इंदौर उच्च न्यायालय ने एक दो वर्ष के मासूम के लिए बदला अपना निर्णय

इंदौर उच्च न्यायालय ने एक दो वर्ष के मासूम के लिए बदला अपना निर्णय

इंदौर उच्च न्यायालय आज सुनवाई के लिए खुल रहा है। कोरोना महामारी के चलते न्यायालय को बंद रखा गया था। केवल वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए ही कुछ मामलों की सुनवाई हो रही थी। आज एक दो वर्ष के मासूम के लिए लगभग ढाई महीने के बाद इंदौर उच्च न्यायालय खुलेगा व सुनवाई की जाएगी।

दरअसल ये सुनवाई 2 वर्ष के बच्चे के मुद्दे में होने जा रही है, जो माता-पिता के झगड़े के कारण अपने दादा-दादी के पास रह रहा है। बच्चे को उसकी मां से नहीं मिलने दिया जा रहा है जिसके बाद मां ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ता मां के वकील हितेश शर्मा ने बताया कि इस मुद्दे को बेहद संवेदनशील मानते हुए उच्च न्यायालय खोलकर सुनवाई करने का फैसला लिया गया है।

एडवोकेट का बोलना है कि बच्चे के माता-पिता विवाह के बाद अमेरिका चले गए थे। जंहा दोनों के झगड़े होने पर मां अकेली इंडिया आ गयी व इंदौर में अपने मायके रहने लगी। बच्चे के बिना इंडिया लौटी मां उससे मिलने के लिए तड़पती रही। दो-तीन महीने बाद पिता अमेरिका से आया व मासूम को ग्वालियर में अपने माता-पिता के पास छोड़कर अमेरिका चला गया।

हितेश शर्मा ने बताया कि महिला ने बच्चे से मिलने की प्रयास की पर उसे मिलने नहीं दिया गया। महिला ने पुलिस की मदद भी ली लेकिन उसे बच्चे से मिलने की अनुमति नहीं दी गई। जिसके बाद महिला ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की।  

एडवोकेट हितेश शर्मा बताते है कि मां अपने बच्चे को पांच वर्ष तक अपने पास रख सकती है। लेकिन इस महिला को उसके अधिकार से वंचित रखा गया है।