ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई ने दिखाया भारतीय प्रेम

 ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई ने दिखाया भारतीय प्रेम

हिन्दी भाषा ( Hindi Language ) की ख्याति दिन रोजाना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता जा रहा है. इस का ताजा उदाहरण ईरान में देखने को मिला है. दरअसल, ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह सैय्यद अली खामनेई ( Iran supreme leader Ayatollah Sayyid Ali Khamenei ) ने अपना ट्विटर एकाउंट हिन्दी भाषा ( Twitter Account In Hindi Language ) में बनाया है.

हालांकि, उनके हिंदी एकाउंट से अभी तक किसी भारतीय नेता को अनुसरण नहीं किया गया है. बल्कि, भिन्न-भिन्न भाषाओं के अपने ही एकाउंट को अनुसरण किया गया है. इस एकाउंट का नाम भी हिंदी में है व इससे हिंदी भाषा में ही ट्वीट किए जा रहे हैं.

अभी तक इस एकाउंट से दो ट्वीट किए गए हैं. अपने पहले ट्वीट में खामनेई ने लिखा 'अल्लाह के नाम से, जो अत्यंत कृपाशील व दयावान है.' बता दें कि खामनेई ने हिंदी के साथ-साथ फारसी, अरबी, उर्दू, फ्रेंच, स्पेनिश, रूसी व अंग्रेजी जैसी अन्य भाषाओं में भी ट्विटर एकाउंट बनाए हैं.

बता दें कि खामनेई का हिंदी ट्विटर एकाउंट इसलिए भी बहुत अहम हो जाता है, क्योंकि भारत-ईरान के संबंध ( Iran-India Relation ) बहुत पुराने व जरूरी हैं. अमरीका ( America ) की ओर से प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भी ईरान-भारत के रिश्तों में दूरियां नहीं बढ़ी. दोनों राष्ट्रों के बीच चाबहार पोर्ट व चाबहार-जहेदान रेल लिंक परियोजना ने नए आयाम दिए हैं.

खामनेई का हिंदुस्तान से गहरा नाता

आपको बता दें कि अयातुल्ला अली खामेनेई का हिंदुस्तान से गहरा नाता है. खामनेई के दादा सैय्यद अहमद मसूवी ( Syed Ahmed Masuvi ) यूपी के बाराबंकी जिले के रहने वाले थे. 1830 में अहमद मसूवी उस समय के अवध के नवाब के साथ ईरान व इराक की यात्रा पर गए थे. उस दौरान सैय्यद अहमद मसूवी को ईरान का खामेनेई गांव इतना पसंद आया कि वे वहीं बस गए व फिर कभी भी हिंदुस्तान नहीं लौटे. इसके बाद अहमद मसूवी का वंश जैसे-जैसे बढ़ता गया, उनलोगों ने खामनेई नाम को ही अपना सरनेम बना लिया व फिर धीरे-धीरे यह परिवार ईरान का सबसे ताकतवर परिवारों में पहचाना जाने लगा.

विवादों में रहे हैं खामनेई के सोशल मीडिया एकाउंट

मालूम हो कि खामनेई के ट्विटर एकाउंट पहले कई मामलों को लेकर चर्चा में रहे हैं व यही कारण है कि कुछ ईरानी कार्यकर्ताओं मे उनके सोशल मीडिया एकाउंट पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

2019 में ईंधन की बढ़ती कीमतों व अन्य मामलों पर बढ़ते सरकार विरोधी प्रदर्शनों ( Protest In Iran ) को रोकने के लिए सरकार की ओर से इंटरनेट बंद करने के विरूद्ध लोगों ने आवाज बुलंद की व खामनेई के सोशल मीडिया एकाउंट को बंद करने की मांग की थी.

इसके अतिरिक्त इस वर्ष फरवरी में अमरीका के रिपब्लिकल सीनेटरों ( US Republican Senators ) के एक समूह ने ट्विटर से खामनेई व ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जारिफ का एकाउंट बंद करने का अनुरोध किया था.