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संभाग में सबसे बड़ी समस्या अवैध रेत खनन की,मुफ्त की रेत निकालकर करोड़ों में बेची

 प्राकृतिक संसाधनों से लबरेज नर्मदापुरम संभाग की आवाज अभी तक राज्य के हुक्मरानों तक नहीं पहुंची है जल, जंगल और जमीन के भरपूर दोहन के बाद भी इस संभाग के तीन जिलों नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा का पिछड़ापन दूर करने के लिए कोई ठोस कोशिश नहीं हुए पर्यटन की दृष्टि से अपार संभावनाए हैं कृषि उत्पादन के मुद्दे में नए प्रयोग हो रहे हैं राज्य स्तरीय रेकार्ड बन रहे हैं, लेकिन बदले में उपेक्षा ही मिल रही है नयी गवर्नमेंट से जनता को आशा है कि वह ठोस कार्ययोजना बनाकर पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि आदि पर ध्यान देगी

नर्मदापुरम जिले की मुख्य पहचान नर्मदा नदी और विश्व मशहूर पर्यटन स्थल पचमढ़ी है संभागीय मुख्यालय का दर्जा मिलने के बाद भी नर्मदापुरम की स्थिति जिला मुख्यालय जैसी ही है हैरत की बात यह है कि प्रदेश के कई छोटे जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज खुल चुके हैं, लेकिन नर्मदापुरम संभाग में न मेडिकल कॉलेज है और न ही इंजीनियरिंग कॉलेज नर्मदा नदी के साथ जो व्यवहार हो रहा है, वह जगजाहिर है संभाग में गैरकानूनी रेत उत्खनन का कारोबार चल रहा है
टूरिस्ट सर्किट की अच्छी संभावनाएं

नर्मदापुरम, बैतूल और हरदा में टूरिज्म की काफी संभावनाएं हैं नर्मदा, ताप्ती और तवा नदी के साथ ही यहां कई ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनका संरक्षण किया जाना चाहिए ब्रांडिंग न होने से पर्यटन स्थल बाहरी पर्यटकों की नजर में नहीं आ पाए हैं यदि टूरिस्ट सर्किट बनाकर जोड़ दिया जाए और कनेक्टिविटी की सुविधा दी जाए तो पर्यटकों की आवाजाही बढ़ सकती है
दीपक वर्मा,रिटायर्ड आइपीएस अफसर
आदिवासियों की बातें तो बहुत की जाती हैं, लेकिन सुविधाओं की बात कोई नहीं करता पूरे बैतूल जिले में सर्वसुविधायुक्त सरकारी हॉस्पिटल नहीं है जिले के लोगों को उपचार कराने नागपुर जाना पड़ता है उच्च शिक्षा के लिए भी युवाओं को बाहर जाना पड़ता है
प्रशांत उइके,आदिवासी पुरुष संगठन
संभाग में सबसे बड़ी परेशानी गैरकानूनी रेत खनन की है निःशुल्क की रेत निकालकर करोड़ों में बेची जा रही है जंगल की कटाई जमकर हो रही है सरकारी अधिकारी फील्ड में जाते नहीं, उन्हें भी अपनी जान प्यारी है प्रशासनिक अमला डरता है
मनोहरलाल गोयल,सामाजिक कार्यकर्ता
अनुपम सौंदर्य: बैतूल जिले के भैंसदेही ब्लॉक की ग्राम पंचायत थपोडा में प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर मुक्तागिरी क्षेत्र है यहां दिगंबर जैन संप्रदाय के 52 मंदिर हैं पहाड़ पर पहुंचने को 250 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं

 

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