किसान बोले- PM हमसे बात करें, कांग्रेस ने कहा- मोदी सरकार ईस्ट इंडिया कंपनी से बड़ी व्यापारी बन गई

किसान बोले- PM हमसे बात करें, कांग्रेस ने कहा- मोदी सरकार ईस्ट इंडिया कंपनी से बड़ी व्यापारी बन गई

तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में किसान आंदोलन का आज 23वां दिन है। किसान कानून वापसी की मांग पर अड़े हैं। दिल्ली के सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने कहा है कि प्रधानमंत्री को उनसे बात करनी चाहिए। कृषि कानूनों के खिलाफ अपनी लड़ाई नहीं छोड़ेंगे।

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, "मोदी दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों को दरकिनार कर मध्य प्रदेश के किसानों से बातचीत का ढोंग रच रहे हैं। मोदी सरकार के हाथ 24 अन्नदाताओं के खून से सने हैं। ये सरकार अब ईस्ट इंडिया कंपनी से भी बड़ी व्यापारी बन गई है, जो किसान की मेहनत की गंगा को मैली कर मुट्ठीभर पूंजीपतियों को पैसा कमवाने पर आमादा है।'

कांग्रेस ने कहा- मोदी सरकार ने किसानों पर 3 वार किए

सुरजेवाला बोले- सत्ता संभालते ही मोदी सरकार ने किसानों को दरकिनार किया और सारे सरकारी संसाधन पूंजीपतियों को दे दिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने किसानों पर 3 वार किए।
पहला वार: 12 जून 2014 को मोदी सरकार ने सारे राज्यों को पत्र लिखकर फरमान जारी कर दिया कि समर्थन मूल्य के ऊपर अगर किसी भी राज्य ने किसानों को बोनस दिया तो उस राज्य का अनाज समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदा जाएगा और किसान भाइयों को बोनस से वंचित कर दिया गया।

दूसरा वार: दिसंबर 2014 में मोदी सरकार किसानों की भूमि के उचित मुआवजे कानून 2013 को खत्म करने के लिए एक के बाद एक तीन अध्यादेश लाई, ताकि किसानों की जमीन आसानी से छीनकर पूंजीपतियों को सौंपी जा सके।

तीसरा वार: फरवरी 2015 में मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में शपथ पत्र देकर साफ इनकार कर दिया कि अगर किसानों को समर्थन मूल्य लागत का 50% से ऊपर दिया गया, तो बाजार खराब हो जाएगा यानी फिर पूंजीपतियों के पाले में खड़े हो गए।

अपडेट्स

  • चिपको आंदोलन के नेता सुंदरलाल बहुगुणा ने किसान आंदोलन को समर्थन दिया है। बहुगुणा ने वीडियो रिलीज कर कहा- मैं अन्नदाताओं की मांगों का समर्थन करता हूं। देश की खाद्य सुरक्षा देने में किसान देश के असली हीरो हैं।
  • किसानों का कहना है कि वे कृषि कानूनों के खिलाफ लंबी लड़ाई की तैयारी कर रहे हैं। ठंड को देखते हुए ज्यादा टेंट लगा रहे हैं।
  • उद्योग संगठन FICCI ने कहा है कि किसान आंदोलन के चलते नॉर्दर्न रीजन की इकोनॉमी को हर दिन 3000 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।

मोदी की अपील- कृषि मंत्री की चिट्ठी जरूर पढ़ें
कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने गुरुवार को किसानों के नाम चिट्ठी लिखी, जिसमें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) समेत दूसरी चिंताओं पर भरोसा दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों के साथ-साथ पूरे देश से तोमर की चिट्ठी पढ़ने की अपील करते हुए इसे सोशल मीडिया पर शेयर किया।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- सरकार कानून होल्ड करने का रास्ता सोचे
किसानों को सड़कों से हटाने की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई। कोर्ट ने कहा कि किसानों को विरोध करने का हक है, लेकिन किसी की संपत्ति या किसी की जान को कोई खतरा नहीं होना चाहिए। साथ ही सलाह दी कि विरोध के तरीके में बदलाव करें, किसी शहर को जाम नहीं किया जा सकता। अदालत ने सरकार से भी पूछा- इस मामले की सुनवाई पूरी होने तक क्या आप कृषि कानूनों को रोक सकते हैं?

अभी नए कृषि कानून लागू करने के नियम ही नहीं बने, जैसे CAA के नहीं बने हैं
लोकसभा के पूर्व महासचिव पीडीटी आचारी ने कृषि कानूनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के कमेंट से जुड़े सवालों के जवाब बताए।

क्या किसी कानून पर अमल रोका जा सकता है?
बिल पर अमल का अधिकार कार्यपालिका का है। अमल के लिए नियम और दिशा-निर्देश होते हैं। कृषि कानूनों को लागू करने के नियम अभी बने ही नहीं हैं। यानी वे लागू ही नहीं हैं, तो फिर उन्हें रोक कैसे सकते हैं।

क्या पहले कभी ऐसा हुआ है कि बिल संसद में पारित हो गया और उस पर अमल नहीं हुआ?
इसका सबसे बड़ा उदाहरण नागरिकता कानून संशोधन एक्ट (CAA) है। यह पिछले साल संसद से पारित हुआ था। लेकिन, अभी तक इस कानून को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश नहीं बनाए गए हैं। इसलिए यह कानून अभी तक कोल्ड स्टोरेज में है।

अगर सरकार जल्दी ही नियम बना लेती है तो?
सुप्रीम कोर्ट चाहे तो केस चलने तक अमल के नियम नहीं बनाने का आदेश भी दे सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का इरादा क्या लगता है?
सरकार और किसानों में बातचीत में प्रगति नहीं हो पा रही। कोर्ट संभावना तलाश रहा है कि क्या बातचीत जारी रहने तक कानूनों को बेअसर रखा जा सकता है। मुझे लगता है कि कोर्ट का यह कदम समाधान की दिशा में है।

क्या कोई सरकार कानूनों को निष्प्रभावी करने के लिए अध्यादेश भी ला सकती है?
नहीं। किसी भी कानून को निष्प्रभावी या रद्द करने के लिए संसद का सत्र एकमात्र विकल्प है। वैसे कानून पर अमल रोकने के लिए नियम नहीं बनाना ही ज्यादा कारगर तरीका है।


भारत विकास परिषद करेगा राष्ट्रीय बालिका सप्ताह का आयोजन,राष्ट्र के उत्थान में बेटी बढ़ाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम होंगे आयोजित,बेटी है तो सृष्टि है पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन शीघ्र

भारत विकास परिषद करेगा राष्ट्रीय बालिका सप्ताह का आयोजन,राष्ट्र के उत्थान में बेटी बढ़ाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम होंगे आयोजित,बेटी है तो सृष्टि है पर भाषण प्रतियोगिता का आयोजन शीघ्र

राष्ट्रीय बालिका दिवस प्रत्येक वर्ष 24 जनवरी को मनाया जाता है।  इसे इस वर्ष भारत विकास परिषद द्वारा पूरे राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय बालिका सप्ताह के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है। राष्ट्रीय बालिका सप्ताह के अंतर्गत पूरे सप्ताह भारत विकास परिषद बालिकाओं से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करेगा। उक्त जानकारी देते हुए भारत विकास परिषद के अध्यक्ष रामप्रवेश पांडेय ने बताया कि 16 जनवरी से 21 जनवरी तक बच्चियों के स्वास्थ्य जांच से संबंधित एवं जागरूकता के कार्यक्रम होंगे।

17 जनवरी को लालमन दिगथू में 10 से 18 वर्ष के बच्चियों का हीमोग्लोबिन टेस्ट कराया जाएगा। वही 18 जनवरी को कोडरमा प्रखंड अंतर्गत नगर खारा में मैं बच्चियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए लोहे की कड़ाही एवं चना एवं गुड का वितरण  किया जाएगा। 19 जनवरी को झुमरीतिलैया स्थित सिडी बालिका उच्च विद्यालय में राष्ट्र के उत्थान में बेटी बढ़ाओ बेटी पढ़ाओ पर व्याख्यानमाला का आयोजन होगा। 20 जनवरी को स्लम एरिया के जरूरतमंद बच्चियों के बीच गरम कपड़ों का वितरण किया जाएगा। इसके अलावा 21 जनवरी को कार्यक्रम का समापन समारोह झुमरीतिलैया स्थित सीधी बालिका उच्च विद्या

लय में किया जाएगा। इस दौरान बच्चियों के बीच भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। जिसमें बच्चों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। साथ ही भारत को जानो प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मौके पर पुरस्कृत किया जाएगा। मौके पर कार्यक्रम की परियोजना निदेशक जयंती सेठ, भारत विकास परिषद के क्षेत्रीय सचिव रामरतन महर्षि, भारत विकास परिषद के उपाध्यक्ष अरुण कुमार ओझा, संस्कार प्रकल्प के छोटे लाल पांडेय, संगठन सचिव अरुण सेठ आदि उपस्थित थे।


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