पति-पत्नी संतान पाने के लिए करते हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत

पति-पत्नी संतान पाने के लिए करते हैं पुत्रदा एकादशी का व्रत

सोमवार, 8 अगस्त को सावन शुक्ल पक्ष की ग्यारस है, इसे पवित्रा और पुत्रदा एकादशी कहते हैं. इस बार सावन सोमवार और एकादशी का योग होने से इस व्रत का महत्व और अधिक बढ़ गया है. ये व्रत भगवान विष्णु की कृपा से संतान सुख पाने की कामना से किया जाता है. जानिए इस व्रत से जुड़ी कुछ खास मान्यताएं…

उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पं मनीष शर्मा के अनुसार सावन हिन्दी पंचांग का पांचवां महीना है और इस महीने के शुक्ल पक्ष में साल की 11वीं एकादशी रहती है. एक हिन्दी साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं, जिस साल में अधिक मास होता है, उस साल 26 एकादशियां हो जाती हैं.

  1. सावन सोमवार और एकादशी के योग में विष्णु जी के साथ ही शिव जी की भी विशेष पूजा जरूर करें. शिव भक्ति के लिए सावन सोमवार बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि इस महीने के और इस वार के स्वामी शिव जी ही हैं. एकादशी के स्वामी विष्णु जी माने गए हैं. इस वजह से इन दोनों की देवताओं की पूजा एक साथ 8 अगस्त को जरूर करें.
  2. पुत्रदा एकादशी का व्रत एक वर्ष में दो बार किया जाता है. एक पुत्रदा एकादशी सावन महीने के शुक्ल पक्ष में और दूसरी पौष महीने के शुक्ल पक्ष में आती है.
  3. जो दंपत्ति (कपल) संतान सुख पाना चाहते हैं और जो अपनी संतान के सुखद, स्वस्थ जीवन की कामना करते हैं, उन्हें पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर करना चाहिए.
  4. जो लोग एकादशी व्रत करना चाहते हैं, उन्हें दशमी तिथि से ही सात्विक दिनचर्या अपनानी चाहिए. सात्विक भोजन करें. दशमी तिथि की शाम को विष्णु पूजन करें.
  5. एकादशी पर सुबह शीघ्र उठना चाहिए और स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य अर्पित करें. ऊँ सूर्याय नम: मंत्र का जप करें.
  6. सूर्य पूजा के बाद घर के मंदिर में भगवान विष्णु की पूजा करें और एकादशी व्रत करने का संकल्प लें.
  7. विष्णु पूजा में देवी महालक्ष्मी की प्रतिमा भी जरूर रखें. दोनों देवी-देवता का केसर मिश्रित दूध से अभिषेक करें. तुलसी के साथ मिठाई का भोग लगाएं. धूप-दीप जलाकर आरती करें. वकायदा पूजन करें.
  8. एकादशी पर दिनभर निराहार रहें यानी अन्न का सेवन न करें. फलों का, फलों के रस का और दूध का सेवन कर सकते हैं. सुबह-शाम विष्णु पूजा में ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करें.
  9. एकादशी के बाद यानी द्वादशी तिथि पर सुबह स्नान के बाद विष्णु पूजा करें और किसी जरूरतमंद आदमी को भोजन कराएं. इसके बाद स्वयं अन्न ग्रहण करें. इस तरह एकादशी का व्रत पूरा होता है.
  10. सावन सोमवार को शिवलिंग पर जल, दूध, पंचामृत चढ़ाएं. इनके बाद एक बार फिर से जल चढ़ाएं. बिल्व पत्र, आंकड़ें के फूल, धतूरा आदि चीजें शिव जी को अर्पित करें. ऊँ नम: शिवाय मंत्र का जप करें. भगवान को मिठाई और फलों का भोग लगाएं. धूप-दीप जलाकर आरती करें.