हिंदुस्तान के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान (DRDO) ने कोरोना का उपचार कर रहे डॉक्टरों के लिए किया यह बड़ा काम

 हिंदुस्तान के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान (DRDO) ने कोरोना का उपचार कर रहे डॉक्टरों के लिए किया यह बड़ा काम

 हिंदुस्तान के प्रमुख रक्षा अनुसंधान संस्थान (DRDO) ने कोरोना वायरस (Coronavirus) से संक्रमित लोगों का उपचार कर रहे डॉक्टरों (doctors) सहित चिकित्सा पेशेवरों (medical professionals) की सुरक्षा के लिए ‘‘बायो सूट’’ विकसित किया है।  

अधिकारियों ने बताया कि रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) की विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों ने मिलकर ‘‘बायो सूट’’ विकसित किया है जो चिकित्सा पेशेवरों के लिए पर्सनल सुरक्षा उपकरण (पीपीई) की तरह कार्य करेगा।  

उन्होंने बताया कि सारे देश में पीपीई की बढ़ती मांग को देखते हुए रोजाना कम से कम 15,000 बायो सूट का उत्पादन करने के लिए कदम उठाया जाएगा। हिंदुस्तान कोरोना वायरस संक्रमितों का उपचार करने वाले डॉक्टरों व पैरामेडिक कर्मियों के लिए पीपीई की कमी का सामना कर रहा है।  

सरकार वैश्विक मार्केट से पीपीई, वेंटिलेटर व एन-95 मास्क खरीदने पर विचार कर रही है। रक्षा मंत्रालय ने बयान में बताया, ‘‘डीआरडीओ की विभिन्न प्रयोगशालाओं में कार्यरत वैज्ञानिकों ने वस्त्र, परत व नैनोटेक्नोलॉजी में अपनी विशेषज्ञता का प्रयोग कर पीपीई विकसित किया है जिसमें विशेष परत के साथ खास तरह के रेशों का प्रयोग किया गया है। ’’

मंत्रालय ने बताया, ‘‘ सूट को कपड़ा उद्योग की मदद से विभिन्न कसौटियों पर परखने के बाद तैयार किया गया है व इससे साथ ही कृत्रिम खून से रक्षा का परीक्षण भी किया गया है। ’’ 

बयान में बोला गया कि डीआरडीओ बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन प्रारम्भ करने की प्रयास कर रहा है ताकि कोरोना वायरस के संक्रमितों का उपचार कर रहे डॉक्टरों व पैरामेडिक कर्मियों की पीपीई के लिए भारी मांग के अनुपात में इसकी आपूर्ति की जा सके। मंत्रालय ने बताया कि मौजूदा समय में एक दिन में सात हजार बायो सूट बनाने की क्षमता है।

अधिकारी ने बताया कि डीआरडीओ व अन्य उद्योगों की साझेदारी में बायो सूट बनाने का कार्य ‘‘ सीम सीलिंग टेप’’ (जो आद्र कण को अंदर आने से रोकने के लिए लगाया जाता है) की अनुपलब्धता की वजह से बाधित हुआ। इसके बाद डीआरडीओ ने पनडुब्बी को जलरोधी बनाने में प्रयोग द्रव के आधार पर तैयार द्रव का प्रयोग सीम सीलिंग टेप की स्थान बायो सूट में किया।  

उन्होंने बताया कि डीआरडीओ विभिन्न सुरक्षा प्रतिष्ठानों व संगठनों को सारे देश में डेढ़ लाख सेनेटाइजर की आपूर्ति कर रहा है। ऑफिसर ने बताया कि पांच परत वाले मास्क एन-99 नैनो टेक्नोलॉजी के आधार बनाये गये हैं व युद्धस्तर पर इसका उत्पादन किया जा रहा है। 10 हजार मास्क पहले ही बनाये जा चुके हैं व जल्द ही प्रतिदिन 20 हजार ऐसे मास्क का उत्पादन किया जाएगा।  

उन्होंने बताया कि डीआरडीओ लैब ने दिल्ली पुलिस को 40 हजार मास्क की आपूर्ति की है। ऑफिसर ने बताया कि डीआरडीओ वेंटिलेटर में छोटी परिवर्तन कर रहा है ताकि एक ही वेंटिलेटर से एक बार में चार मरीजों के ज़िंदगी की रक्षा की जा सके।