घर में उपस्थित यूवी उपकरण लोगों की आंखों के साथ स्कीन पर भी खतरनाक 

घर में उपस्थित यूवी उपकरण लोगों की आंखों के साथ स्कीन पर भी खतरनाक 

घर में उपस्थित यूवी उपकरण लोगों की आंखों के साथ स्कीन पर भी बेहद खतरनाक प्रभाव करते हैं. इन उपकरणों को प्रयोग करने से कोरोना वायरस को नष्ट कर पाने की आसार भी बेहद कम है. हेनरी फोर्ड अस्पताल के शोधार्थी दल ने अपने अध्ययन में यह पता लगाया है, जिसका विवरण साइंस लाइव पत्रिका में प्रकाशित हुआ. 

वैज्ञानिकों का बोलना है कि यूवी किरण वाले घर में प्रयोग होने वाले उपकरण वायरस को नष्ट करने की क्षमता नहीं रखते. वायरस को नष्ट करने के लिए विशेष प्रकार की यूवी किरणों को निश्चित मात्रा में प्रयोग करने की आवश्यकता होती है, यह कार्य सिर्फ प्रशिक्षित आदमी ही विशेष मेडिकल उपकरणों से कर सकता है.  यूवी किरणें तीन प्रकार की होती हैं, जिनमें से मात्र यूवीसी किरणें ही वायरस को नष्ट करने में क्षमतावान हैं क्योंकि अन्य दो तरह की यूवी किरणें भूमि तक नहीं पहुंचतीं, उन्हें ओजोन की परत अवशोषित कर लेती है. 

घरेलू उपयोग वाला यूवी उपकरण कोरोना पर बेअसर  
हेनरी फोर्ड अस्पताल की फोटोमेडिसिन विशेषज्ञ इंदरमीत कोहली ने बताया कि यूवीसी किरणों वाले उपकरण ही वायरस को नष्ट कर सकते हैं. घरेलू उपयोग के जो यूवी उपकरण मार्केट में उपस्थित हैं, उनमें यूवीसी किरणें नहीं होती अथवा आवश्यक तरंग दैर्ध्य पर नहीं होतीं. असल में खास तरह के वायरसों को नष्ट करने के लिए विशेष तरंग दैर्ध्य की आवश्यकता होती है, जिसकी जानकारी मात्र प्रशिक्षित लोगों को होती है. शोधकर्ता दल ने पाया कि सार्स जैसे वायरसों को नष्ट करने के लिए यूवीसी किरणों वाले उपकरण में 254 तरंग दैर्ध्य (वेबलैंथ) होनी चाहिए. 

किरणों के इस स्तर पर एच1एन1 इन्फ्लूएंजा, मार्स व सार्स वायरस के नष्ट होने के नतीजे मिले. इसलिए सार्स-कोव-2 वायरस भी इस स्तर पर ही नष्ट होने कि सम्भावना है. यह कार्य प्रशिक्षित कर्मचारी ही कर सकते हैं.  

कॉन्टैक्ट लेस प्रयोग महत्वपूर्ण -
शोधकर्ताओं का बोलना है कि इस उपकरण का प्रयोग अस्तपालों और अन्य जगहों पर करने के दौरान रोबोट का प्रयोग किया जाना सबसे ठीक है. इसके अतिरिक्त कॉन्टैक्टलेस ढंग से उपकरण का प्रयोग हो. घर में ऐसे उपकरण प्रयोग नहीं होने चाहिए. 

घर में उपयोग से खतरा -
शोधकर्ता डाक्टर जैकब स्कॉट का बोलना है कि घर में ऐसे उपकरण का प्रयोग करके लोग निश्चिंत महसूस करते हैं कि वह स्थान वायरसमुक्त हो गई पर असल में ऐसा होने बहुत कठिन है. इस भ्रम से लोग उस चीज के प्रयोग को लेकर लापरवाह हो जाते हैं व वे संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं.