बिहार के पटना उच्च न्यायालय ने क्तिगत स्कूलों को लेकर डीएम के आदेश में हस्तक्षेप करने से किया मना 

 बिहार के पटना उच्च न्यायालय ने क्तिगत स्कूलों को लेकर डीएम के आदेश में हस्तक्षेप करने से किया मना 

 बिहार के पटना उच्च न्यायालय ने लॉकडाउन में व्यक्तिगत स्कूलों के लिए फीस लेने के विषय में पटना डीएम के आदेश में हस्तक्षेप करने से मना कर दिया है। संत पाल इंटरनेशनल स्कूल की याचिका पर चीफ जस्टिस संजय करोल की खंडपीठ ने सुनवाई की।

सुनवाई में न्यायालय ने बोला कि प्राइवेट विद्यालयों को अगर ज्यादा कठिनाई है, तो वो डीएम एवं आपदा प्रबंधन के प्रधान सचिव के समक्ष अपना पक्ष रख सकते हैं। वो विचार कर 4 हफ्ते में उचित फैसला लेंगे ।  

दरअसल, पटना के डीएम ने कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन में बंद रखे गए प्राइवेट विद्यालयों पर 10 अप्रैल को आदेश जारी किया था।   इसमें  विद्यालयों के प्रबंधकों से बोला गया था कि वो अभिभावकों से 3 महीने का नहीं, एक महीने का ट्यूशन फीस लें।   इनसे अन्य प्रकार के भी चार्ज नहीं लें।  

साथ ही डीएम ने ये भी बोला था कि बच्चों को औनलाइन पढ़ाने के लिए व्हाट्सएप, ईमेल आदि की सुविधाएं दें। उनके स्कूल में जो कर्मचारी एवं अन्य स्टाफ हैं, उन्हें वेतन देने में कटौती भी नहीं करें। सेंट पॉल इंटरनेशनल स्कूल ने याचिका दायर कर जिला प्रशासन के आदेश को रद्द कराने की मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने उन्हें वैसे कोई राहत नहीं दी।

याचिकाकर्ता के एडवोकेट गौतम केजरीवाल ने प्रदेश सरकार के उन आदेशों को रद्द कराने की मांग की। उन्होंने इन सरकारी आदेशों को भेदभावपूर्ण बताते हुए संविधान के अनुच्छेद 14 को तोड़ने वाले बताया। उन्होंने न्यायालय को बताया कि डीएम के आदेश से प्राइवेट स्कूलों की स्वतंत्रता और स्वायत्तता समाप्त हो जाएगी ।