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IPO भरने के लिए अब बाजार रेगुलेटर कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग की देगा अनुमति

सेबी चेयरपर्सन माधबी पुरी बुच ने बोला कि स्टॉक एक्सचेंजों के लेंन-देंन को इंस्टेंट सेटलमेंट के अनुसार निपटारे और लेंन-देंन सेटलमेंट के टाइमलाइन को सुधारने के लिए बाजार रेगुलेटर काम कर रहा है. सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इण्डिया (SEBI) की ओर से एक प्रेस ब्रिफिंग में बुच ने इस बात की जानकारी दी है.

सेबी चिफ ने कहा कि राष्ट्र में बेहतर कैपिटल फॉर्मेशन के लिए नयी इक्विटी जारी करने, ऋण देने, म्यूचुअल फंड अप्रूवल देने जैसे फाइनेंशियल कामों में गति लाने के लिए सेबी टेक्निकल हस्तक्षेप (इंटरफेयर) के लिए काम कर रहा है. बुच ने कहा, इस तरह के हस्तक्षेपों से इन्वेस्टर्स को सालाना आधार पर अब तक 3,500 करोड़ रुपए का फायदा मिल चुका है.

इसके अतिरिक्त सेबी कंपनियों को डिलिस्टिंग की अनुमति देने के लिए रिवर्स बुक-बिल्डिंग प्रोसिजर की स्थान पर फिक्स प्राइस का इस्तेमाल करेगी. इस विषय पर दिसंबर तक एक डिस्कशन लेटर जारी किया जाएगा.

रिवर्स बुक-बिल्डिंग प्रोसेस में, स्टॉक-एक्सचेंज से किसी कंपनी को डी-लिस्ट कराने के लिए शेयरहोल्डर्स, प्रमोटर्स को उस मूल्य का ऑफर देते हैं, जिस पर वे अपने शेयर बेचना चाहते हैं. इस ऑफर को बड़े शेयर होल्डर्स के सामने भी रखा जाता है. इसके बाद ऑफर के आधार पर कंपनी की डी-लिस्टिंग की प्राइस तय की जाती है.

  • सेबी इंस्टेंट पेमेंट पर काम कर रहा है
  • UPI के जरिए इंस्टेंट सेटलमेंट
  • एक दिन में सेटलमेंट संभव
  • मार्जिन मनी की नहीं होगी जरुरत

IPO भरने के लिए अब बाजार रेगुलेटर कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग की अनुमति देगा
बुच ने कहा, IPO भरने के लिए अब बाजार रेगुलेटर कॉन्फिडेंशियल फाइलिंग की अनुमति देगा. उन्होंने कहा, ‘IPO फाइल करने वाले पहले गुप्त रूप से अपना IPO फाइल करेंगे. पूरी तरह कंफर्म होने के बाद ही फाइनल फाइलिंग की जाएगी. इसके बाद ही IPO का प्रॉस्पेक्टस जारी होगा.

सेबी चीफ ने कहा, ‘हम भाग्यशाली हैं कि अनेक खराब ग्लोबल कंडिशन के बाद भी हिंदुस्तान लगातार ग्रो कर रहा है. जीएसटी टैक्स कलेक्शन के आंकड़े और कॉर्पोरेट के एडवांस पेमेंट बता रहे हैं कि हमारी अर्थव्यवस्था काफी बेहतर परफॉर्म कर रही है.

सेबी म्यूचुअल फंड स्कीम में ड्रामेटिक परिवर्तन चाहता है
म्यूचुअल फंड स्कीम्स में काफी ड्रामेटिक सुधार देखने को मिल रहा है. सेबी चीफ ने कहा कि वाटर-मार्क के मामलों में पेंडिंग काम 175 से 6 रह गए हैं. जबकि, अल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) के मामलों को 70 से घटाकर 40 कर दिया गया है. पिछले सप्ताह सेबी ने घोषणा की थी कि, ESG इन्वेस्टमेंट के लिए एक सब-कैटेगरी बनाई जाएगी.

 

 

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