झारखण्ड

इस मंदिर में भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने से श्रद्धालु की हर मनोकामना होती है पूरी

कहते है आस्था का कोई रूप और ढंग नहीं होता है यह एक रेट होता हैशिवरात्रि का त्योहार निकट आ रहा हैऐसे में शिवभक्त ईश्वर भोलेनाथ को मनाने शिवालयों में जाते है पलामू जिले में भी एक ऐसा शिवालय है, जिसकी आस्था मान्यता सदियों पुरानी है मान्यता है कि इस मंदिर में ईश्वर भोलेनाथ पर जलाभिषेक करने से श्रद्धालु की हर इच्छा पूरी हो जाती है इस मंदिर में आदि काल से एक जल श्रोत से अपने आप पानी निकलता रहता है जिसका आज तक कोई पता नहीं लगा सका है

झारखंड की राजधानी रांची से करीब 175 किलोमीटर और पलामू जिला मुख्यालय मेदिनीनगर से करीब 10 किलोमीटर दूर सदर प्रखंड के जमुने गांव में भैसाखुर मंदिर के नाम से मशहूर है यहां हर वर्ष शिवरात्रि में मेले का आयोजन होता है इस शिव मंदिर में अपने आप जल आते रहता है इस मंदिर को पाताल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है

जमीन की खुदाई के दौरान मिला था शिवलिंग
मंदिर के पुजारी कुशुमकांत पांडे ने बोला कि शिवलिंग पर अपने आप चट्टान के बीच से जल पहुंचता है इस मंदिर के जीर्णोद्वार के बाद से जल का श्रोत कम हो गया है लेकिन बरसात के मौसम में यह मंदिर जल से भरा रहता है यहां से निकलता जल मंदिर के बगल में स्थित तालाब में जाता है जहां से वो पानी मैला नदी में जाता है इस जल का श्रोत के बारे में किसी को पता नहीं की ये आता कहां से है वहीं यह शिवलिंग को कहीं से लाकर स्थापित नहीं किया गया है ये शिवलिंग जमीन की खुदाई के दौरान निकला था जिससे लोगों का आस्था जुड़ा हुआ है ईश्वर भोलेनाथ के शिखर पर जैसे मां गंगा विराजमान है ठीक वैसे हीं चट्टानों के बीच से गंगा निकलकर शिवलिंग पर गिरता थाअब मंदिर के सुंदरीकरण के बाद से शिवलिंग ऊपर हो गया है लेकिन फिर भी गंगा वर्षों भर निकलते रहती है

6 एकड़ में फैला है मंदिर परिसर
उन्होंने कहा कि शिवरात्रि पर हर साल दो दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होता है यहां शिवलिंग से हमेशा पानी निकलता रहता है जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है मंदिर परिसर करीब 6 एकड़ में फैला हुआ है जहां मां भगवती का दरबार, ईश्वर शिव का दरबार, हनुमान जी का दरबार के साथ पाताल मंदिर और बड़ा तालाब है हर गुरुवार को क्षेत्रीय स्त्रियों द्वारा शिवचर्चा का आयोजन होता है वहीं, मैदान में बुधवार और शनिवार को बाजार भी लगता है इस बार यहां 1 मार्च से श्रीराम चरित मानस नवाह्न पारायण पाठ महायज्ञ का 43वां अधिवेशन होने जा रहा हैजो की 9 मार्च तक चलेगा

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