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चंबल नदी में तेजी से बढ़ रही मगरमच्छों की संख्या

 चंबल नदी राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी के कुछ जिलों से होते हुए बहती है, लेकिन इस नदी का सबसे अधिक हिस्सा करीब 435 किलोमीटर मध्य प्रदेश की सीमा में आता है चंबल नदी में मगरमच्छ, घड़ियाल, डॉल्फिन समेत कई जलीय जीव पाए जाते हैं ऐसे में चंबल नदी में जलीय जीवों की संख्या पता लगाने के लिए हर वर्ष फरवरी माह में इनकी गिनती कराई जाती है इस वर्ष 14 फरवरी से जीव जंतु जानकार चंबल में मगरमच्छों की गणना के लिए सर्वे का काम प्रारम्भ करेंगे, जिसके बाद रिपोर्ट गवर्नमेंट को भेजी जाएगी

मगरमच्छों की संख्या में होगा इजाफा 

चंबल में 2108 घड़ियाल, 878 मगरमच्छ और 96 डॉल्फिन समेत कई अन्य जलीय जीव उपस्थित हैं कहा जा रहा है कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार मगरमच्छों की संख्या में खास बढ़ोत्तरी देखने को मिल सकता है बता दें कि वर्ष 1978 में चंबल नदी के 960 किलोमीटर के एरिया को राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल अभ्यारण घोषित कर दिया गया था इसके बाद से देवरी घड़ियाल केंद्र पर कृत्रिम वातावरण में हर वर्ष नदी से करीब 200 अंडे निकाल कर उनका लालन-पालन किया जाता है इसके बाद 3 साल बाद उन्हें फिर से चंबल नदी में छोड़ दिया जाता है

10 दिन में पूरा होगा जलीय जीवों की गणना का काम 
चंबल नदी में लगातार घड़ियालों की प्रजातियां बढ़ रही हैं ऐसे में इस बार न केवल मध्य प्रदेश की मुरैना जिले के चंबल अभ्यारण के अधिकारी बल्कि राजस्थान और मध्य प्रदेश के जंतु जानकार भी चंबल नदी में जलीय जीवों की गणना करने का काम 14 फरवरी को प्रारम्भ करेंगे जो कि 10 दिन में पूरा होगा इतना ही नहीं, जलीय जीवों की गणना सर्वे में राजस्थान, मध्य प्रदेश और यूपी के जानकारों के साथ-साथ भारतीय वन्यजीव संस्थान और अन्य संस्थाओं के एक्सपर्ट्स भी उपस्थित रहेंगे

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