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IIT Bombay कैंपस में खुलेआम उड़ा धर्म का मजाक, पढ़ें पूरा मामला…

महाराष्ट्र न्यूज डेस्क !!! आईआईटी बॉम्बे ने मार्च में आयोजित आर्ट फेस्टिवल परफॉर्मेंस में हिस्सा लेने वाले एक विद्यार्थी पर कार्रवाई करते हुए 1.2 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है यह जुर्माना एक सेमेस्टर की फीस के बराबर है मार्च में कला महोत्सव के दौरान विद्यार्थी ने रहोवन नामक नाटक का प्रदर्शन करते हुए माता सीता और ईश्वर राम का मजाक उड़ाया था नाटक के बाद विद्यार्थियों के एक वर्ग ने विरोध प्रदर्शन प्रारम्भ कर दिया था. मुद्दे में 7 अन्य विद्यार्थियों को भी सजा दी गई है हालांकि सजा को लेकर अभी तक कोई खुलासा नहीं हुआ है मुद्दे में 8 अन्य विद्यार्थियों को भी सजा दी गई है

अनुशासन समिति ने विद्यार्थियों का पक्ष लिया

आईआईटी बॉम्बे ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है इस मुद्दे में अनुशासन समिति ने 8 मई को बैठक बुलाई थी इसके बाद 4 जून को प्रशासन ने विद्यार्थी को जुर्माने का नोटिस जारी किया जिस विद्यार्थी को सजा दी गई है उसने अनुशासन समिति की बैठक में भी हिस्सा लिया था बैठक में उनका पक्ष जाना गया इसके बाद अब इस सजा का घोषणा किया गया है नोटिस में बोला गया है कि 1.20 लाख रुपये का जुर्माना डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स के कार्यालय में जमा करना होगा.

यह सजा अन्य विद्यार्थियों को दी गई

इतना ही नहीं, सजा नोटिस में लिखा है कि यदि इस सजा के दौरान किसी भी तरह का उल्लंघन हुआ तो आगे कई तरह के प्रतिबंध लगाए जाएंगे सजा का नोटिस सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल हो रहा है मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अन्य विद्यार्थियों पर भी कार्रवाई की गई है इनमें संस्थान से ग्रेजुएशन कर रहे 4 विद्यार्थियों पर 1.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है वहीं, चार अन्य स्नातक विद्यार्थियों को 40 हजार रुपये जुर्माना भरने और हॉस्टल खाली करने का आदेश दिया गया है

नाटक के इन दृश्यों पर टकराव हुआ था

वीडियो में देखा जा सकता है कि लड़की बनी सीता कहती हैं, ‘स्वामी ऐसे साथ में ये अकेली सुहागन अपना संवाद के साथ करें.‘ इस पर राम का भूमिका निभा रहा विद्यार्थी कहता है, ‘खोल’. दूसरे सीन में राम का भूमिका निभा रहा विद्यार्थी कहता है, ‘तुम किसी और के कबीले में जाओ और वहां किसी और के साथ रहो‘ इस सीता का भूमिका निभाने वाली लड़की कहती है, ‘एक और आदमी, ओह बंदी थी मैं वहां.‘ इतना ही नहीं, राम सीता से कहते हैं, ‘तुम रावण के साथ जाकर प्रसन्न थीं.‘ नाटक के एक दृश्य में राम और सीता के बीच मारपीट भी दिखाई गई. नाटक में दूसरी स्त्री का भूमिका निभा रही लड़की कहती है कि अच्छा हुआ कि अघोरी रावण उसे ले गया

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