कोरोना वायरस के प्रकोप से भूखे मार रहा चीन, जाने ये रिपोर्ट

कोरोना वायरस के प्रकोप से भूखे मार रहा चीन, जाने ये रिपोर्ट

पेइचिंगकोरोना वायरस के प्रकोप को रोकने के लिए चीन जीरो कोविड पॉलिसी पर जोर दे रहा है। इसके लिए चीनी सरकार सभी हदें पार करने के लिए भी तैयार है। फिर चाहें लोगों को घरों को कैद करना हो या स्टील के बक्से में। चीनी सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि शिआन में कोरोना का प्रकोप 5 जनवरी के बाद से अब काबू में है। हालांकि सरकार की ओर से नियमों को और ज्यादा कड़ा कर दिया

गया है और लोग अभी भी अपने घरों से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।हालत यह है कि लोगों के पास खाने जैसी मूलभूत चीजें भी खत्म हो चुकी हैं और अब वे त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। गत 9 जनवरी को द एपोच टाइम्स से बात करते हुए शिआन के यांटा जिले की एक निवासी ने कहा कि मैं कभी कोरोना पॉजिटिव हुई ही नहीं, तो फिर मेरा दरवाजा क्यों सील किया गया है? काई जियायिंग ने कहा कि हमारे आवासीय परिसर को 21 दिनों के लिए बंद कर दिया गया है। लॉकडाउन के शुरुआत में मैंने खुद को सांत्वना दी। लेकिन कुछ दिनों बाद मैं निराश हो गई और आज सुबह मैं पागल हो गई।खाना बचाने के लिए जल्दी सोना पड़ता हैउन्होंने बताया कि बीते तीन दिनों में वह और उनके पति सिर्फ थोड़ा-सा खाना ही खरीद पाए हैं और उन्हें नहीं पता कि अब कब कुछ और खरीद पाएंगे। काई ने कहा कि मुझे चिंता है कि हमारे पास जल्द ही खाने के लिए कुछ नहीं होगा। हम अपना पेट नहीं भर सकते। हम हर रोज खाने के बाद शाम को 3 से 4 बजे तक सो जाते हैं। हम खाना बचाने के लिए ज्यादा से ज्यादा सोते हैं। उन्होंने बताया कि परिवार के पास खाने के लिए सिर्फ एक कटोरी चावल, करीब पांच किग्रा आटा, सात कप नूडल्स और थोड़ा-सा मीट बचा हुआ है। बचा है सिर्फ एक हफ्ते का राशनइतने राशन में काई का परिवार मुश्किल से एक हफ्ते तक खाना खा सकता है। फोन पर दिए इंटरव्यू में हर किसी के पास एक दर्दनाक कहानी है। चीन के शून्य कोविड रणनीति के कारण पूरे देश में करीब दो करोड़ लोग अपने-अपने घरों में कैद हैं। इनमें शियान के अलावा आन्यांग और युझोउ शहर भी शामिल हैं। इन शहरों के लोगों को खाने-पीने का सामान खरीदने तक के लिए बाहर निकलने की अनुमति नहीं है।क्वारंटीन शिविरों में रखे गए बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएंओमीक्रोन के दो मामले सामने आने के बाद चीन ने सोमवार देर रात 55 लाख लोगों के शहर आन्यांग में लॉकडाउन लगा दिया था। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, चीन हजारों की संख्या में लोगों को शियान शहर के बाहरी इलाकों में बने क्वारंटीन शिविरों में कैद कर रहा है। इन शिविरों में कैद रहे लोगों ने रिपोर्ट में बताया है कि वहां गर्भवती महिलाओं, बुजुर्ग और बच्चों को भी रखा गया है। उन लोगों ने जीरो कोविड राज्य में डिटेंशन कैंपों की भयावहता को भी बताया है। बक्से में बंद किए जा रहे लोगऑनलाइन शेयर किए जा रहे एक वीडियो में लोगों को लकड़ी के बिस्तर और शौचालय से सुसज्जित छोटे बक्से में दिखाया गया है। इस जगह पर उन्हें दो हफ्तों तक रहने के लिए मजबूर किया जाता है। इन शिविरों में कैद लोगों को पीपीई किट पहने कुछ लोग खाना देते नजर आ रहे हैं। जिन लोगों को इन क्वारंटीन कैंप्स में कैद किया गया था, उन लोगों ने बताया है कि उन्हें बहुत कम खाना दिया जाता था।


मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

मिस्र की इतनी साल पुरानी ममी के पेट में 28 महीने का भ्रूण, जानिए अब तक कैसे रहा सुरक्षित?

 मिस्र में एक के पेट से मिले 28 महीने के भ्रूण के रहस्य को सुलझा लिया गया है। यह भ्रूण पिछले 2000 साल से ममी के पेट में सुरक्षित था। 2021 में खोज के बाद से ही यह वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ था। अब बताया गया है कि महिला के शरीर के विघटित होने के बाद इस भ्रूण को अम्लीकरण के जरिए सुरक्षित रखा गया था। यह प्रक्रिया ठीक ऐसी है, जैसे किसी अचार को सुरक्षित रखा जाता है। वारसॉ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं की टीम ने पिछले साल अप्रैल में सीटी और एक्स-रे स्कैन के जरिए अजन्मे बच्चे के अवशेषों की उपस्थिति का

खुलासा किया था।माना जाता है कि यह दुनिया के सबसे पुराना भ्रूण है। इस भ्रूण को मिस्र से आज से करीब 200 साल पहले पोलैंड लेकर जाया गया था। दिसंबर 1826 में इस ममी को वारसॉ विश्वविद्यालय को दान में दिया गया था। तब माना जा रहा था कि यह ममी एक महिला की है लेकिन 1920 के दशक में इस पर मिस्र के पुजारी का नाम लिखा पाया गया। विश्वविद्यालय की टीम 2015 से इस प्राचीन मिस्र की ममी पर काम कर रही है। पिछले साल स्कैन में जब ममी के पेट के अंदर एक छोटा सा पैर दिखा, तब उन्हें समझ आया कि उनके हाथ क्या लगा है।(Photo-Warsaw Museum Project)

प्रसव के दौरान नहीं हुई थी महिला की मौत

शोधकर्ताओं ने भ्रूण की स्थिति और बर्थ कैनाल का अध्ययन कर बताया कि इस रहस्यमय महिला की प्रसव के दौरान मौत नहीं हुई थी। मौत के समय इस महिला के पेट में मौजूद भ्रूण 26 से 30 हफ्ते का था। टीम ने आशा जताई है कि यह बहुत संभव है कि अन्य गर्भवती ममी भी दुनिया के अलग-अलग सग्रहालयों में रखी हों। ऐसे में हमें उन सबकी जांच करने की आवश्यक्ता है। इस रहस्यमय महिला और उसके अजन्मे बच्चे का अध्ययन पोलैंड के वारसॉ विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद् और पैलियोपैथोलॉजिस्ट मार्जेना ओलारेक-स्ज़िल्के और उनके सहयोगियों ने किया है।

एक्सपर्ट के लिए बनी हुई थी बड़ी पहेली

एक्सपर्ट्स के सामने एक बड़ी पहेली यह थी कि आखिर महिला के अंदर भ्रूण कैसे रह गया था। ममी बनाने के लिए मृतक के अंगों को निकाल दिया जाता था तो भ्रूण को क्यों नहीं अलग किया गया। पहले माना जा रहा था कि इसके पीछे कोई धार्मिक कारण हो सकता है। जांच टीम ने संभावना जताई ती कि हो सकता है उन्हें लगता हो कि अजन्मे बच्चे की आत्मा नहीं होती है और वह अगले दुनिया में सुरक्षित रहेगा या हो सकता है कि उसे निकालने में महिला के शरीर को नुकसान का खतरा रहा हो।