अपना सहयोग दे रहे थे. बुधवार को राजधानी के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट पर अपने शहीद का मृत शरीर पहुंचा था.

बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

शहीद सुनील कुमार की सन 2004 में सकरी निवासी रिक्की देवी के साथ विवाह हुई थी. वे अपने पीछे पत्नी व एक पुत्री और दो पुत्र को छोड़ गए हैं. शाहिद के बड़े भाई अनिल कुमार भी अवकाश प्राप्त सेना के जवान हैं. सुनील कुमार के पिता बासुदेव साव घर पर किराना की दुकान चलाते हैं, जबकि उनकी मां रुक्मिणी देवी गृहणी हैं. पिता की मृत्यु के बाद बच्चों के साथ ही मां व बाप के आंसू नहीं रुक रहे हैं. बात-बात में स्वजन सुनील का जिक्र कर बिलख पड़ रहे हैं.