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भारत ने यूक्रेन संकट का समाधान खोजने में सुरक्षा परिषद की अप्रभावशीलता का मुद्दा उठाया और कहा…

 


संयुक्त राष्ट् हिंदुस्तान ने यूक्रेन संकट का निवारण खोजने में सुरक्षा परिषद की अप्रभावशीलता का मामला उठाया और बोला है कि जब तक इसके लिए उत्तरदायी “प्रणालीगत दोष” खामियों को ठीक नहीं किया जाता, संयुक्त देश में विश्वसनीयता की कमी बनी रहेगी

गुरुवार को यूक्रेन पर परिषद की बहस में बोलते हुए, हिंदुस्तान के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) संजय वर्मा ने पूछा: “ऐसा क्यों है कि संयुक्त देश संघ और विशेष रूप से इसका प्रमुख अंग, सुरक्षा परिषद, तरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा और संघर्ष के निवारण में असफल साबित होता रहता है

उन्होंने कहा, “बहुपक्षवाद को कारगर बनाने के लिए, पुरानी संरचनाओं में सुधार और पुनर्निमाण की जरूरत है, वरना उनकी विश्वसनीयता हमेशा कम होती रहेगी और जब तक हम उस प्रणालीगत गुनाह को ठीक नहीं करते

उन्‍होंने कहा, ध्रुवीकृत परिषद में गतिरोध बना हुआ है, क्योंकि रूस एक वीटो-शक्ति संपन्न स्थायी सदस्य है

वर्मा ने मास्को का नाम लिए बिना यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा की

उन्होंने कहा, “हमने हमेशा इस बात की वकालत की है कि मानव जीवन की मूल्य पर कोई भी निवारण नहीं निकाला जा सकता है शत्रुता और अत्याचार का बढ़ना किसी के भलाई में नहीं है

वर्मा ने कहा, “हम पीएम मोदी के इस दृष्टिकोण की वकालत करते रहेंगे कि ‘यह युद्ध का युग नहीं है’ इसके विपरीत, यह विकास और योगदान का समय है

उन्होंने कहा,” वास्तव में जरूरी है कि हम कूटनीति के वादे पर विश्वास करते रहें और अंततः वार्ता और कूटनीति ही रिज़ल्ट देती है

वर्मा ने बोला कि युद्ध से हुई क्षति ने विकासशील दुनिया को तबाह कर दिया है

उन्होंने कहा, “भारत की जी20 अध्यक्षता ने यह सुनिश्चित किया है कि विकासशील राष्ट्रों द्वारा सामना किए जा रहे कुछ आर्थिक संकटों को जी20 एजेंडा में सबसे आगे लाया जाए और सर्वसम्मति-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से एक रोडमैप पर सहमति बनी, जो कर्ज संकट का सामना कर रहे राष्ट्रों के लिए निवारण भी प्रदान करता है

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