युद्धाभ्यास के दौरान लापता इंडोनेशियाई पनडुब्बी की दूसरे दिन भी खोज जारी

युद्धाभ्यास के दौरान लापता इंडोनेशियाई पनडुब्बी की दूसरे दिन भी खोज जारी

इंडोनेशिया में युद्धाभ्यास में शामिल हुई पनडुब्बी का अबतक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. बुधवार दोपहर में बाली द्वीप के समीप से गायब हुई इस पनडुब्बी को खोजने के लिए इंडोनेशियाई सेना के अतिरिक्त कई दूसरे देश भी शामिल हो गए हैं. दरअसल, इंडोनेशिया के पास कोई सबमरीन रेक्यू वेसल नहीं है, इसलिए उसने सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया की सहायता मांगी है. इस पनडुब्बी पर 53 नौसैनिक सवार बताए जा रहे हैं. इंडोनेशियाई नौसेना की पूरी टीम बाली के पास समुद्र की सतह पर देखे गए ऑयल के रिसाव के आसपास के इलाकों की जाँच कर रही है. सेना प्रमुख हादी जाहजंतो ने बोला कि केआरआई नानग्गला 402 (KRI Nanggala 402) बुधवार को एक प्रशिक्षण अभियान में भाग ले रही थी जब वह लापता हो गई. उन्होंने बोला कि माना जा रहा है पनडुब्बी बाली के उत्तर में करीब 96 किलोमीटर दूर पानी में गायब हुई. जाहजंतो ने बोला कि नौसेना ने इलाके में सर्वेक्षण जहाज समेत कई जहाजों को पनडुब्बी की तलाश में तैनात किया है. अभी तक की सूचना के अनुसार, इस पनडुब्बी का कोई पता नहीं चल पाया है.


इंडोनेशिया में युद्धाभ्यास में शामिल हुई पनडुब्बी का अबतक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. बुधवार दोपहर में बाली द्वीप के समीप से गायब हुई इस पनडुब्बी को खोजने के लिए इंडोनेशियाई सेना के अतिरिक्त कई दूसरे देश भी शामिल हो गए हैं. दरअसल, इंडोनेशिया के पास कोई सबमरीन रेक्यू वेसल नहीं है, इसलिए उसने सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया की सहायता मांगी है.


इंडोनेशिया में युद्धाभ्यास में शामिल हुई पनडुब्बी का अबतक कोई सुराग नहीं मिल पाया है. बुधवार दोपहर में बाली द्वीप के समीप से गायब हुई इस पनडुब्बी को खोजने के लिए इंडोनेशियाई सेना के अतिरिक्त कई दूसरे देश भी शामिल हो गए हैं. दरअसल, इंडोनेशिया के पास कोई सबमरीन रेक्यू वेसल नहीं है, इसलिए उसने सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया की सहायता मांगी है. इस पनडुब्बी पर 53 नौसैनिक सवार बताए जा रहे हैं. इंडोनेशियाई नौसेना की पूरी टीम बाली के पास समुद्र की सतह पर देखे गए ऑयल के रिसाव के आसपास के इलाकों की जाँच कर रही है. सेना प्रमुख हादी जाहजंतो ने बोला कि केआरआई नानग्गला 402 (KRI Nanggala 402) बुधवार को एक प्रशिक्षण अभियान में भाग ले रही थी जब वह लापता हो गई. उन्होंने बोला कि माना जा रहा है पनडुब्बी बाली के उत्तर में करीब 96 किलोमीटर दूर पानी में गायब हुई. जाहजंतो ने बोला कि नौसेना ने इलाके में सर्वेक्षण जहाज समेत कई जहाजों को पनडुब्बी की तलाश में तैनात किया है. अभी तक की सूचना के अनुसार, इस पनडुब्बी का कोई पता नहीं चल पाया है.

इलेक्ट्रिक फेल होने से एक्सीडेंट होने की आशंका

इंडोनेशियाई नौसेना ने बताया कि हो सकता है कि गोता लगाते समय इस पनडुब्बी का इलेक्ट्रिक सिस्टम बंद पड़ गया हो. इससे पनडुब्बी पर से चालक दल का नियंत्रण छूट जाता है. ऐसी स्थिति में पनडुब्बी में सवार लोग चाहकर भी उसे सतह पर नहीं ला सकते हैं. नौसेना ने बताया कि उन्हें संभावना है कि यह पनडुब्बी समुद्र में 600 से 700 मीटर की गहराई में डूब गई है. इस कारण इसका चालक दल कमांड सेंटर से सम्पर्क भी नहीं कर पा रहा है. इंडोनेशियन नेवी के प्रतिनिधि जूलियस विडोजोनो ने बोला कि खोज में ऑस्ट्रेलिया और सिंगापुर सहित कई राष्ट्रों की सहायता मिल रही है. इन राष्ट्रों के पास पनडुब्बी बचाव पोत (सबमरीन रेक्यू वेसल) हैं. इंडोनेशियाई नौसेना ने हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षण जहाज सहित पूरे क्षेत्र में बड़ी संख्या में दूसरे जहाजों को तैनात किया है.

इंडोनेशिया ने जर्मनी से 1981 में खरीदी थी यह पनडुब्बी

केआरआई नानग्गला 402 एक जर्मन पनडुब्बी है, जिसे इंडोनेशियाई नौसेना में 1981 में कमीशन किया गया था. यह पनडुब्बी आज होने वाले मिसाइल फायरिंग युद्धाभ्यास के लिए तैयारियां कर रही थी. इस युद्धाभ्यास को दौरान सैन्य प्रमुख हादी जाहजंतो सहित कई दूसरे सैन्य ऑफिसर भाग लेने वाले थे. रक्षा मंत्रालय ने एक बयान में बोला कि पनडुब्बी को गोता लगाने की स्वीकृति दी गई थी और इसके बाद से उससे सम्पर्क नहीं हो पाया. एक हेलिकॉप्टर ने बाद में उस स्थान ऑयल फैला पाया जहां पनडुब्बी को समुद्र में गोता लगाना प्रारम्भ करना था. इसमें बोला गया कि पनडुब्बी में चालक दल के 49 सदस्य, उसके कमांडर और तीन गनर्स थे. इंडोनेशिया में वर्तमान में पांच पनडुब्बियों का एक बेड़ा है और 2024 तक कम से कम आठ संचालित करने की योजना है. यह दुनिया का सबसे अधिक द्वीपसमूहों वाला देश है. इसलिए इंडोनेशिया को अपने समुद्री तटों की सुरक्षा की आवश्यकता अधिक होती है.

चीन से निपटने के लिए गश्त बढ़ा रहा इंडोनेशिया

करीब 17000 द्वीपों के साथ इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा द्वीपसमूह देश है और हाल के सालों में उसे कई समुद्री चुनौतियों का सामना करना पड़ा जिनमें नातुना द्वीप के निकट कई चीनी पोतों से जुड़ी घटनाएं भी शामिल हैं. पिछले साल, राष्ट्रपति जोको विडोडो ने दक्षिण चीन सागर के किनारे द्वीपों की यात्रा के दौरान देश की संप्रभुता की रक्षा करने का दावा किया था. इस क्षेत्र में चीनी मछुआरे अक्सर घुसते रहते हैं, जिनकों खदेड़ने के लिए इंडोनेशियाई नौसेना हर समय पूरे इलाके की गश्त करती है. वहीं, चाइना इस इलाके के संपूर्ण समुद्री क्षेत्र पर अपना दावा करता है. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि गेंग शुआंग ने जोर देकर बोला कि चीनी मछुआरों को अपने पारंपरिक मछली पकड़ने के आधार के रूप में चाइना के क्षेत्र में गतिविधियां संचालित करने की छूट है.

चीन के विरूद्ध इंडोनेशिया में आक्रोश

इसी बयान के बाद से इंडोनेशिया में चाइना के विरूद्ध आक्रोश बहुत ज्यादा बढ़ गया. जिसके बाद राष्ट्रपति जोको विडोडो ने देश की नौसेना को गश्त बढ़ाने का आदेश दिया था. इसी कड़ी में इंडोनेशियाई नौसेना आज युद्धाभ्यास करने वाली थी. चाइना सालों से इस तरह के दावे कर रहा है. जिसके कारण इंडोनेशिया को क्षेत्रीय समुद्री परिवहन में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है.


US सिक्योरिटी ने किए नष्ट, गोबर के उपले लेकर अमेरिका पहुंचा एक भारतीय शख्स

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न्यूयार्कः अमेरिका के सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा ऑफिसरों को वाशिंगटन DC के उपनगर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हिंदुस्तान से लौटे एक यात्री के सामान से उपले मिले हैं. भारतीय यात्री जिस बैग में उपले लाया था, उसे एयरपोर्ट पर ही छोड़ गया था. ऑफिसरों ने बताया कि अमेरिका में उपलों पर बैन है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे अत्यधिक संक्रामक मुंहपका-खुरपका रोग हो सकती है.

अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (CBP) ने जानकारी दी है कि इन्हें नष्ट कर दिया गया है. विभाग की तरफ से सोमवार को जारी कि गई एक प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, '' यह गलत नहीं लिखा गया. CBP कृषि जानकारों को एक सूटकेस में से दो उपले मिले हैं.'' बयान के मुताबिक, यह सूटकेस चार अप्रैल को 'एअर इंडिया ' के विमान से लौटै एक पैसेंजर का है. CBP के बाल्टीमोर 'फील्ड ऑफिस' के 'फील्ड ऑपरेशंस' कार्यवाहक निदेशक कीथ फलेमिंग ने बोला है कि, '' मुंहपका-खुरपका रोग जानवरों को होने वाली एक रोग है, जिससे पशुओं के मालिक सबसे अधिक डरते हैं और यह सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा के कृषि सुरक्षा अभियान के लिए भी एक खतरा है.''

CBP ने आगे बोला कि उपलों को विश्व के कुछ हिस्सों में एक अहम ऊर्जा और खाना पकाने का स्रोत भी बताया गया है. इसका उपयोग कथित तौर पर 'स्किन डिटॉक्सीफायर', एक रोगाणुरोधी और उर्वरक के रूप में भी किया जाता है. सीबीपी के मुताबिक, इन कथित फायदों के बाद भी मुंहपका-खुरपका रोग के खतरे के कारण हिंदुस्तान से यहां उपले लाना प्रतिबंधित है.


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