104 साल की उम्र में हुआ हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट,अधिक उम्र में भी सुरक्षित है नयी तकनीक

104 साल की उम्र में हुआ हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट,अधिक उम्र में भी सुरक्षित है नयी तकनीक

कार्डियक साइंस के क्षेत्र में जयपुर में एक बार फिर नया कीर्तिमान रचा गया है राष्ट्र में अब तक के सबसे अधिक उम्र के रोगी में बिना सर्जरी के हार्ट वॉल्व रिप्लेसमेंट प्रोसीजर टावी (ट्रांस कैथेटर एओर्टिक वॉल्व इंप्लांटेशन) हुआ है शहर के इटर्नल हॉस्पिटल में यह प्रोसीजर डाक्टर अमित चौरसिया और उनकी टीम ने कर दिखाया है इससे पहले हिंदुस्तान में 92 साल तक के रोगी का टावी तकनीक से सफल मुकदमा रिपोर्ट किया गया है शुक्रवार को हुई इर्टनल हॉस्पिटल में हुई प्रेस वार्ता में डॉक्टर्स ने मुकदमा के बारे में जानकारी दी, साथ ही रोगी ने भी अपना अनुभव साझा किया

छाती में दर्द की कम्पलेन पर पहुंचे थे हॉस्पिटल
हॉस्पिटल के स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज डायरेक्टर डाक्टर अमित चौरसिया ने बताया कि रोगी को छाती में दर्द और सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके चलते वे यहां हॉस्पिटल आए थे 2डी ईको जांच में उनके हार्ट के एओर्टिक वॉल्व में सिकुड़न देखी गई थी, तभी उन्हें वॉल्व रिप्लेसमेंट की राय दी गई थी उनका एंजियोग्राम भी किया गया जिसमें सामान्य ब्लॉकेज थे ऐसे में यह साफ हो गया कि एओर्टिक स्टेनोसिस के कारण ही उन्हें छाती में दर्द हो रहा था

वॉल्व रिप्लेसमेंट का प्रक्रिया को समझते हुए उन्होंने प्रोसीजर के लिए तुरंत अनुमति दे दी काफी अधिक उम्र होने के कारण सर्जरी से वॉल्व रिप्लेसमेंट संभव नहीं था इसीलिए टावी तकनीक से उनका वॉल्व बदला गया केवल डेढ़ घंटे में ही पूरा प्रोसीजर हो गया और उन्होंने अगले दिन चलना-फिरना प्रारम्भ भी कर दिया प्रोसीजर के चौथे दिन रोगी को हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया गया

अधिक उम्र में भी सुरक्षित है नयी तकनीक
मरीज का शुरूआती ट्रीटमेंट हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव कार्डियोलॉजी डायरेक्टर डाक्टर आलोक माथुर देख रहे थे उन्होंने बताया कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर की भी बात करें इटर्नल हॉस्पिटल के चेयरमैन डाक्टर समीन शर्मा के द्वारा न्यूयॉर्क में 105 साल की स्त्री का टावी प्रोसीजर सफलतापूर्वक किया जा चुका है हिंदुस्तान में 104 वर्ष की उम्र में टावी से ट्रीटमेंट अपने आप में बड़ी उपलब्धि है जोकि जयपुर के हॉस्पिटल द्वारा दर्ज हुई है कार्डियक सांइस विभाग के चेयरमैन डाक्टर अजीत बाना ने बोला कि एओर्टिक स्टेनोसिस से जूझ रहे रोगियों में दवाएं कम काम करती हैं 

अगर रोग का उपचार दवाओं से ही जारी रहता है तो रोग होने के पहले साल में जीवित रहने की आसार 50% और दूसरे साल में केवल 20% ही रह जाती है टावी उन लोगों के लिए एक सुरक्षित विकल्प है जिन्हें ओपन सर्जरी से हाई और मिडियम रिस्क है मुकदमा को सफल बनाने में स्ट्रक्चरल हार्ट डिजीज एक्सपर्ट डाक्टर प्रशांत द्विवेदी, नॉन इनवेसिव कार्डियोलॉजिस्ट डाक्टर हेमंत चतुवेर्दी, कार्डियक एनस्थेटिस्ट डाक्टर नवनीत मेहता का विशेष योगदान रहा

हॉस्पिटल की को-चेयरपर्सन मंजू शर्मा और सीईओ डाक्टर प्राचीश प्रकाश ने बोला कि यह बड़ी उपलब्धि है कि राष्ट्र के सबसे बुजुर्ग पेशेंट का टावी प्रोसीजर जयपुर में हुआ है और वर्ल्ड क्लास ट्रीटमेंट फैसिलिटी जयपुर में मौजूद कराने में इटर्नल हॉस्पिटल का जरूरी सहयोग है