इन शायरों में मुहब्‍बत की गई दिलकश अंदाज़े से बयां

इन शायरों में मुहब्‍बत की गई दिलकश अंदाज़े से बयां

शेरो-सुख़न (Shayari) की संसार में मुहब्‍बत (Love) भरे जज्‍़बात हों या दर्द की कैफियत इन्‍हें बेहद ख़ूबसूरती के साथ काग़ज़ पर उकेरा गया है। शायरी में हर जज्‍़बात (Emotion) को सम्मान के साथ तवज्‍जो मिली है। 

आज हम शायरों के इसी बेशक़ीमती कलाम से चंद अशआर (Sher) आपके लिए 'रेख्‍़ता' के साभार से लेकर हाजि़र हुए हैं। शायरों के ऐसे अशआर जिसमें बात दिल की हो, जिक्र साज़ो-'आवाज़' का हो व शायर का दिलकश अंदाज़े-बयां हो, तो आप भी इसका लुत्‍़फ़ उठाइए

आवाज़ दे के देख लो शायद वो मिल ही जाए
वर्ना ये आयु भर का सफ़र राएगां तो है
मुनीर नियाज़ी
मोहब्बत सोज़ भी है साज़ भी है
ख़मोशी भी है ये आवाज़ भी है
अर्श मलसियानी

छुप गए वो साज़-ए- शख़्सियत छेड़ कर
अब तो बस आवाज़ ही आवाज़ है
असरार-उल-हक़ मजाज़

उस ग़ैरत-ए-नाहीद की हर तान है दीपक
शोला सा लपक जाए है आवाज़ तो देखो
मोमिन ख़ां मोमिन

धीमे सुरों में कोई मधुर गीत छेड़िए
ठहरी हुई हवाओं में जादू बिखेरिए
परवीन शाकिर

कोई आया तेरी झलक देखी
कोई कहा सुनी तेरी आवाज़
जोश मलीहाबादी

तफ़रीक़ हुस्न-ओ-इश्क़ के अंदाज़ में न हो
लफ़्ज़ों में फ़र्क़ हो मगर आवाज़ में न हो
मंज़र लखनवी

दर्द-ए-दिल पहले तो वो सुनते न थे
अब ये कहते हैं ज़रा आवाज़ से
जलील मानिकपुरी

मैं जो कहा बोला कि ये आवाज़
उसी ख़ाना-ख़राब की सी है
मीर तक़ी मीर

मुझ से जो चाहिए वो दर्स-ए-बसीरत लीजे
मैं ख़ुद आवाज़ हूं मेरी कोई आवाज़ नहीं
असग़र गोंडवी

उस की आवाज़ में थे सारे ख़द-ओ-ख़ाल उस के
वो चहकता था तो हंसते थे पर-ओ-बाल उस के
वज़ीर आग़ा

रात इक उजड़े मकां पर जा के जब आवाज़ दी
गूंज उठे बाम-ओ-दर मेरी सदा के सामने
मुनीर नियाज़ी

सब्र पर दिल को तो आमादा किया है लेकिन
होश उड़ जाते हैं अब भी तेरी आवाज़ के साथ
आसी उल्दनी