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डीजीपी कपूर ने कहा कि बैंक के अधिकारियों से भी जल्द की जाएगी बैठक, बढ़ाई जाएगी जागरूकता अभियानों की संख्या

प्रदेश में अब साइबर क्राइम को रोकने के लिए केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा संचालित हेल्पलाइन -1930 पहले की अपेक्षा दोगुनी रफतार से काम करने जा रहा है. हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के निर्देशानुसार अब साइबर हेल्पलाइन नंबर पर तैनात स्टाफ की संख्या को पहले से दोगुना किया गया है ताकि हेल्पलाइन पर प्राप्त होने वाली शिकायतों का पहले की अपेक्षा और अधिक शीघ्रता से निवारण किया जा सके.

बोला कि पिछले कुछ समय में तकनीक के साथ साथ साइबर अपराधों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी हुआ है. साइबर क्रिमिनल नए-नए उपायों का इस्तेमाल करते हुए लोगों के साथ औनलाइन फ्रॉड करके उन्हें ठगी का शिकार बना रहे हैं. ऐसे में महत्वपूर्ण है कि साइबर क्राइम से संबंधित शिकायतों का तत्परता से निवारण किया जाए. इसके अलावा, लोगों को साइबर सुरक्षा की जानकारी देने को लेकर जल्द ही जागरूकता अभियानों की संख्या बढ़ाई जाएगी ताकि लोग सावधान रहें और बैंक खाता संबंधी निजी जानकारी किसी के साथ सांझा ना करें. उन्होंने बोला कि इसे लेकर बैंकर्स के साथ भी बैठक आयोजित किए जाने की योजना है ताकि उनके साथ बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए काम किया जा सके.

गौरतलब है कि हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर द्वारा पिछले हफ्ते सेक्टर-3 पंचकूला स्थित 112- आईआरएसएस में संचालित किए जा रहे हेल्पलाइन नंबर-1930 के कार्यालय का निरीक्षण किया गया था. इस दौरान कपूर ने यहां तैनात ड्यूटी स्टाफ से उनकी कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से पूछा. उन्होंने स्टाफ से पूछा कि जब उन्हें साइबर क्राइम संबंधी कम्पलेन प्राप्त होती है तो पीड़ित आदमी से क्या-क्या जानकारी ली जाती है और एसओपी क्या है जिस पर मौजूद स्टाफ ने उन्हें अपनी कार्यप्रणाली के बारे में बताया.

– ’हेल्पलाइन नंबर पर प्राप्त शिकायतों का निवारण करते हुए अगस्त माह तक प्रदेश की जनता के 22.38 करोड रुपए ठगी से बचाए गए’

निरीक्षण के दौरान कहा गया कि जनवरी से अगस्त माह तक इस हेल्पलाइन नंबर के माध्यम से प्रदेश में लोगों के लगभग 22.38 करोड रुपए ठगी होने से बचाए गए हैं. यह भी कहा गया कि कम्पलेन प्राप्त होने उपरांत आदमी से जरूरी जानकारी जैसे -यूपीआई आईडी ,जिस नंबर से टेलीफोन आया था उसकी जानकारी ,बैंक की डिटेल तथा पेमेंट का माध्यम अर्थात यूपीआई अथवा बैंक ट्रांसफर आदि ली जाती है . इसके बाद आदमी की कंप्लेंट आईडी क्रिएट की जाती है और इसे बैंक के नोडल अधिकारी के पास भेजा जाता है. संबंधित बैंक के नोडल अधिकारी द्वारा प्राप्त कम्पलेन के आधार पर लेंन-देंन वाले एकाउंट को फ्रीज कर दिया जाता है जिससे वितीय लेनदेन वहीं रुक जाता है. अब तक इस हेल्पलाइन पर 38 हज़ार 600 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई है.

– ’साइबर क्राइम का शिकार होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दे लोग- शत्रुजीत कपूर , डीजीपी हरियाणा’

पुलिस महानिदेशक ने कहा कि साइबर धोखाधड़ी संबंधी मामलों की रिपोर्ट करने के लिए थाने जाकर पारंपरिक ढंग से एफआईआर दर्ज करवाना और उसकी जांच होना एक लंबी प्रक्रिया है. ऐसे में आम जन को चाहिए कि वे साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर जल्द से जल्द साइबर ठगी संबंधी सूचना दें ताकि आगे की लेंन-देंन को रोका जा सके. इसके अतिरिक्त लोग साइबर अपराध की वेबसाइट- पर भी कम्पलेन दर्ज करवाई जा सकती है.

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