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बैंक ऑफ बड़ौदा प्रशासन ने 4000 से ज्यादा अधिकारियों का किया ट्रांसफर

बैंक ऑफ बड़ौदा प्रशासन ने हाल ही में 4000 से अधिक ऑफिसरों के ट्रांसफर कर दिए गए हैं. बीओबी उच्च प्रबंधन के इस निर्णय के विरोध में ऑल इण्डिया बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स एसोसिएशन के बैनर तले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हो रहा है.

राजस्थान अंचल के उपाध्यक्ष जनार्दन चतुर्वेदी ने कहा कि राजस्थान के 300 से अधिक ऑफिसरों का ट्रांसफर दूरस्थ राज्यों में कर दिया है. वहां जाकर कार्य करना संभव नहीं है. बैंक प्रबंधन की मनमानी के विरुद्ध अभी ऑफिसरों की ओर से शांतिपूर्ण आंदोलन किया जा रहा है. यदि बैंक प्रबंधन ने नियम खिलाफ किए गए तबादलों को रद्द नहीं किया तो आंदोलन को उग्र करते हुए कार्य बहिष्कार किया जाएगा. इससे बैंक का कामकाज ठप्प हो जाएगा और करोड़ों का कारोबार प्रभावित होगा.

समझौते और ट्रेड यूनियन एक्ट का खुले उल्लंघन का लगाया आरोप

ऑल इण्डिया बैंक ऑफ बड़ौदा ऑफिसर्स एसोसिएशन के राजस्थान अंचल के उपाध्यक्ष जनार्दन चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक प्रबंधन की ओर से किए गए ट्रांसफर मान्यता प्राप्त अधिकारी संगठन के साथ किए गए औ‌द्योगिक समझौते का खुला उलंघन है. साथ ही ट्रेड यूनियन एक्ट का भी उल्लंघन है. बैंक प्रबंधन का अधिकारी संगठन के साथ हुए समझौते के अनुसार एक पॉलिसी निर्धारित की गई है. हाल ही में किए गए ट्रांसफर लिस्ट में इस पॉलिसी के प्रावधानों की पालना नहीं की गई है जो स्वीकार्य नहीं है. इस तरह का उलंघन पहले कभी नहीं हुआ है.

बैंक के उच्च प्रबंधन की इस तानाशाही के विरोध में बुधवार 12 जून को को जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, भरतपुर, बांसवाड़ा, कोटा सहित सभी शहर कस्बों में स्थित शाखाओं में स्टाफ सदस्यों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया. इन ट्रांसफर के कारण सभी ऑफिसरों में जबरदस्त आक्रोश है.

मानवीय दृष्टिकोण को नजरअंदाज किया गया-यशवंत भारद्वाज

यूनियन के राजस्थान अंचल के महासचिव यशवंत भारद्वाज ने बोला कि बैंक को ऐसे फैसला लेते समय ट्रेड यूनियन एक्ट के नियमों की पालना करते हुए मानवीय दृष्टिकोण भी अपनाना चाहिए. जबकि बैंक ऑफ बड़ौदा के उच्च प्रबंधन ने मानवीय दृष्टिकोण को पूरी तरह से नजर अंदाज किया है. हर स्टाफ के ऊपर बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी, भाई-बहन और बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां भी होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. किसी भी संस्थान की प्रगति में स्टाफ तभी अपना सर्वश्रेष्ठ सहयोग दे पाता है जब वह अपनी पारिवारिक चिंताओं से मुक्त होता है. ऐसे में हजारों किलोमीटर दूर जाकर जॉब करना संभव नहीं है.

देश निकाला जैसा तुगलकी फरमान का लगाया आरोप

राजस्थान अंचल के उपाध्यक्ष जनार्दन चतुर्वेदी ने कहा कि बैंक ऑफ बड़ौदा राष्ट्र में सार्वजनिक क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक हैं. यहां मानवीय दृष्टिकोण को ध्यान में रखने की अपेक्षा की जाती है लेकिन बैंक के उच्च प्रबंधन ने मनमानी करते हुए ट्रांसफर कर दिए हैं. यूपी में दो जोन के करीब 600 अधिकारियों, गुजरात के 3 जोन के करीब 600 अधिकारियों, साउथ इण्डिया में चेन्नई जोन के करीब 250 अधिकारियों, पुणे और महाराष्ट्र के करीब 300 से अधिक अधिकारियों, राजस्थान से 300 से अधिक ऑफिसरों और अन्य राज्यों में भी इसी तरह से दूरस्थ राज्यों में ट्रांसफर कर दिए गए हैं. यह आदेश एक तरह से राष्ट्र निकाला कर देने जैसा तुगलकी फरमान है. एक राज्य से दूसरे राज्यों में ट्रांसफर होने से अधिकारी और उनके परिजन प्रभावित हो रहे हैं. ऑफिसरों के बेघर होने की नौबत आ गई है. राज्य में एक जिले से दूसरे जिले तक ट्रांसफर होने में कोई कठिनाई नहीं है लेकिन एक राज्य से दूसरे राज्यों में सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना सरल नहीं है. कई ऑफिसरों ने जॉब छोड़ने की बात भी कही है.

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