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नरेंद्र मोदी ने लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने के लिए अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो किया साझा

आगरा: देश के पीएम मोदी ने त्योहारों से पहले लोकल फॉर वोकल को बढ़ावा देने के लिए अपने ट्विटर एकाउंट से एक वीडियो साझा किया वीडियो में एक विज्ञापन के जरिये आत्मनिर्भर हिंदुस्तान बनाने की बात कही है साथ में क्षेत्रीय प्रोडक्ट खरीदने की लोगों से अपील की है इस वीडियो में आगरा के जूते का भी जिक्र किया है ऐसे में हम इस वीडियो में जानेंगे कि आखिर कार आगरा में बनने वाले जूते की क्या विशेषता है ? लोकल स्तर पर जूता किन किन प्रक्रिया से गुजरकर तैयार होता है और कैसे जूता उद्योग क्षेत्रीय लोगों को रोजगार देता है…

अब आईए जानते हैं कि आपके पैर की शोभा बढ़ाने वाला जूता आखिर कार एक कारखाने से कैसे तैयार होता है और जूते को किन-किन प्रक्रिया से होकर गुजरना पड़ता है सबसे पहले जूता बनाने के लिए बाजार से रो मटेरियल लाया जाता है जिसमें कपड़ा, फोम, गत्ता शामिल होता है इसके बाद जूते का ऊपरी सोल बनाने के लिए कपड़े और फोम को कारीगर हाथों से कटिंग करते है कटिंग करने के बाद जूते का पिटर तैयार किया जाता है पिटर के बाद जूते का वाट बनाया जाता है

कैसे तैयार होता है जूता?
सबसे अहम काम इसके बाद प्रारम्भ होता है यानी कि पेस्टिंग का पेस्टिंग जूते की जान होती है माना जाता है कि पेस्टिंग जितनी मजबूत होती है जूता उतना ही लंबा चलता है वाट बनाने के बाद जूते के सोल पर अपर को पेस्ट किया जाता है इसके बाद फर्निशिंग के जरिए चेक किया जाता है कि जूते में कहीं कोई कमी तो नहीं रह गयीफिनिशिंग के बाद जूते को फाइनल टच यानी कि चमकाया जाता है इन सभी प्रक्रिया से गुजरने के बाद जूता अब बनकर तैयार है इनको डिब्बे में बंद कर सेल करने के लिए आगे भेज दिया जाता है

आगरा में है एशिया की सबसे बड़ी जूता मंडी
जूते के व्यापार में पिछले तीन पीढियां से काम कर रहे आदिल बताते हैं कि उनके दादा और पिता के बाद अब वह स्वयं इस जूते के कारोबार में है आगरा हींग की मंडी मंटोला को एशिया की सबसे बड़ी जूता मंडी होने का गौरव प्राप्त है यहां रॉ मटेरियल से लेकर जूता बनाने का हर कच्चा सामान मिल जाता है यही से जूता विदेश तक सप्लाई होता है आगरा में कई ढंग के जूते बनाए जाते हैं स्पोर्ट्स और चमड़े के जूते की खूब डिमांड है क्षेत्रीय स्तर पर सबसे अधिक स्पोर्ट्स शूज तैयार किया जाता है जो कम बजट का होता है इस जूते के व्यापार से आगरा में लगभग 10 लाख लोग जुड़े हुए हैं जिन्हें जूता रोजगार देता है जूता बनाने का पूरा काम हाथों से मैन्युअल किया जाता है

2 हजार करोड़ की रखी गई आधारशिला
पिछले महीने आगरा में तीन दिन तक चले व्यवसायी मेले में जूता के क्षेत्र में 2 हजार करोड़ रुपये के कारोबार की आधारशिला रखी गई मीट एट आगरा की थीम पर आयोजित 15वें संस्करण में 30 राष्ट्रों के 12 हजार से अधिक विजिटर्स ने हिस्सा लिया इसमें आगरा और आसपास की 170 से अधिक कंपनियों ने अपने स्टाल लगाए थे तीन दिनों तक चलने वाले लेदर इंडस्ट्री के समागम को 12791 विजिटर्स की सहभागिता ने ऐतिहासिक बना दिया है

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