बिल्डर अब नहीं बना रहे इस रेंज के सस्ते घर

बिल्डर अब नहीं बना रहे इस रेंज के सस्ते घर

महंगाई के दौर में यदि आप सस्ते घरों की तलाश कर रहे हैं तो आपको अपनी मंजिल मिलना अभी कठिनाई दिख रही है. बिल्डर्स अब 40 लाख से कम मूल्य वाले सस्ते मकान तैयार करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं. एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्र के सात प्रमुख शहरों में 40 लाख रुपये से कम मूल्य वाले किफायती घरों की कुल नए घरों में हिस्सेदारी घटकर पिछले वर्ष 20 फीसदी पर आ गई. 2018 में यह हिस्सेदारी 40 फीसदी थी. 

रियल एस्टेट सलाहकार फर्म एनरॉक ने किफायती घरों की संख्या में आई इस गिरावट के लिए महंगी जमीन, कम फायदा और कम ब्याज दरों पर वित्त नहीं मिलने जैसे कारकों को उत्तरदायी ठहराया है. आंकड़ों के अनुसार, रियल एस्टेट डेवलपर ने साल 2022 में राष्ट्र के सात प्रमुख शहरों में कुल 3,57,650 घरों की आपूर्ति की जिनमें से केवल 20 फीसदी घर ही किफायती श्रेणी में थे. 

2018 में 40 फीसदी थी हिस्सेदारी 

किफायती घरों की हिस्सेदारी में पिछले 5 वर्ष में गिरावट दर्ज की गई है. 2018 में कुल 1,95,300 घर तैयार किए गए थे, जिनमें से 40 फीसदी घर किफायती श्रेणी के थे. साल 2019 में बने कुल 2,36,560 घरों में से किफायती घरों का हिस्सा 40 फीसदी पर स्थिर रहा. हालांकि साल 2020 में निर्मित कुल 1,27,960 इकाइयों में से किफायती घरों का हिस्सा गिरकर 30 फीसदी रह गया. इन सात शहरों में साल 2021 में तैयार कुल 2,36,700 घरों में से किफायती घरों का आंकड़ा और भी गिरावट के साथ 26 फीसदी पर गया. किफायती घरों की संख्या में गिरावट का दौर पिछले वर्ष भी जारी रहा और कुल नयी आवासीय इकाइयों में किफायती घरों का अनुपात गिरकर 20 फीसदी रह गया. 

महंगी जमीन के चलते नहीं बन रहे सस्ते मकान

एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, ’किफायती घरों की तादाद कम होने के पीछे कई कारक हैं. इनमें एक निश्चित रूप से जमीन है. डेवलपर मध्यम एवं प्रीमियम श्रेणी वाली इकाइयां बनाकर जमीन की लागत की सरलता से भरपाई कर सकते हैं लेकिन किफायती घरों के मामला अलग हो जाता है.’ 

अब 40 से 1.5 करोड़ के मकान ढूंढ रहे ग्राहक 

रियल्टी फर्म सिग्नेचर ग्लोबल के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने किफायती घरों की संख्या कम होने के पीछे बढ़ती निर्माण लागत और जमीन की कीमतों को उत्तरदायी बताते हुए बोला कि इस श्रेणी में नयी परियोजनाएं लाने की गुंजाइश ही ही नहीं बची है. एनरॉक ने बोला कि ऐसी स्थिति में नए घर की तलाश करने वाले लोगों की मांग 40 लाख रुपये से अधिक और 1.5 करोड़ रुपये से कम मूल्य वाले घरों की तरफ केंद्रित हो गई है.