पाक के उच्चतम न्यायालय ने देशद्रोह मामले में सज़ा-ए-मौत को दी चुनौती

पाक के उच्चतम न्यायालय ने देशद्रोह मामले में सज़ा-ए-मौत को दी चुनौती

पाक के उच्चतम न्यायालय ने देशद्रोह मामले में सज़ा-ए-मौत को चुनौती देने वाली पूर्व सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ की अर्जी पर सुनवाई करने से कठोर इन्कार कर दिया है । वहीं न्यायालय ने याचिका वापस करते हुए बोला कि जब तक वह आत्म समर्पण नहीं करते हैं, तब तक उनको अपील करने की इजाजत नहीं होगी.

 जंहा मुशर्रफ ने बीते गुरुवार यानी 16 जनवरी 2020 को शीर्ष न्यायालय में अर्जी दाखिल कर विशेष न्यायालय के निर्णय को रद करने की मांग करी गई. जंहा उच्चतम न्यायालय के आदेश पर गठित विशेष न्यायालय ने गत 17 दिसंबर को मुशर्रफ को देशद्रोह का दोषी करार देते हुए सज़ा-ए-मौत सुनाई गई थी.

एक महीने के भीतर करना होगा सरेंडर: सूत्रों से मिली जानकरी के अनुसार इस बात का पता चला है कि , उच्चतम न्यायालय के रजिस्ट्रार ऑफिस ने बीते शुक्रवार को इस टिप्पणी के साथ पूर्व सैन्य शासक मुशर्रफ की अर्जी लौटा दी कि अपील से पहले दोषी सेरेण्डर करें. सर्वोच्च न्यायालय ने इस असहमति को दूर करने के लिए एक माह की मोहलत दी है. इसका मतलब यह हुआ कि मुशर्रफ को एक महीने के अंदर आत्म समर्पण करना होगा. ऐसा नहीं करने पर वह अपील करने का अधिकार गंवा देंगे.

दाखिल की थी 90 पेज की अर्जी: आपकी जानकरी के लिए हम आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 74 वर्षीय पूर्व सेना प्रमुख मुशर्रफ ने अपने एडवोकेट सलमान सफदर के जरिये बीते गुरुवार यानी 16 जनवरी 2020 को उच्चतम न्यायालय में 90 पेज की अर्जी पेश की जा चुकी है. वहीं यह भी बोला जा रहा हैं कि विशेष न्यायालय में मुशर्रफ की अनुपस्थिति इरादतन नहीं थी. वह बेकार स्वास्थ्य के कारण न्यायालय में पेश नहीं हो पा रहे थे. मुशर्रफ को बीमार मानने के बावजूद विशेष न्यायालय ने उनकी अनुपस्थिति में निर्णय सुना दिया. इसके पहले बीते सोमवार को लाहौर उच्च न्यायालय ने मुशर्रफ की अपील पर विशेष न्यायालय के निर्णय को असंवैधानिक करार दिया था.