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Rahul Gandhi Birthday : जानें इनका जीवन परिचय

राहुल गांधी (अंग्रेज़ी: Rahul Gandhi, जन्म: 19 जून, 1970) मशहूर भारतीय राजनेता और राष्ट्र के पुराने सियासी दल कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं. उन्हें दिसम्बर 2017 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था. वह संसद के निचले सदन लोकसभा में केरल स्थित वायनाड चुनाव क्षेत्र का अगुवाई करते हैं. राहुल गांधी उस ‘नेहरू गाँधी’ परिवार से हैं जो हिंदुस्तान का प्रमुख सियासी परिवार है. 2009 के आम चुनावों में राहुल गांधी ने महत्त्वपूर्ण किरदार निभायी और उसमें मिली भारी कामयाबी का श्रेय उन्हें दिया जाता है. सियासी जीवन में उन्होंने हिंदुस्तान की ग्रामीण जनता से बहुत निकट का संबंध स्थापित किया और कांग्रेस पार्टी दल के संगठन को मज़बूती दी. उनकी सियासी रणनीतियों में ज़मीनी स्तर की सक्रियता को बल देना, ग्रामीण हिंदुस्तान के साथ गहरे संबंध स्थापित करना और कांग्रेस पार्टी पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मज़बूत करने की प्रयास करना, प्रमुख हैं. सतह से जुड़ने, अनुभव प्राप्त करने और हिंदुस्तान को निकट से जानने के लिए उन्होंने मनमोहन सिंह के नेतृत्व की गवर्नमेंट में कोई भी पद लेने से इंकार कर दिया. राहुल गांधी ने 2004 में अपने सियासी कॅरियर की आरंभ की. उन्होंने यूपी में अमेठी से अपने पिता राजीव गांधी के निर्वाचन क्षेत्र से पहला लोकसभा चुनाव लड़ा था. अब वे अपना सारा ध्यान सियासी अनुभव प्राप्त करने और पार्टी को जड़ से मज़बूत बनाने पर केंद्रित कर रहे हैं.

जीवन परिचय

भारत के पूर्व पीएम राजीव गाँधी और वर्तमान कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी को 19 जून 1970 को नई दिल्ली में एक पुत्ररत्न की प्राप्ति हुई, जिसका नाम बहुत प्यार और उम्मीदों के साथ राहुल रखा गया. वह अपने माता पिता की दो संतानों में बड़े हैं और उनकी छोटी बहन प्रियंका गांधी वढेरा हैं. राहुल की दादी हिंदुस्तान की पूर्व पीएम इंदिरा गांधी थीं.

राहुल गांधी की प्रारम्भिक शिक्षा दिल्ली के ‘मॉर्डन स्कूल’ में हुई. इसके बाद वह शिक्षा के लिए ‘दून स्कूल’ भेजे गये जहाँ पर उनके पिता श्री राजीव गांधी ने भी शिक्षा प्राप्त की थी. सुरक्षा कारणों से 1981 से 1983 तक उन्होंने घर पर ही शिक्षा प्राप्त की. ‘फ्लोरिडा’ के हावर्ड यूनिवर्सिटी से 1994 में उन्होंने ‘कला स्नातक’ की परीक्षा दी और कामयाबी प्राप्त की. 1995 में अपनी शिक्षा में उन्होंने ट्रिनिटी कॉलेज, कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से दर्शन शास्त्र में एम फिल किया. इसके पश्चात् तीन वर्ष तक माइकल पोर्टर की प्रबंधन परामर्श कंपनी ‘मानीटर ग्रुप’ के साथ कार्य किया. इस कंपनी में वह ‘रॉस विंसी’ नाम से कार्य करते थे और उनके सहकर्मियों को उनके संबंध में जानकारी नहीं थी. राहुल के आलोचक उनके इस क़दम को उनके भारतीय होने से उपजी उनकी हीनभावना मानते हैं जबकि, काँग्रेसी उनके इस क़दम को उनकी सुरक्षा से जोड़कर देखते हैं. सन् 2002 में वह हिंदुस्तान लौट आये और मुंबई से ‘अभियांत्रिकी और प्रौद्योगिकी’ से संबंधित कंपनी चलायी.

राजनीति में प्रवेश

2003 में, राहुल गांधी के राजनीति में प्रवेश को लेकर समाचारपत्रों में समाचार छपते रहे किंतु उन्होंने इसकी कभी पुष्टि नहीं की. सार्वजनिक उत्सवों और कांग्रेस पार्टी की बैठकों में वह अपनी माँ सोनिया गांधी के साथ दिखायी देते थे और बहिन प्रियंका गांधी के साथ एकदिवसीय क्रिकेट श्रृंखला देखने सदभावना यात्रा पर पाक भी गये. 2004 में जब प्रियंका गांधी और राहुल गांधी ने अपने पिता स्व॰ राजीव गांधी के क्षेत्र अमेठी का दौरा किया, जो इस समय उनकी माता सोनिया गांधी का भी क्षेत्र है, उस समय उनके राजनीति में प्रवेश को लेकर मीडिया में अटकलें रहीं. किंतु उन्होंने साफ बोला – ‘मैं राजनीति के खिलाफ नहीं हूँ. मैंने यह तय नहीं किया है कि मैं राजनीति में कब प्रवेश करूँगा और वास्तव में, करूँगा भी कि नहीं.

मार्च 2004 में राहुल गांधी ने मई में होने वाले चुनाव में भाग लेकर राजनीति में प्रवेश की घोषणा की और अपने पिता के चुनाव क्षेत्र यूपी के अमेठी क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा. इससे पहले, उनके चाचा संजय ने, एक विमान हादसा से पहले, इस कुर्सी का नेतृत्व किया. यह कुर्सी उनकी माँ के नेतृत्व में थी जब तक वह पड़ोसी कुर्सी राए बरेली में स्थानान्तरित नहीं हुई थी. उस समय कांग्रेस पार्टी संकट में थी. कांग्रेस पार्टी के पास 80 में से 10 सीट थीं. उस समय राजनीति जानकारों को आश्चर्य हुआ क्योंकि वह प्रियंका गांधी के राजनीति में आने की अपेक्षा कर रहे थे. पार्टी के ऑफिसरों के पास मीडिया के लिए CV तैयार नहीं था, उनका यह क़दम आश्चर्य जनक था. मीडिया में चर्चा थी कि क्या हिंदुस्तान के मशहूर सियासी परिवार का युवा सदस्य हिंदुस्तान की युवा जनसंख्या के बीच में क्या कांग्रेस पार्टी पार्टी की राजनीति को पुनर्जीवित करेगा? मीडिया के साथ अपने पहले साक्षात्कार में, राहुल गांधी ने विभाजनकारी राजनीति की आलोचना की और बोला कि वह भारतीय जाति प्रबंध और धार्मिक तनाव को कम करने का कोशिश करेंगे. उनके इस क़दम का अमेठी के लोगों ने उत्साहपूर्वक स्वागत किया. अमेठी का इस परिवार के साथ एक लंबा संबंध था.

उन्होंने बोला कभी-कभी मैं यह सोच कर उदास हो जाता हूँ कि चुनाव प्रचार में यहाँ सिर्फ़ एक दिन के लिए आ पाया और इस नाते मै अपनी बहन प्रियंका को धन्यवाद भी देना चाहता हूँ, जो यहाँ काफ़ी समय दे रही हैं. राहुल गाँधी ने अमेठी और रायबरेली के विकास के लिए किए गए कार्य और प्रयासों का उल्लेख करते हुए बोला मेरे पिता अपने दोनों हाथों से इस क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाते थे, मगर मेरा एक हाथ बंधा हुआ है. कारण, मुझे राज्य गवर्नमेंट से योगदान नहीं मिल पा रहा है, बल्कि वह विकास में बाधा डालती है. उन्होंने जनता से अपील की कि हम चाहते हैं आपके योगदान से उत्तरप्रदेश में भी कांग्रेस पार्टी की गवर्नमेंट बने और मैं दोनों हाथों से आपकी सहायता कर सकूँ. ‘उन्होंने बोला कि अमेठी मेरे लिए परिवार जैसा है. राहुल ने एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए बोला कि मेरा रिश्ता सिर्फ़ सियासी ही नहीं, बल्कि परिवार जैसा है. यह रिश्ता मेरी दादी इंदिरा गाँधी और पिता राजीव गाँधी के समय से है. मेरा कोशिश हमेशा यह रहेगा कि मैं अमेठी के विकास को सुनिश्चित कर सकूँ. कांग्रेस पार्टी के पक्ष में मतदान की अपील करते हुए राहुल ने बोला कि पीएम मनमोहनसिंह अपना काम बहुत अच्छी तरह कर रहे है और वे आपके समर्थन के हकदार हैं. मुझे भी आपका स्नेह चाहिए. बचपन के एक किस्से को याद करते हुए राहुल ने कहा कि मैं जब दस बारह वर्ष का था तब अपने पिता के साथ पहली बार यहाँ आया था. तेज़ गर्मी के दिन थे और रास्ते बहुत ख़राब थे. जब मेरे पिता गाँव में घूम रहे थे तब मैं भी उनके साथ था. अचानक मेरी नज़र एक जले हुए मकान पर पड़ी, जिसमें जला हुआ अनाज और यहाँ तक कि बर्तन भी जले हुए थे. तभी मेरी नज़र एक बुजुर्ग स्त्री पर पड़ी, जिसने मुझे एक चॉकलेट भी दी थी और तभी से मेरे मन में अमेठी के लिए एक ख़ास अपनापन पैदा हो गया. अमेठी के विकास के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए राहुल ने बोला जहाँ तक अमेठी का प्रश्न है, मैं आपके लिए और अमेठी के विकास के लिए लड़ता रहा हूँ और जो प्यार मुझे आपसे मिला है, उसके दम पर संघर्ष को आगे भी जारी रखूँगा.[1]

कांग्रेस के नेता

मई 2004 लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी विशाल बहुमत से जीते. 1,00,000 मतों के बड़े अंतर से उनकी जीत हुई. जब कांग्रेस पार्टी ने सत्तारूढ़ बीजेपी को अप्रत्याशित रूप से हराया. इस अभियान में उनकी छोटी बहन प्रियंका गांधी उनके साथ क़दम से क़दम मिलाकर उनके साथ थीं.[2] सन 2006 तक उन्होंने कोई अन्य पद ग्रहण नहीं किया और निर्वाचन क्षेत्र के मुद्दों और यूपी की राजनीति पर ध्यान केंद्रित किया. हिंदुस्तान और अंतर्राष्ट्रीय प्रेस में व्यापक रूप से चर्चा थी कि सोनिया गांधी उन्हें राष्ट्रीय स्तर का कांग्रेस पार्टी नेता बनाने के लिए तैयार कर रही हैं.[3] राहुल गांधी और उनकी बहन प्रियंका गांधी ने 2006 के चुनाव में रायबरेली से पुनः निर्वाचित होने के लिए अपनी माँ सोनिया गांधी के चुनाव अभियान को सम्भाला और सोनिया गांधी 4,00,000 मतों से विजित हुईं. दिवंगत राजीव गांधी की इस मंशा और उनके सपनों को उनके पुत्र और अमेठी के सांसद राहुल गांधी ने पढा है जिसे वह निरन्तर अमेठी की ज़मीन पर उतारने में अपना क़दम बढाते जा रहे हैं. राहुल गांधी की भी मंशा नयी तकनीक और विज्ञान की हर फायदेमंद योजना अमेठी के आखिरी आदमी तक पहुंचाना है. साफ्टवेयर के बादशाह बिल गेट्स का राहुल के साथ दौरा अमेठी में कम्प्यूटर योजना को उतारने का ही संकेत बताया जा रहा है.

दिवंगत राजीव गांधी ने .985 में अमेठी में विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन कर अमेठी की जनता में विज्ञान के प्रति जागरुकता पैदा करना तथा विकसित हो रही नई तकनीक के प्रति उस समय पैदा किये जा रहे भ्रम को दूर करना था. इस प्रदर्शनी में विज्ञान के क़रीब-क़रीब सारे प्रयोगों के माडल और उनके कार्य व्यवहार, लाभ-हानि को दर्शाया गया था. उस समय कम्प्यूटर और मोबाइल संचार क्रांति का सूत्रपात नहीं हुआ था.‘[4] जनवरी 2006 में, हैदराबाद में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के सम्मेलन में, कांग्रेस पार्टी पार्टी के हज़ारों कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी को पार्टी में महत्त्वपूर्ण नेतृत्व की किरदार के लिए प्रोत्साहित किया और प्रतिनिधियों को सम्बोधित करने की मांग की. राहुल गांधी ने बोला – ‘मैं आपकी भावनाओं और समर्थन के लिए आप सबका आभारी हूँ. मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं आपको निराश नहीं करूँगा,’. उन्होंने बोला कि संयम बनाये रखें और महत्त्वपूर्ण पद लेने से इंकार कर दिया. यूपी विधानसभा चुनाव, जो 2007 में हुए, वह कांग्रेस पार्टी अभियान में प्रमुख आदमी थे. इस चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने 8.53% मतदान के साथ 22 सीटें जीती, इस चुनाव में बसपा का वर्चस्व रहा.

24 सितंबर 2007 में राहुल गांधी को अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी समिति का महासचिव नियुक्त किया गया. इसी समय उन्हें युवा कांग्रेस पार्टी और हिंदुस्तान का राष्ट्रीय विद्यार्थी संघ का निरीक्षण अधिकार दिया गया और इस तरह राहुल गांधी को युवा नेतृत्व का अवसर मिला. युवा नेता के रूप में नवम्बर 2008 को उन्होंने नयी दिल्ली में अपने आवास पर कम से कम 40 लोगों को सूक्षमता से चुनने के लिए इंटरव्यू आयोजित किया जिसमें चुने गये युवा भारतीय युवा कांग्रेस पार्टी (IYC) का अगुवाई करते हैं. जब से वह सितम्बर 2007 में महासचिव नियुक्त हुए हैं तब से इस संगठन को परिणत करने के इच्छुक हैं.

लोकसभा चुनाव 2009

लोकसभा चुनाव 2009 में उन्होंने अपनें निर्वाचन क्षेत्र अमेठी से अपने प्रतिद्वंदी को 3,33,000 मतों के भारी अंतर से पराजित किया. इन चुनावों में कांग्रेस पार्टी ने यूपी की कुल 80 लोकसभा सीटों में से 21 सीट जीतकर पुनर्जीवन प्राप्त किया और इसका श्रेय राहुल गांधी को दिया गया. इस चुनाव में उन्होंने छह हफ्ते में 125 जन सभाओं को सम्बोधित किया था. पार्टी वृत्त में वह RG के रूप में जाने जाते हैं.

व्यक्तिगत जीवन

राहुल गांधी अविवाहित हैं. अप्रैल 28, 2004 में भारतीय एक्सप्रेस में स्पेन की एक वास्तुकार ‘वरौनिका’ के साथ उनके संबंध होने की सूचना छ्पी थी. दोनों यूनिवर्सिटी में मिले थे.[5]

आलोचना

2006 में ‘न्यूज़वीक’ ने बोला कि उन्होंने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की अपनी डिग्री पूरी नहीं की थी या मॉनिटर ग्रुप में काम नहीं किया था, तब राहुल गांधी ने क़ानूनी नोटिस भेजा, बाद में न्यूज़वीक इस बात से मुकर गया.[6]
राहुल गांधी ने ‘बांग्लादेश मुक्ति युद्ध’ को, अपने परिवार की ‘सफलताओं’ में माना. इस बयान से हिंदुस्तान के कई सियासी दलों को निंदा करने का अवसर मिला.
2007 के यूपी चुनाव अभियान में उन्होंने बोला – ‘यदि गांधी-नेहरू परिवार से कोई राजनीति में एक्टिव होता तो बाबरी मस्जिद नहीं गिरी होती.‘ 1992 में मस्जिद के विध्वंस के समय हिंदुस्तान के पीएम पीवीनरसिंह राव थे, गांधी के इस बयान को नरसिंह राव की निंदा बोला गया.
2008 में, राहुल गांधी की शक्ति का पता चला. राहुल गांधी को चंद्रशेखर आज़ाद कृषि यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों को संबोधित करने के लिए बैठक भवन का इस्तेमाल करने से रोका गया, सीएम मायावती की सियासी चालबाजियों के कारण बाद में, यूनिवर्सिटी के कुलपति वी के सूरी को गवर्नर श्री टी वी राजेश्वर, जो कुलाधिपति भी थे, ने बाहर कर दिया, जो गांधी परिवार के समर्थक थे. इस घटना को शिक्षा की राजनीति के रूप में जाना गया और मीडिया में एक हास्यचित्र में लिखा गया : ‘वंश संबंधित प्रश्न का उत्तर राहुल जी के पैदल सैनिकों द्वारा दिया जा रहा है.‘[7]
जनवरी 2009 में ब्रिटेन के विदेश सचिव डेविड मिलीबैंड के साथ, यूपी में उनके संसदीय निर्वाचन क्षेत्र में, अमेठी के पास एक गाँव में, उनकी ‘ग़रीबी यात्रा’ के लिए निंदा की गई.,

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष

दिसंबर 2017 में कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष पद के लिए संपन्न चुनाव में राहुल गांधी को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया है. पार्टी महासचिव बनने के बाद उन्हें साल 2013 में हिंदुस्तान की सबसे पुरानी पार्टी का उपाध्यक्ष बनाया गया था. इसके बाद उन्होंने कई परिवर्तन किए थे. इनमें सबसे प्रमुख विभिन्न क्षेत्रों के कारगर युवा नेताओं को पार्टी में जगह देना था. यूथ कांग्रेस पार्टी और एनएसयूआई में आंतरिक लोकतांत्रिक प्रक्रिया के द्वारा युवाओं को शीर्ष पदों पर आसीन करने की प्रक्रिया प्रारम्भ करने का श्रेय उन्हें ही दिया जाता है. राहुल गांधी की सबसे बड़ी चुनौती नए और पुराने नेताओं के बीच संतुलन साधना होगा. बतौर महासचिव और उपाध्यक्ष राहुल ने युवाओं को अधिक मौका दिया. कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष के चुनाव के पीठासीन अधिकारी कांग्रेस पार्टी नेता एम रामचंद्रन ने कहा, ‘राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव करने वाले 89 नामांकन पत्र मिले और सभी वैध पाए गए. सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार मैदान में है. इसलिए मैं भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी के संविधान के अनुच्छेद-18 (डी) के अनुसार राहुल गांधी को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद के निर्वाचित घोषित करता हूं.’ 47 वर्ष के राहुल गांधी कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष बनने वाले नेहरू-गांधी परिवार के पांचवें सदस्य हैं. कांग्रेस पार्टी नेतृत्व में यह परिवर्तन तक़रीबन दो दशक बाद आया है. इससे पहले राहुल गांधी की मां सोनिया गांधी 19 वर्ष से पार्टी की कमान संभाल रही हैं. सोनिया गांधी कांग्रेस पार्टी की सबसे लंबे समय तक अध्यक्ष रही हैं.

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