मंदिर में परिक्रमा लगाने से पहले जान लें ये बातें, वरना...

मंदिर में परिक्रमा लगाने से पहले जान लें ये बातें, वरना...

अक्सर मंदिर जाकर पूजा पाठ करना तो बेहद आम बात है, लेकिन अक्सर आप भी मंदिर में जाकर परिक्रमा लगाते हैं लेकिन बहुत कम लोग इसके पीछे की मान्यता के बारे में जानते हैं। वैसे अक्सर ही मंदिर जाकर पूजा आरती के बाद हर कोई 5 या 7 बार परिक्रमा लगाता है और बिना परिक्रमा के पूजा सफल नहीं मानी जाती है। 

परिक्रमा की मान्यता:

भगवान गणेश जी की अपने भाई कार्तिक के साथ पूरी सृष्टि के चक्कर लगाने की शर्त लगी थी, लेकिन गणेश जी ने सिर्फ अपने माता पिता के ही तीन चक्र लगाए उन्हें विजय प्राप्त हुई थी, क्योंकि पूरी सृष्टि माता पिता के चरणों में ही हैं। इसी आधार पर भगवान को अपना माता पिता मानकर हर कोई परिक्रमा लगाता है।

परिक्रमा के फायदे:

परिक्रमा लगाने से भगवान की कृपा बरसती है और इससे आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। इसी के साथ व्यक्ति के घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती है। ऐसे लोगों के साथ भगवान हमेशा साए की तरह बने रहते हैं।


आजादी और आध्यात्मिकता से जीवन हुआ आसान, स्त्रियों में बढ़ा 'हैप्पीनेस लेवल'

आजादी और आध्यात्मिकता से जीवन हुआ आसान, स्त्रियों में बढ़ा 'हैप्पीनेस लेवल'

Level of Happiness In Women : एक ताजा सर्वे में पता चला है कि कुछ दशक पहले की स्त्रियों की तुलना में आज की युवतियां अधिक खुश रहने लगी हैं और ये परिवर्तन उनमें अपनी लाइफ से जुड़ा हर निर्णय लेने की उनकी बड़ी हुई क्षमता की वजह से है दैनिक भास्कर अखबार में छपी न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक अब उन्हें हल्की बातों, जैसे क्या पहनना है, क्या खाना है, कैसे बैठना या उठना है, इसके लिए किसी की इजाजत लेने की आवश्यकता नहीं है वो अपने निर्णय स्वयं ले सकती है इसमें आध्यात्मिकता भी एक वजह है जो स्त्रियों के ‘लेवल ऑफ हैप्पीनेस (Level of Happiness)’ को बढ़ा रही है

इस रिपोर्ट के अनुसार, पुणे के रिसर्च सेंटर ‘‘ ने देश के 29 राज्यों की 43 हजार से अधिक स्त्रियों से उनकी खुशी को लेकर प्रश्न किए इन स्त्रियों की आयु 18 वर्ष से लेकर 70 वर्ष के बीच की थी

सर्वे में क्या निकला?
सर्वे में स्त्रियों के साथ वार्ता में सामने आया कि कम आयु की युवतियां अपनी लाइफ से अधिक संतुष्ट हैं 18 से 40 वर्ष के बीच की कम से कम 80 फीसदी प्रतिभागियों ने स्वयं को खुश बताया इनमें से ज्यादातर महिलाएं आध्यात्म से भी जुड़ी हुई थीं, यानी पूजा-पाठ या किसी तरह का मेडिटेशन जैसी सक्रिय िटी से वो जुड़ी हुई थीं

आजादी स्त्रियों को खुशी दे रही
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि हिंदुस्तान के अतिरिक्त दूसरे राष्ट्रों में भी स्त्रियों में हैप्पीनेस के लेवल को समझने के लिए स्टडी हुई है यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया द्वारा की गई ऐसी ही एक स्टडी के लिए डे रिकंस्ट्रक्शन मेथड (Day Reconstruction Method) की सहायता ली गई, जिससे ये समझने की प्रयास थी कि एक दिन में स्त्रियों के इमोशंस में कितना उतार-चढ़ाव आता है इसके नतीजों के मुताबिक आजादी स्त्रियों को खुशी दे रही है

पुरुषों के मुकाबले बेटर हैंडलर
इस स्टडी में ये भी पाया गया कि फिट रहना भी स्त्रियों को अधिक खुश रखता है शोध के अनुसार अभ्यास करना स्त्रियों को उनकी सैलरी मिलने जैसी खुशी देता है सर्वे में एक चौंकाने वाली बात ये भी सामने आई कि यदि महिला और पुरुष को एक जैसी कठिनाई दी गई, तो महिला उसे अधिक सरलता से डील करती है