गलवान का एक साल, चाइना से निपटने के लिए ऐसी है हिंदुस्तान की तैयारी

गलवान का एक साल, चाइना से निपटने के लिए ऐसी है हिंदुस्तान की तैयारी

नई दिल्ली गलवान घाटी (Galwan Valley) पर हिंदुस्तान और चाइना (India-China) की सेना के बीच हुई झड़प को एक वर्ष होने को आया है महीनों बाद भी असली नियंत्रण रेखा (LAC) पर सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है दोनों ओर से सैन्य ताकत में वृद्धि जारी है समाचार आती रही है कि पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) में चाइना लगातार क्षमता बढ़ा रहा है हालांकि, मौके पर किसी भी दशा का सामना करने के लिए भारतीय पक्ष भी तैयार है सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने भी बोला था कि हिंदुस्तान हर स्थिति के लिए तैयार है अब तक दोनों राष्ट्रों के बीच 11 दौर की वार्ता हो चुकी है

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, भारतीय सुरक्षा बलों ने पूरे लद्दाख सेक्टर में स्वयं को मजबूत कर लिया है इस दौरान बलों ने इंफ्रास्ट्रक्चर स्तर से लेकर सम्पर्क बढ़ाने और पड़ोसी देश की सेना का सामना करने के लिए अलावा जवानों को तैनात किया है एजेंसी ने एक ऑफिसर के हवाले से बताया, 'लद्दाख सेक्टर में आकस्मित चीनी आक्रमण से दंग बलों ने स्वयं को बहुत ज्यादा मजबूत कर लिया है ' उन्होंने बोला कि इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से देखें, तो सबसे बड़ी उपलब्धि सभी अग्रिम मोर्चों के साथ सड़क सम्पर्क बेहतर होना है

अधिकारियों ने जानकारी दी है कि पूरी LAC के साथ-साथ लद्दाख में चाइना का सामना करने के लिए अलावा हड़ताल कॉर्प्स तैनात किए गए हैं उन्होंने कहा, 'मथुरा की वन हड़ताल कॉर्प्स को लद्दाक में उत्तरी सीमा पर भेजा गया है 17 माउंटेन हड़ताल कॉर्प्स को अलावा 10 हजार जवान उपलब्ध कराए गए हैं और उन्हें पूरे उत्तर पूर्वी राज्यों का जिम्मा दिया गया है

एजेंसी के अनुसार, भारतीय वायुसेना ने भी अपने स्तर पर कार्य प्रारम्भ कर दिया है राफेल के साथ-साथ, मिग-29 और सू-30 जहाजों की टुकड़ी उत्तरी सीमाओं के इलाके में सक्रिय रहेगी वहीं, इस महीने के अंत तक दूसरा स्क्वाड्रन भी ऑपरेशन के लिए तैयार होगा ऑफिसरों ने बोला है कि सशस्त्र बलों की तैयारी उस स्तर पर हैं कि चाइना या दूसरी मुश्किलें किसी भी तरह से दंग नहीं कर सकती

मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि सेना ने LAC पर पहली बार के-9 तोपें तैनात की हैं खास बात है की इन तोपों में पहिए लगे होते हैं, जिनकी वजह से इनकी आवाजाही में किसी अन्य गाड़ी का आवश्यकता नहीं होती सेना ने M-777 आर्टिलरी गन भी तैनात की हैं इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान ने हवाई सुरक्षा की भी पुख्ता व्यवस्था की है

कहा जा रहा है कि LAC पर आकाश मिसाइल, इजरायल का स्पाइडर और रूस का पेचोरा तैनात है इनके साथ सीमा पर रडार बस्टिंग, SPICE 2000, एंटी टैंक गाइडेड मिसालइल आर-73, 400 मीडियम रेंज एयर टू एयर गाइडेड जैसी मिसाइल भी तैनात की हैं यहां सेना के पास 15-18 महीनों का रसद भी उपस्थित है


शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

शिव मार्केट में पानी के साथ आया 15 फीट का मगरमच्छ, जान जोखिम में डाल युवा खिंचा रहे फोटो

मध्य प्रदेश में कई ऐसी नदियां हैं, जहां भारी बारिश के चलते अक्सर जल स्तर बढ़ जाता है। ऐसे में इन नदियों में मगरमच्छों की भरमार भी मिलती है। कभी-कभी तो पानी बहकर शहरों एवं गावों तक पहुंच जाता है। हैरान करने वाली बात यह है कि बुधवार को शिवपुरी की मीट मार्केट में 15 फीट का मगरमच्छ दिखाई दिया। ऐसे में जब युवाओं ने इसे देखा तो उन्होंने वन विभाग को सूचना देने के बजाय खुद की रस्सी से बांधकर उसके साथ सेल्फी लेने लगे।

पिछले सात दिनों में शिवपुरी में अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं मगरमच्छ

शिवपुरी में पिछले सात दिन में तीन मगरमच्छ अलग-अलग इलाकों में निकल चुके हैं। खास बात यह है कि यहां पर युवा इन मगरमच्छों को खुद पकड़ रहे हैं। स्थानीय निवासी द्वारा इसकी वन विभाग मगरमच्छ की सूचना भी नदीं दे रहे हैं। इतना ही नहीं युवा इन मगरमच्छों के साथ फो खिंचवा रहे हैं। शिवपुरी में जब लोगों ने 15 फीट के मगरमच्छ को देखा तो जोखिम उठाते हुए खुद ही रस्सियों से बांध दिया। इसके बाद उसे कंधों पर उठाकर मस्ती करने लगे।

सेल्फी और वीडियो बनाने में जुटे युवा

इतना ही नहीं लोगों ने उसके साथ सेल्फी, फोटो और वी़डियो बनाई। ऐसे में इन युवाओं की लापरवाही उनको भारी पड़ सकती है! क्योंकि मगरमच्छ कभी-भी युवाओं पर हमला कर सकता है।

खतरनाक प्राणी है मगरमच्छ

बता दें कि मगरमच्छ पानी और धरती पर पाया जाने वाला खतरनाक जीव है। खुरदुरी खाल, उबड़-खाबड़ शरीर और मजबूत जबड़े वाला ये प्राणी ऐसा है कि देखने पर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। ये धरती के प्राचीनतम जीवों में से एक हैं और स्तनधारी और सरीसृप दोनों ही श्रेणियों में शामिल है।


भयानक और भयावह इस जीव की खाल बुलेटप्रूफ मानी जाती है, जिसे बंदूक की गोली द्वारा भी भेदा नहीं जा सकने का दावा किया जाता है, लेकिन इसके बाद भी मानव द्वारा किये जाने वाले शिकार के कारण इसकी कई प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर है। इसकी खाल विश्व की सर्वश्रेष्ठ खालों में गिनी जाती है और फैशन इंडस्ट्रीज में बहुत लोकप्रिय है।