स्कूल खोले जाने के पक्ष में महामारी विशेषज्ञ डॉ गगनदीप कांग, कहा...

स्कूल खोले जाने के पक्ष में महामारी विशेषज्ञ डॉ गगनदीप कांग, कहा...

कोरोना का कहर भले ही कम होता दिख रहा है, मगर विशेषज्ञों का मानना है कि डेल्टा वैरिएंट का कहर कोरोना से अधिक होगा। महामारी संबंधी तैयारी नवाचारों के गठबंधन बोर्ड की उपाध्यक्ष गगनदीप कांग ने गुरुवार को कहा कि महामारी की लहर अगर वैरिएंट पर निर्भर है तो उससे प्रभावित होने वालों की संख्या का अुमान ल गाना मुश्किल है। वायरस में कुछ मौसमी तत्व भी हो सकते हैं।

गगनदीप कांग ने कहा कि जब तक देश में कोरोना के मामले मिल रहे है, तब तक नए वैरिएंट के प्रसार की संभावना बहुत अधिक है। नए वैरिएंट के प्रसार के लिए हमें न केवल बीमारी बल्कि संचरण को भी रोकना होगा। गगनदीप कांग स्कूल खोलने के पक्ष में हैं, उन्होंने कहा कि स्कूलों को खोला जाना चाहिए मगर स्कूल के सभी कर्मचारियों और शिक्षकों का टीकाकरण भी किया जाना चाहिए। बच्चों को मास्क पहनने के लिए जागरूक करना चाहिए और कक्षाओं में सामाजिक दूरी भी बनाए रखी जानी चाहिए। शिफ्ट सिस्टम के बारे में सोचा जाना चाहिए। स्कूलों में बार-बार साफई की जानी चाहिए। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 135 देशों में डेल्टा वैरिएंट के मामले सामने आए है। अनुमान है कि, 20 करोड़ से अधिक लोग अगले हफ्ते तक डेल्टा वैरिएंट से संक्रमित हो जाएगे। विश्वभर में 26 जुलाई से 1 अगस्त तक 40 लाख डेल्टा संक्रमण के मामले सामने आए हैं। विश्वभर में कोरोना संक्रमण के कुल मामले 19.7 करोड़ के पर पहुंच गए हैं। चीन में इन दिनों डेल्टा वैरिएंट का प्रकोप बढ़ते जा रहा है। चीन के डेलटा की वजह से कोरोना के मामले 18 प्रांतों के 27 शहरों में देखने को मिल रहे हैं। बढ़ते मामलों को देखते हुए चीन की सरकार ने पाबंदियां लागू कर दी हैं।

भारत में पिछले 24 घंटों में कोरोना संक्रमण के 42,982 नए मामले सामने आए, तो वहीं 533 लोगों की मौत हो गई है। 41,726 लोगों ने कोरोना को मात दे दी है।


कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

कोवैक्सीन को WHO से आपातकालीन उपयोग के लिए जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद : स्वास्थ्य मंत्रालय

स्वास्थ्य मंत्रालय ने शुक्रवार को जानकारी दी कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) से हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक द्वारा विकसित कोरोना वैक्सीन कोवैक्सीन को आपातकालीन उपयोग (EUA) की मंजूरी जल्द ही मिलने  की उम्मीद है। स्वास्थ्य राज्य मंत्री डा भारती प्रवीण पवार ने समाचार एजेंसी एएनआइ को बताया कि उम्मीद है कि डब्लूएचओ जल्द ही कोवैक्सीन को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देगा। इससे पहले खबर सामने आी थी कि भारत के इस टीके को 5 अक्टूबर तक आपात उपयोग के लिए डब्लूएचओ से मंजूरी मिलने की संभावना है।

वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी भारत बायोटेक वैक्सीन की सुरक्षा और क्लीनिकल ट्रायल का ​​​​डेटा और जोखिम प्रबंधन योजनाओं और अन्य कार्यान्वयन विचारों पर एक प्रजेंनटेशन देगी। कंपनी ने हाल ही में कहा था कि उसने आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए कोवैक्सीन से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को सौंप दिया है और वैश्विक उससे प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है।


कोवैक्सीन तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में 77.8 प्रतिशत की प्रभावी पाया गया था। इसे हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट की ऑफ वायरोलाजी (NIV) के सहयोग से विकसित किया था। भारत बायोटेक ने कहा था कि आपात इस्तेमाल की मंजूरी के लिए ट्रायल से संबंधित सभी डेटा डब्ल्यूएचओ को समक्ष प्रस्तुत कर दिया गया है और संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा मांगे गए सभी स्पष्टीकरणों का जवाब भी दे दिया गया है।

कोवैक्सीन उन टीकों में शामिल है, जिसका इस्तेमाल भारत में कोरोना टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। इसके अलावा पुणे स्थित सीरम इंस्टीट्यूट द्वारा कोवीशील्ड नाम से विकसित आक्सफोर्ड/एस्ट्राजेनेका की कोरोना वैक्सीन और रुस की वैक्सीन स्पुतनिक v का इस्तेमाल टीकाकरण के लिए किया जा रहा है। डब्लूएचओ ने अब तक फाइजर/बायोएनटेक,आक्सफोर्ड/ एस्ट्राजेनेका, जानसन एंड जानसन, माडर्ना और सिनोफार्म द्वारा निर्मित कोविड -19 के टीकों को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दी है।