आपकी स्कीन की देखभाल करते है इस तरह से नीम और एलोवेरा

आपकी स्कीन की देखभाल करते है इस तरह से नीम और एलोवेरा

अगर आपकी स्कीन पर जीवाणु पनपने लगें तो यह अनाकर्षक हो जाती है एवं संक्रमण को जन्म देती है अतः आपको अपनी स्कीन में निखार लाने के लिए प्राकृतिक एंटीसेप्टिक का इस्तेमाल करना चाहिए बाज़ार में कई ऐसे उत्पाद आपको मिल जाएंगे जो नीम के पत्तों के अंश से बने होते हैं पर आप प्राकृतिक नीम के पत्तों से भी घरेलू तरीका अपना सकते हैं

मुट्ठीभर नीम की पत्तियां लें और इन्हें अच्छे से पीस लें एक बार पेस्ट तैयार हो जाने पर इसे शहद के साथ मिश्रित कर लें और अपने चेहरे पर लगाएं इससे आपके चेहरे की अशुद्धियाँ दूर होंगी और आपका चेहरा सुन्दर लगेगा

एलोवेरा का रस: आजकल आप ज़्यादातर सौन्दर्य उत्पादों में एलो वेरा का अंश पा सकते हैं एलो वेरा की एक पत्ती लें और इसे बीच से काट लें इससे निकले कारागार (gel) को अपनी स्कीन पर लगाएं यह थोडा फिसलन भरा होगा, पर एक बार इसे लगाकर आप पाएंगे कि यह सूख रहा है

यह धीरे धीरे आपकी स्कीन में समा जाएगा इससे आपके चेहरे के काले धब्बे और अनाकर्षक दाग दूर होंगे एक बार इसे लगाकर 20 मिनट के बाद धो लें इसका इस्तेमाल हर आयु वर्ग के लोगों द्वारा किया जा सकता है


मंगलवार के दिन हनुमानजी को इस उपाय से करें प्रसन्न

मंगलवार के दिन हनुमानजी को इस उपाय से करें प्रसन्न

आज मंगलवार है और आज के दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है। हनुमान जी के लिए कहा जाता है कि वे बहुत ही जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। मान्यता है कि अगर हनुमान जी की पूजा निरंतर की जाए तो व्यक्ति की हर मनोकामना पूरी होती है। इसके लिए व्यक्ति का मन, वचन और कर्म से पवित्र होना बेहद जरूरी है। कहा जाता है कि अगर मंगलवार के दिन या फिर प्रतिदिन श्री हनुमान चालीसा या श्री हनुमान वडवानल स्तोत्र का पाठ किया जाए तो व्यक्ति हर तरह के दुखों से मुक्त हो जाता है। साथ ही मंगलवार के दिन हनुमान जी को चोला भी चढ़ाना चाहिए। कहा जाता है कि आज के दिन एक खास उपाय किया जाए तो व्यक्ति पर हनुमान जी की कृपा जल्दी होती है। मंगलवार के दिन करें ये उपाय:

मंगलवार के दिन करें ये खास उपाय:

मंगलवार के दिन सुबह जल्दी उठ जाना चाहिए और स्नान कर लेना चाहिए। फिर एक साफ लोटा लें और हनुमान जी के मंदिर में जाए और इसी जल से हनुमानजी की मूर्ति को स्नान कराएं। पहले दिन हनुमान जी के सिर पर एक दाना साबुत उड़द रखकर उनकी 11 बार परिक्रमा करें। फिर मन ही मन अपनी मनोकामना हनुमानजी को जरूर कहें। यह उड़द का दाना घर वापस ले आएं और उसे अलग रख दें।


फिर अगले दिन से एक-एक कर उड़द का दाना बढ़ाते जाएं और लगातार इसी प्रक्रिया को दोहराएं और दाना बढ़ाते रहें। 41 दिन 41 दाने रखने के बाद, 42वें दिन से एक-एक कर दाना कम करते रहें। उदाहरण के तौर पर: 42वें दिन 40, 43वें दिन 39 और 81वें दिन 1 दाना। मान्यता है कि 81वें दिन का जब यह अनुष्ठान पूरा हो जाता है तब उसी दिन रात में श्री हनुमानजी सपने में साधक को दर्शन देते हैं। साथ ही मनोकामना की पूर्ति भी करते हैं। इस विधि के दौरान जितने भी दानें उड़द के चढ़ाए गए हैं उन्हें नदी में प्रवाहित कर दें।


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