आधी आबादी वाले शहर अहमदाबाद में कोरोना वायरस के कारण मचा यह बड़ा कोहराम, जाने आंकड़ा

 आधी आबादी वाले शहर अहमदाबाद में कोरोना वायरस के कारण मचा यह बड़ा कोहराम, जाने आंकड़ा

कोरोना वायरस के सबसे ज्यादा मुद्दे मुंबई व दिल्ली जैसे महानगरों में सबसे ज्यादा है व यहां का हर दिन का मृत्यु कां आंकड़ा भी लगातार बढ़ रहा है लेकिन इन दोनों शहरों से आधी आबादी वाले शहर अहमदाबाद के आंकड़ें कुछ व ही कह रहे हैं. प्रति दस लाख की आबादी पर अहमदाबाद में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या तुलनात्मक ज्यादा है.


50 लाख से ज्यादा आबादी वाले नौ शहरों की तुलना में अहमदाबाद में हर 100 मामलों पर मृत्युदर दर भी ज्यादा है. अहमदाबाद में हर दस लाख लोगों पर 115 कोविड-19 मौतें हो रही है, यह आंकड़ा मुंबई के 80 मौतों से बहुत ज्यादा ज्यादा है. इसलिए अहमदाबाद कोविड-19 से होने वाली मौतों में पहला जगह रखता है. 
महानगरों की बात करें तो बंगलुरू में कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा कम है व ये शहर बहुत ज्यादा अच्छा कार्य कर रहा है. बंगलुरू में हर दस लाख की आबादी पर मरने वालों की संख्या केवल एक है, जो अबतक का सबसे कम आंकड़ा है. किसी स्थान की मृत्युदर कम होने का मतलब है कि वहां टेस्टिंग धड़ल्ले से हो रही है व कोरोना के मुद्दे ज्यादा है.

कोरोना के जितने ज्यादा मुद्दे होंगे उतने ही कम कोविड-19 की मृत्युदर होगी. अहमदाबाद की सीएफआर (केस फेटिलिटी रेट) 6.9 है इसलिए है क्योंकि वहां अनुचित तरीका से कोरोना की टेस्टिंग हो रही है व यही वजह है कि अहमदाबाद जैसे बड़े शहर में कोरोना से ज्यादा मौतें हो रही हैं.

महामारीविदों का बोलना है कि कोरोना जैसे वायरस में 90 प्रतिशत मरीजों के अच्छा होने की उम्मीद है लेकिन अच्छा होने वाले लोगों का भाग समय के साथ बढ़ सकता है. इसलिए कोरोना के विरूद्ध लड़ाई रिकवरी दर को देखना एक भ्रामक उपाय होने कि सम्भावना है. देश में अब तक कोरोना के मुद्दे 2,16,000 के पार पहुंच गए हैं व मरने वालों की संख्या छह हजार के पार.