हिंदुस्तान में 21 दिनों का लॉकडाउन के दौरान हुआ इन बीमारियों के इलाज का खुलासा

हिंदुस्तान में 21 दिनों का लॉकडाउन के दौरान हुआ इन बीमारियों के इलाज का खुलासा

आज पूरी संसार कोरोना वायरस के खतरे से एकजुट होकर लड़ रही है. इस महामारी को इसलिए भी खतरनाक माना जा रहा है क्योंकि अभी तक इसे समाप्त करने के लिए कोई वैक्सीन नहीं मिली है. 

ऐसे में संक्रमण को रोकने के लिए हिंदुस्तान में 21 दिनों का लॉकडाउन है व इसके अतिरिक्त साफ-सफाई पर खासतौर पर ध्यान दिया जा रहा है. संसार में इससे पहले भी कई बीमारियां महामारी के रूप में फैल चुकी हैं. जिसे सारे दुनिया ने एकजुट होकर इन बीमारियों को हराया है. ऐसे में इतिहास को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि हम जल्दी ही कोरोना वायरस को भी जड़ से समाप्त कर देंगे. आइए, डालते हैं जानलेवा बीमारियों पर एक नजर- 


मलेरिया 
जैसा कि हम जानते हैं कि मलेरिया मच्छर से फैलने वाली बीमारी है. वैसे तो अभी भी संसार भर में यह बीमारी फैलती है. लेकिन इसके खतरे को बहुत ज्यादा हद तक कम कर दिया गया है. अब इससे बहुत कम लोगों की मृत्यु होती है. 21वीं सदी में मलेरिया को काबू किया जा सका है. एक समय था जब पूरी संसार में करीब 53 प्रतिशत लोगों को इसके संक्रमण का खतरा रहता था.

एलफंटाएसिस
इस बीमारी में धागे जैसा कृमि पीड़ित के लसिका तंत्र (Lymphatic system)  में अपनी स्थान बना लेता है व लसिका के शरीर के अंदर परिवहन को बाधित कर देता है. इससे शरीर के अंग या गुप्तांग बुरी तरह फूल जाते हैं. पीड़ित आदमी से यह बीमारी दूसरों में मच्छर के काटने से फैलती है. अब तक 16 राष्ट्रों में इसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. सात व इसे समाप्त करने की कगार पर हैं.

रिंडरपेस्ट
रिंडरपेस्ट जानवरों में होने वाला प्लेग था. साल 1890 में यह बीमारी अफ्रीका में फैली थी. इससे करीब 80 से 90 प्रतिशत मवेशियों की मृत्यु हो गई थी. मवेशियों पर आश्रित लोगों को भूखे मरने की नौबत आ गई थी. 1960 में ब्रिटेन के वैज्ञानिक वॉल्टर प्लॉराइट ने इसका टीका खोजा. यूरोप, एशिया व अफ्रीका में मवेशियों में बड़े पैमाने पर टीका लगाया गया व 2011 में इस बीमारी को भी जड़ से समाप्त कर दिया गया.

टिटनेस
संसार भर में टिटनेस बैक्टीरिया से फैलता है. इसका बैक्टीरिया मिट्टी में रहता है. बैक्टीरिया खुले घाव के जरिए  इंसान के शरीर में प्रवेश करता है व वहां एक जहरीला केमिकल छोड़ता है. इससे इंसान को लकवा मार देता है व मांसपेशियों में भयावह खिंचाव होता है. बैक्टीरिया में प्रतिरोधक क्षमता पाई जाती है, इसलिए इसे जड़ से समाप्त करना संभव नहीं है. लेकिन बड़े पैमाने पर टीकाकरण से इसे बहुत ज्यादा हद तक काबू कर लिया गया है. साल 1990 में संसार भर में 3 लाख से ज्यादा लोग टिटनेस से मरे थे जबकि 2017 में सिर्फ 38 हजार के करीब यानी करीब 88 प्रतिशत गिरावट आई है.

खसरा
खसरा खांसने व छींकने से फैलने वाली बीमारी है. इसके लक्षण खांसी, नाक बहना, आंखों में सूजन, गले में दर्द, बुखार व स्कीन पर लाल चकत्ते. डॉक्टर जॉन एफ एंडर्स ने इसका टीका विकसित किया. 2000 से 2018 के बीच खसरा से मरने वालों की संख्या में बहुत ज्यादा गिरावट आई है. हिंदुस्तान समेत संसार भर में अब खसरा के बहुत ही कम मुद्दे सामने आते हैं.

पोलियो 
पोलियो का वायरस के संक्रमण से लकवा मार देता है. कभी-कभी पैरालिसिस यानी लकवा कुछ दिनों में समाप्त हो जाता है लेकिन कई बार यह फेफड़े को भी संक्रमित कर देता है जिससे मरीज की मृत्यु हो जाती है. साल 1953 में जोनास साक ने इस बीमारी का टीका खोजने की घोषणा की लेकिन पेटेंट नहीं कराया. अब अफगानिस्तान, पाक व नाइजीरिया को छोड़कर संसार के लगभग सभी देश पोलियो मुक्त हो गए हैं.