अमेरिकी विदेशी मंत्री माइक पोम्पियो ने चाइना के लिए नया रास्ता का दिया इशारा 

 अमेरिकी विदेशी मंत्री माइक पोम्पियो ने चाइना के लिए नया रास्ता का दिया इशारा 

चाइना के साथ रिश्तों के लेकर अमेरिका में मंथन का दौर जारी है। अमेरिकी विदेशी मंत्री माइक पोम्पियो ने अब चाइना के लिए नया रास्ता अख्तियार करने का इशारा दिया है। उन्होंने साफ बोला है कि चाइना के मुद्दे में अमेरिका की पुरानी नीति अच्छा साबित नहीं हुई।

एक साक्षात्कार में पोम्पियो ने माना है कि अमेरिका ने चाइना में आर्थिक खुलापन को बढ़ावा दिया ताकि सियासी स्वतंत्रता के साथ चाइना के लोगों को मूलभूत अधिकार मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने पिछली सरकारों के निर्णय की आलोचना नही की लेकिन साफ कर दिया कि अब चाइना के मुद्दे में नयी नीति अपनाने की आवश्यकता है।      

माइक पोम्पियो ने इस मुद्दे में राष्ट्रपति ट्रंप को पिछले राष्ट्रपतियों से अलग बताते हुए दावा किया कि वो चाइना के मुद्दे में एक अलग रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने बोला कि रिपब्लिकन हों या डेमोक्रेट, पिछले राष्ट्रपतियों ने चाइना के साथ व्यापारिक रिश्तों को बढ़ा दिया लेकिन उससे अमेरिकी मध्य वर्ग को नौकरियां गंवानी पड़ी। इससे ना सिर्फ अमेरिका को आर्थिक क्षति हुई बल्कि खुद चाइना के अंदर भी लोगों के साथ अच्छा बर्ताव नहीं हुआ है।

माइक पोम्पियो  ने हांगकांग का जिक्र करते हुए बोला कि नैशनल सिक्योरिटी कानून सेस लोगों की आजादी छीन ली गई है। साक्षात्कार के दौरान सेक्रेटरी ऑफ स्टेट ने जोर देकर बोला कि अमेरिका बेशक चीनी लोगों को सफल देखना चाहता है, उनको अच्छी जिन्दगी देना चाहता है, लेकिन वहां की कम्यूनिस्ट सरकार अपने ही लोगों के साथ बुरा बर्ताव कर रही है।

पोम्पियो ने चाइना में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले बेकार बर्ताव का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक अमेरिका चाइना में जबरन नसबंदी व गर्भपात की शिकायतों पर गौर करते हुए, कूटनीतिक तौर पर जो होने कि सम्भावना है वो कर रहा है। चाइना के चेताते हुए पोम्पियो ने साफ शब्दों में बोला कि ऐसी हरकत करने वालों की जिम्मेदारी तय होगी।

इस मुद्दे में उन्होंने अमेरिकी सरकार का नजरिया भी बताया। उन्होंने बोला कि अमेरिका पहले चाइना को नोटिस पर लाना चाहता है। चाइना में मूलभूत अधिकारों के हनन को लेकर विदेश मंत्री ने अमेरिकी कंपनियों व उद्योगपतियों को भी नसीहत दी है। पोम्पियो के मुताबिक हर अमेरिकी कंपनी को अपना निर्णय लेने का हक है, लेकिन उनको मुनाफे के साथ मानवाधिकारों की सुरक्षा व शिष्टता के बारे में भी सोचना होगा।

अमेरिकी कंपनियों को साफ इशारा देते हुए अमेरिकी नौकरशाह ने साफ कर दिया कि अमेरिका जिन बातों की चिन्ता करता है, उसे मानते हुए कोई कंपनी चीनी सरकार का साथ नहीं दे सकती व ना अमेरिकी सरकार इसकी इजाजत देगी।