पाकिस्तान में नए सिरे से जनगणना और आवास होगी गणना, देश की कुल आबादी हुई इतनी

पाकिस्तान में नए सिरे से जनगणना और आवास  होगी गणना, देश की कुल आबादी हुई इतनी

 पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध बेहतरीन पद्धतियों से देश में नए सिर से जनगणना और आवास गणना कराने का फैसला किया है। पाकिस्तान सरकार ने यह फैसला वर्ष 2017 में हुई जनगणना के नतीजों में उत्पन्न विसंगति के मद्देनजर किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा बृहस्पतिवार को जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री इमरान खान के नेतृत्व में समान हित

परिषद (सीसीआई) की 49वीं बैठक हुई जिसमें सातवीं जनगणना और आवास गणना कराने और 'जनगणना निगरानी समिति' का गठन करने का फैसला किया गया। बयान के मुताबिक जनगणना सलाहकार समिति की सिफारिश के आधार पर सीसीआई ने बेहतरीन अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों, डिजिटल तकनीक और जीआईएस निगरानी प्रणाली का इस्तेमाल कर जनगणना कराने का फैसला किया। बैठक में बताया गया कि जनगणना से पहले आवासों की गणना की जाएगी। उल्लेखनीय है कि वर्ष 1998 के बाद देश में वर्ष 2017 में जनगणना कराई गई थी, लेकिन इसके नतीजों को लेकर उत्पन्न विवाद की वजह से उसे कभी आधिकारिक रूप से साझा नहीं किया गया। कई समूह देश में नए सिरे से जनगणना कराने की मांग कर रहे थे। वर्ष 2017 की जनगणना के मुताबिक देश की कुल आबादी 20.78 करोड़ थी जबकि वार्षिक वृद्धि दर 2.4 प्रतिशत बताई गई थी।


मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

 मिस्र में एक के पेट से मिले 28 महीने के भ्रूण के रहस्य को सुलझा लिया गया है। यह भ्रूण पिछले 2000 साल से ममी के पेट में सुरक्षित था। 2021 में खोज के बाद से ही यह वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ था। अब बताया गया है कि महिला के शरीर के विघटित होने के बाद इस भ्रूण को अम्लीकरण के जरिए सुरक्षित रखा गया था। यह प्रक्रिया ठीक ऐसी है, जैसे किसी अचार को सुरक्षित रखा जाता है। वारसॉ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने पिछले साल अप्रैल में सीटी और एक्स-रे स्कैन के जरिए अजन्मे बच्चे के अवशेषों की उपस्थिति का

खुलासा किया था।माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे पुराना भ्रूण है। इस भ्रूण को मिस्र से आज से करीब 200 साल पहले पोलैंड लेकर जाया गया था। दिसंबर 1826 में इस ममी को वारसॉ विश्वविद्यालय को दान में दिया गया था। तब माना जा रहा था कि यह ममी एक महिला की है लेकिन 1920 के दशक में इस पर मिस्र के पुजारी का नाम लिखा पाया गया। विश्वविद्यालय की टीम 2015 से इस प्राचीन मिस्र की ममी पर काम कर रही है। पिछले साल स्कैन में जब ममी के पेट के अंदर एक छोटा सा पैर दिखा, तब उन्हें समझ आया कि उनके हाथ क्या लगा है।(Photo-Warsaw Museum Project)

प्रसव के दौरान नहीं हुई थी महिला की मौत

शोधकर्ताओं ने भ्रूण की स्थिति और बर्थ कैनाल का अध्ययन कर बताया कि इस रहस्यमय महिला की प्रसव के दौरान मौत नहीं हुई थी। मौत के समय इस महिला के पेट में मौजूद भ्रूण 26 से 30 हफ्ते का था। टीम ने आशा जताई है कि यह बहुत संभव है कि अन्य गर्भवती ममी भी दुनिया के अलग-अलग सग्रहालयों में रखी हों। ऐसे में हमें उन सबकी जांच करने की आवश्यक्ता है। इस रहस्यमय महिला और उसके अजन्मे बच्चे का अध्ययन पोलैंड के वारसॉ विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् और पैलियोपैथोलॉजिस्ट मार्जेना ओलारेक-स्ज़िल्के और उनके सहयोगियों ने किया है।

एक्सपर्ट के लिए बनी हुई थी बड़ी पहेली

एक्सपर्ट्स के सामने एक बड़ी पहेली यह थी कि आखिर महिला के अंदर भ्रूण कैसे रह गया था। ममी बनाने के लिए मृतक के अंगों को निकाल दिया जाता था तो भ्रूण को क्यों नहीं अलग किया गया। पहले माना जा रहा था कि इसके पीछे कोई धार्मिक कारण हो सकता है। जांच टीम ने संभावना जताई ती कि हो सकता है उन्हें लगता हो कि अजन्मे बच्चे की आत्मा नहीं होती है और वह अगले दुनिया में सुरक्षित रहेगा या हो सकता है कि उसे निकालने में महिला के शरीर को नुकसान का खतरा रहा हो।