कोविड-19 महामारी के चलते लॉकडाउन ने सामाजिक व आर्थिक रूप से इतने लोगो को किया प्रभावित

 कोविड-19 महामारी के चलते  लॉकडाउन ने सामाजिक व आर्थिक रूप से इतने लोगो को किया प्रभावित

 कोविड-19 महामारी व इसके मद्देनजर लगाये गए लॉकडाउन ने सामाजिक व आर्थिक रूप से लगभग हर वर्ग को प्रभावित किया है। हिंदुस्तान में इस संकट की स्थिति को देखते हुए महत्वपूर्ण है

कि मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ​ध्यान दिया जाए, खासकर युवाओं के लिए यह बेहद जरूरी है। देश में किशोरों की संख्या कुल आबादी का करीब पांचवां भाग है। किशोरों को इस समय शैक्षणिक अनिश्चितता, कहीं आने-जाने पर प्रतिबंध, सामाजीकरण या स्वच्छंदता, के साथ घरेलू कार्य को लेकर खिटपिट व परिवारों के सदस्यों के साथ अंतरविरोध ने बहुत प्रभावित किया है। वहीं, कुछ किशोरों में रोजगार को लेकर अनिश्चितता ने चिंता व तनाव का माहौल पैदा किया है।

मौजूदा संकट की स्थिति में युवाओं के सामने इस चुनौती को लेकर समझ बेहतर करने के लिए पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंंडिया (PFI)  ने 2 रैपिड एसेसमेंट सर्वे किया है। इसमें पता करने की प्रयास की गई कि युवाओं में कोविड-19 को लेकर किस तरह की जानकारी है व इससे मानसिक रूप से उनपर क्या असर पड़ा है। इस सर्वे के जरिए प्राप्त आंकड़ों से कई तरह की महत्वपूर्ण जानकारियां निकलकर सामने आई हैं। तीन राज्यों में यह सर्वे किया गया। इसमें यह भी पता लगाने की प्रयास की गई कि बच्चों, किशोरों व स्त्रियों तक हेल्थ व न्यूट्रिशन की कितनी उपलब्धता है।

 इस सर्वे के नतीजों से कौन सी प्रमुख बातें सामने आईं?
1. यूपी के 68 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने बोला कि लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के प्रयोग बढ़ गया है। इसमें से 92 प्रतिशत से अधिक लोगों ने माना कि सोशल मीडिया के प्रयोग से अवसाद बढ़ता है।

2. हर 10 में से 6 स्टूडेंट्स का मानना है कि कोविड-19 की वजह से पैदा हुई स्थिति के बाद उन्हें रोजगार को लेकर चिंता है।

3. यूपी में हर 4 में से एक आदमी ने माना कि लॉकडाउन के दौरान अवसाद महसूस हुआ। लॉकडाउन के दौरान अधिकांश लोगों ने माना कि घरेलू स्तर पर उनका बोझ बढ़ा है। ऐसे लोग करीब 42 प्रतिशत रहे।

PFI की एग्जीक्युटिव निदेशक पूनम मुटरेजा ने कहा, 'देश की आबादी में करीब पांचवां भाग युवाओं का है। इसलिए महत्वपूर्ण है कि कोविड-19 व लॉकडाउन के मद्देनजर उनकी मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दिया जाए। कोविड-19 प्रभाव लंबी अवधि में न केवल मानसिक स्वास्थ्य पर होगा, बल्कि सामाजिक ज़िंदगी व एजुकेशन पर भी इसका असर पड़ेगा। इससे हिंसा व मौजूदा असमानता बढ़ेगी। '

स्टडी से पता चला कि देश में युवाओं को कोविड-19 के बारे में पर्याप्त जानकारी है। वो इस संक्रमण के लक्षण, सुरक्षा तरीका आदि के बारे में जानकारी रखते हैं। लेकिन, इसके बाद भी उन्हें कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जिसका प्रभाव उनके मानसिक स्थिति पर पड़ रहा है।