सरकार ने उपयोगकर्ताओं की जानकारियों (डेटा) के प्रसंस्करण के लिये जारी किए यह दिशानिर्देश

सरकार ने उपयोगकर्ताओं की जानकारियों (डेटा) के प्रसंस्करण के लिये जारी किए यह दिशानिर्देश

सरकार ने के उपयोगकर्ताओं की जानकारियों (डेटा) के प्रसंस्करण के लिये सोमवार को दिशानिर्देश जारी किए। इसमें कुछ नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों को जेल की सजा का भी प्रावधान किया गया है।

नए नियमों के तहत 180 दिनों से अधिक डेटा के भंडारण पर रोक लगायी गई है। इसके साथ ही उपयोगकर्ताओं के लिये यह प्रावधान किया गया है कि वे से संबंधित जानकारियों को मिटाने का अनुरोध कर सकते हैं। इस तरह के अनुरोध पर 30 दिन के भीतर अमल करना होगा।

नए प्रावधान केवल जनसांख्यिकीय, संपर्क, स्व-मूल्यांकन व  से संक्रमित व्यक्तियों या उन लोगों के जगह डेटा का संग्रह करने की अनुमति देते हैं जो संक्रमित आदमी के सम्पर्क में आते हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स व सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्रालय के सचिव अजय प्रकाश साहनी ने संवाददाताओं से कहा, 'डेटा की गोपनीयता पर बहुत कार्य किया गया है। यह सुनिश्चित करने के लिये एक अच्छी गोपनीयता नीति बनायी गई है कि लोगों के पर्सनल डेटा का दुरुपयोग न हो। ’

अभी तक 9.8 करोड़ लोगों ने डाउनलोड किया है। यदि इस ऐप के उपयोगकर्ता किसी संक्रमित आदमी के निकट सम्पर्क में आते हैं तो ऐप उपयोगकर्ताओं को सचेत करता है।

को लेकर रोक वाले इलाकों में को जरूरी कर दिया गया है।

दिशा-निर्देश में महामारी के प्रसार को नियंत्रित करने में शामिल विभिन्न एजेंसियों द्वारा डेटा को संभालने की प्रक्रिया तय की गई है।

डेटा को अनुसंधान उद्देश्यों के लिये विश्वविद्यालयों के साथ भी साझा किया जा सकता है। हालांकि इसके लिये ऐप का उपयोग करने वाले व्यक्तियों की पहचान कर सकने वाली जानकारियों को पहले हटाना होगा।

प्रावधानों में बोला गया है, 'इन निर्देशों के किसी भी उल्लंघन के लिये अधिनियम, 2005 की धारा 51 से 60 के अनुसार दंड व अन्य कानूनी प्रावधान लागू हो सकते हैं। ’

अधिनियम के तहत जुर्माना लगाने से लेकर कारागार की सजा तक का प्रावधान है।

साहनी ने बोला कि सबसे जरूरी काम ऐप से विभिन्न विभागों में डेटा का प्रवाह है, जहां व्यक्तियों की गोपनीयता पर बहुत जोर दिया गया है।

उन्होंने कहा, 'ऐप के उपयोगकर्ताओं को डिवाइस आईडी दी जाती है जिसका उपयोग विभिन्न सूचनाओं व कार्यों को संसाधित करने के लिये किया जाता है। आदमी के सम्पर्क का उपयोग केवल उपयोगकर्ता को सचेत करने के लिए किया जाता है। ’

यह ऐप एंड्रॉइड, एप्पल के आईओएस व जियो फोन पर उपलब्ध है।

सरकार ने उन लोगों के लिये एक टोल फ्री नंबर 1921 भी जारी किया है, जिनके पास Smart Phone नहीं है।

साहनी ने कहा, ' के 13,000 से कम उपयोगकर्ताओं को संक्रमण में सकारात्मक पाया गया है, लेकिन इसकी मदद से लगभग 1.4 लाख ऐसे लोगों का पता लगाया गया व सतर्क किया गया है, जो संक्रमित आदमी के निकट सम्पर्क में आए हैं। ’

उन्होंने बोला कि गोपनीयता का एक जरूरी पहलू है।

नागरिकों के अधिकार का पक्ष रखने वाले कई समूहों ने आरोप लगाया है कि सरकार विशेष रूप से गोपनीयता के आस किसी भी कानून की अनुपस्थिति में बड़े पैमाने पर निगरानी के लिए का उपयोग कर रही है।

मंत्रालय के एक  ने कहा, 'प्रोटोकॉल कानूनी अंतर को पाटने व गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिये जारी किया गया है। ’

साहनी ने बोला कि एक गैर-संक्रमित आदमी का डेटा 30 दिन में हटा दिया जाता है। इसके अतिरिक्त जाँच कराने वाले लोगों का डेटा 45 दिन में व उपचार करवाने वाले लोगों का डेटा 60 दिन में हटा दिया जाता है।