Shani Dosh: शनि गुनाह से पाना है छुटकारा? नवरात्रि की सप्तमी पर करें कालरात्रि की पूजा, जानें विधि-मुहूर्त

Shani Dosh: शनि गुनाह से पाना है छुटकारा? नवरात्रि की सप्तमी पर करें कालरात्रि की पूजा, जानें विधि-मुहूर्त

Navratri 2021 Maa Kalaratri Puja: शारदीय नवरात्रि व्रत (Shardiya Navratri 2021) का पर्व हर वर्ष अश्विन मास (Ashwin Month) के कृष्ण पक्ष (Krishna Paksha) की प्रतिपदा तिथि से प्रारंभ होता है नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के 9 भिन्न-भिन्न स्वरूपों की पूजा करते हैं इसी क्रम में आज नवरात्रि का सातवां दिन है इस दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा करते हैं मां कालरात्रि को यंत्र, मंत्र और तंत्र की देवी बोला जाता है शास्त्रों के अनुसार, मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध करने के लिए अपने तेज से कालरात्रि को उत्पन्न किया था

ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं के मुताबिक देवी कालरात्रि शनिदेव को नियंत्रित करती हैं नवरात्रि में इनकी विधि-विधान से पूजा अर्चना करने पर शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या के असर से मुक्ति मिलती है कालरात्रि को काल का नाश करने वाली देवी माना जाता है इसलिए मां दुर्गा के इस स्वरूप को कालराति बोला गया है ये भक्तों के सभी दुःख और संताप दूर करती हैं इनकी पूजा से प्राणी अकाल मौत के डर से मुक्त हो जाता है

कालरात्रि पूजा मुहूर्त

    • रवि योग- सुबह 06 बजकर 20 मिनट से 11 बजकर 27 मिनट तक
    • अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 11 बजकर 44 मिनट से 12 बजकर 30 मिनट तक
    • विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 03 मिनट से 02 बजकर 49 मिनट तक
    • गोधूलि बेला- शाम 05 बजकर 43 मिनट से 06 बजकर 07 मिनट तक

देवी कालरात्रि पूजा विधि

सुबह उठकर स्नानादि से निवृत्त हो उसके बाद पूजा स्थल की साफ-सफाई करके मां के समक्ष पूजन का संकल्प लें मां कालरात्रि को अक्षत, धूप, गंध, पुष्प और गुड़ का नैवेद्य चढ़ाए मां को उनका प्रिय पुष्प रातरानी और प्रिय भोग गुड़ जरूर अर्पित करें अब मां की पूजा कथा और मंत्रों का जाप करें इसके बाद मां कालरात्रि की आरती कर अंत में प्रणाम करें इस दिन ब्राह्माणों को दान अवश्य करें


आजादी और आध्यात्मिकता से जीवन हुआ आसान, स्त्रियों में बढ़ा 'हैप्पीनेस लेवल'

आजादी और आध्यात्मिकता से जीवन हुआ आसान, स्त्रियों में बढ़ा 'हैप्पीनेस लेवल'

Level of Happiness In Women : एक ताजा सर्वे में पता चला है कि कुछ दशक पहले की स्त्रियों की तुलना में आज की युवतियां अधिक खुश रहने लगी हैं और ये परिवर्तन उनमें अपनी लाइफ से जुड़ा हर निर्णय लेने की उनकी बड़ी हुई क्षमता की वजह से है दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक अब उन्हें हल्की बातों, जैसे क्या पहनना है, क्या खाना है, कैसे बैठना या उठना है, इसके लिए किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है वो अपने निर्णय स्वयं ले सकती है इसमें आध्यात्मिकता भी एक वजह है जो स्त्रियों के ‘लेवल ऑफ हैप्पीनेस (Level of Happiness)’ को बढ़ा रही है

इस रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के रिसर्च सेंटर ‘‘ ने देश के 29 राज्यों की 43 हजार से अधिक स्त्रियों से उनकी खुशी को लेकर प्रश्न किए इन स्त्रियों की आयु 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष के बीच की थी

सर्वे में क्या निकला?
सर्वे में स्त्रियों के साथ वार्ता में सामने आया कि कम आयु की युवतियां अपनी लाइफ से अधिक संतुष्ट हैं 18 से 40 वर्ष के बीच की कम से कम 80 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वयं को खुश बताया इनमें से ज्यादातर महिलाएं आध्यात्म से भी जुड़ी हुई थीं, यानी पूजा-पाठ या किसी तरह का मेडिटेशन जैसी सक्रिय िटी से वो जुड़ी हुई थीं

आजादी स्त्रियों को खुशी दे रही
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि हिंदुस्तान के अतिरिक्त दूसरे राष्ट्रों में भी स्त्रियों में हैप्पीनेस के लेवल को समझने के लिए स्टडी हुई है यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा की गई ऐसी ही एक स्टडी के लिए डे रिकंस्ट्रक्शन मेथड (Day Reconstruction Method) की सहायता ली गई, जिससे ये समझने की प्रयास थी कि एक दिन में स्त्रियों के इमोशंस में कितना उतार-चढ़ाव आता है इसके नतीजों के मुताबिक आजादी स्त्रियों को खुशी दे रही है

पुरुषों के मुकाबले बेटर हैंडलर
इस स्टडी में ये भी पाया गया कि फिट रहना भी स्त्रियों को अधिक खुश रखता है शोध के अनुसार अभ्यास करना स्त्रियों को उनकी सैलरी मिलने जैसी खुशी देता है सर्वे में एक चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई कि यदि महिला और पुरुष को एक जैसी कठिनाई दी गई, तो महिला उसे अधिक सरलता से डील करती है