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गुजरात सालंगपुर में हनुमान मूर्ति के नीचे लगे भित्तिचित्रों को लेकर छिड़ा विवाद

सारंगपुर विवाद: गुजरात में सालंगपुर में हनुमान मूर्ति के नीचे लगे भित्तिचित्रों को लेकर टकराव छिड़ गया है. ये भित्तिचित्र हिंदू देवता हनुमानजी को सहजानंद स्वामी के सेवक के रूप में दर्शाते हैं. जिसके चलते हिंदू संत स्वामीनारायण संप्रदाय का बहिष्कार करेंगे.

बता दें कि बोटाद जिले के सालंगपुर स्वामीनारायण मंदिर परिसर में हनुमानजी के अपमान को लेकर सनत संत अब भी नाराज हैं. संतों का इल्जाम है कि स्वामीनारायण संप्रदाय को अल्पसंख्यक दर्जा देने के लिए टकराव खड़ा किया जा रहा है.

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि सालंगपुर मंदिर के भित्तिचित्रों के टकराव में सबसे बड़ी समाचार सामने आ रही थी. हिंदू संतों ने स्वामीनारायण संप्रदाय का बहिष्कार करने का निर्णय किया है. साणंद में साधु-संतों की बैठक में यह निर्णय लिया गया है.

इसके साथ ही हिंदू संप्रदाय की ओर से स्वामीनारायण संप्रदाय के संतों को मंच पर नहीं बैठने देने का निर्णय लिया गया है. इसके साथ ही बैठक में स्वामीनारायण संप्रदाय के विरुद्ध नयी रणनीति बनाने का भी निर्णय लिया गया है.

इसी बीच शनिवार को एक पुरुष ने मंदिर परिसर में घुसकर स्वामीनारायण संतों के भित्तिचित्रों पर काला रंग पोत दिया. साथ ही पेंटिंग्स को भी कुल्हाड़ी से क्षतिग्रस्त कर दिया. बोटाद जिले में स्थित सालंगपुर मंदिर परिसर में स्थापित विशाल हनुमान प्रतिमा पर स्वामीनारायण चाप तिलक और नीचे भित्ति चित्रों में हनुमानजी को स्वामीनारायण संतों के सामने हाथ जोड़े खड़े दर्शाया गया है.

इससे नाराज सनत के संतों ने स्वामीनारायण समाज के संतों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी देते हुए अहमदाबाद और जूनागढ़ में संत सम्मेलन आयोजित करने की तैयारी प्रारम्भ कर दी है. कांग्रेस ने इस घटना के विरुद्ध राजकोट में विरोध प्रदर्शन किया, जबकि बीजेपी सांसद रामभाई मोकरिया ने शनिवार को इसे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान और ईश्वर का अपमान करने का कोशिश बताया. उन्होंने कहा, एक पुजारी को पुजारी की तरह रहना चाहिए न कि ईश्वर बनने की प्रयास करनी चाहिए.

दत्तात्रेय आश्रम के महंत लहरगिरि बापू ने बोला है कि संप्रदायों को धर्म बनने का कोशिश नहीं करना चाहिए. मंदिर में हनुमानजी को गुलाम बनाने की प्रयास की गई है. ये तानाशाही फैलाने की प्रयास है. स्वामी नारायण संत भी इस मुद्दे में झुकने को तैयार नहीं हैं. सनत के संतों से न्यायालय में कानूनी तौर पर उत्तर देने को बोला गया है.

हाल के एक उदाहरण में, स्वामीनारायण संप्रदाय की एक पुस्तक में छपे चित्र में ईश्वर शिव को स्वामीनारायण संप्रदाय के उपासक नीलकंठवर्णी के सामने हाथ जोड़े खड़े दिखाया गया है. शैतानी संत और स्वामीनारायण संत के बीच टकराव थम नहीं रहा है, बल्कि प्रत्येक दिन नए टकराव सामने आ रहे हैं.

बोटाद के भीमनाथ महादेव मंदिर के संत आशुतोष गिरी बापू ने इस मुद्दे में स्वामीनारायण संतों को चेतावनी देते हुए बोला कि वे अपने धर्म के देवी-देवताओं के अपमान के विरुद्ध शास्त्र और हथियार दोनों से लड़ने के लिए तैयार हैं.

उधर, स्वामीनारायण संत नौतम स्वामी ने बोला कि हर किसी को उत्तर देने की आवश्यकता नहीं है. वे संतों को न्यायालय या किसी भी मुनासिब मंच पर उत्तर देने को तैयार हैं.

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