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Nudge Theory केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का दावा, बोलीं…

 केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को बोला कि अर्थशास्त्री रिचर्ड थेलर द्वारा दी गई नज थ्योरी का इस्तेमाल पीएम मोदी के नेतृत्व वाली गवर्नमेंट ने अर्थव्यवस्था में परिवर्तन लाने के लिए विभिन्न पहलों में किया है श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के वार्षिक दिवस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने बोला कि इस सिद्धांत का इस्तेमाल हिंदुस्तान की जरूरतों के अनुरूप आर्थिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए एक उपकरण के रूप में किया जा रहा है

निर्मलाने कहा कि इसके इस्तेमाल के उदाहरण ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ योजना में देखे जा सकते हैं, जिससे लिंगानुपात में सुधार हुआ है वित्तमंत्री ने अपनी बात को रेखांकित करने के लिए स्टैंड अप इण्डिया योजना का भी जिक्र किया, जिसके अनुसार स्त्रियों को सब्सिडी वाले कर्ज दिए जाते हैं, और लोगों से एलपीजी सिलेंडर सब्सिडी छोड़ने का आग्रह करने के पीएम के कोशिश का भी जिक्र किया नज सिद्धांत व्यवहारिक अर्थशास्त्र, फैसला लेने, व्यवहार नीति, सामाजिक मनोविज्ञान, उपभोक्ता व्यवहार और संबंधित व्यवहार विज्ञान में एक अवधारणा है जो समूहों के व्यवहार और फैसला लेने के अनुकूल डिजाइन का प्रस्ताव करता है

वित्तमंत्री ने अपने संबोधन में आगे बोला कि ऐसी गवर्नमेंट की आवश्यकता है, जो भविष्यवादी हो, सुधारों के लिए तैयार हो और व्यवसायों को बढ़ने के लिए स्थिरता प्रदान करे उन्होंने कहा, “मोदी गवर्नमेंट ने जिस तरह के निर्णय लिए हैं और जो पहले पिछली सरकारों के दौरान नहीं हुए थे, उनमें एकदम यही अंतर है” सीतारमण ने बोला कि पीएम “पात्रता” के सिद्धांत में विश्‍वास नहीं करते उन्‍होंने कहा, “वह दृढ़ता से लोगों को ‘सशक्त’ करने, उन्हें यह विकल्प देने कि वे क्या करना चाहते हैं, में विश्‍वास करते हैं, बुनियादी चीजों पर खर्च करते हैं, जो उन्हें यह तय करने की शक्ति देते हैं कि वे कहां रहना चाहते हैं, और उन्हें संसाधनों और आवास, सड़कें, पीने का पानी, शौचालय जैसी महत्वपूर्ण सुविधाओं तक पहुंच प्रदान करते हैं

देश की आर्थिक वृद्धि का जिक्र करते हुए वित्तमंत्री ने कहा, “ऐसे बहुत से लोग हैं, जो कहते हैं कि यह तय है कि हिंदुस्तान दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा और हमें इसका श्रेय लेने की आवश्यकता नहीं है हिंदुस्तान के लोगों को इसका श्रेय मिलना चाहिए और इस पर गर्व महसूस करना चाहिए यह हिंदुस्तान के लोग ही हैं जिन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था को 10वें जगह से पांचवें जगह पर पहुंचाया और इसे तीसरे जगह पर भी ले जाएंगे” उन्होंने कहा, “यह बोलना कि यह एक नियति हो सकती है और इसमें लोगों का कोई कोशिश नहीं है, हमारे उद्यमियों, किसानों और अन्य वर्गों के प्रयासों को कमजोर करना है जो हिंदुस्तान को ऊपर की ओर धकेल रहे हैं

निर्मला ने विदेशी निवेश का जिक्र करते हुए ने बोला कि पिछले 23 सालों (अप्रैल 2000-मार्च 2023) में राष्ट्र में कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) प्रवाह 919 अरब $ था, जबकि पिछले नौ सालों में प्राप्त कुल एफडीआई प्रवाह ( अप्रैल 2014-मार्च 2023) 595.25 अरब $ था, जो पिछले 23 सालों में कुल एफडीआई प्रवाह का लगभग 65 फीसदी है उन्होंने कहा, “केवल सियासी स्थिरता, नीतिगत स्थिरता और निर्णायकता ही हिंदुस्तान की आर्थिक प्रगति की गारंटी देगी

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