संसार भर में कोरोना वायरस की इतनी वैक्सीनों का हो रहा मानव परीक्षण

 संसार भर में कोरोना वायरस की इतनी वैक्सीनों का हो रहा मानव परीक्षण

दुनिया स्वास्थ्य संगठन ( World Health Organization ) के अनुसार वर्तमान में संसार भर में कम से कम 147 संभावित कोरोना वायरस ( Coronavirus Pandemic ) के टीके ( covid-19 vaccine ) विकसित किए जा रहे हैं.

 वैक्सीन की फंडिंग करने वाले लोगों व संस्थाओं में दुनिया की कई सरकारें भी शामिल हैं. इनमें संयुक्त प्रदेश अमरीका, बड़ी व छोटी फार्मास्युटिकल कंपनियां व बिल गेट्स व डॉली पार्टन जैसे अमीर परोपकारी का नाम हैं. हालांकि अब तक कम से कम 17 ऐसे टीके बनाए जा चुके हैं जो मानव परीक्षण ( Corona vaccine human trial ) की स्टेज तक पहुंच गए हैं. हैरानी की बात यह है कि इन 17 में से 7 टीके चाइना द्वारा विकसित किए जा रहे हैं, जबकि हिंदुस्तान का इनमें एक भी नाम नहीं है.

कब तक आएंगे टीके

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप व उनके नए टीके विकसित करने वाले महान मॉन्सेफ स्लौई ( Moncef Slaoui ) ने बोला है कि एक वैक्सीन वर्ष के अंत तक व्यापक वितरण के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि अधिकतर सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इससे कम उम्मीदवाली समयसीमा की भविष्यवाणी की है.

इस विषय में फ्रेंच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड रिसर्च (INSERM) की पूर्व निदेशक व WHO की एक शीर्ष ऑफिसर डाक्टर मैरी-पॉल कीनी के मुताबिक 2021 के मध्य में लाखों-करोड़ों लोगों के लिए वैक्सीन की उम्मीद करना ज्यादा यथार्थवादी है, जिसे सामूहिक संरक्षण के लिए उपलब्ध कराए जाने की आवश्यकता है. वहीं, डब्ल्यूएचओ ने यहां तक चेतावनी दी है कि यह वायरस कभी भी पूरी तरह से समाप्त नहीं होने कि सम्भावना है.

डाक्टर कीनी के मुताबिक यह पूरी तरह से संभव है कि COVID-19 के विरूद्ध एक टीका ( covid-19 treatment ) विकसित किया जा सकता है. हालांकि यह भी असंभव नहीं है कि वायरस फैलता रहेगा व जिस तरह फ्लू के लिए हमें नियमित रूप से टीकाकरण करने की आवश्यकता होती है, इसके लिए भी पड़े. वैसे यह सब काल्पनिक ही है.

कैसे कार्य करते हैं क्लीनिकल ट्रायल

विभिन्न कंपनियों के वैक्सीन पर कार्य करने के अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के टीकों का भी परीक्षण ( Coronavirus vaccine clinical trial ) किया जा रहा है. इनमें कुछ ऐसे टीके भी हैं जिन्हें पहले कभी भी मनुष्यों में प्रयोग के लिए स्वीकृत नहीं किया गया था.

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आमतौर पर प्रयोग होने वाले टीकों फ्लू शॉट की तरह या तो निष्क्रिय होते हैं, या फिर लाइव-अटेनेटेड होते हैं, जिसका प्रयोग मीजल्स व मंप्स में किया जाता है. हालांकि कुछ कंपनियां आनुवांशिक-आधारित mRNA टीकों को विकसित करने में जुटी हुई हैं. यह टीके वायरस के फैलने वाले अणुओं को मूर्ख बनाने के लिए शरीर की कोशिकाओं में एक प्रकार का कोड पेश करते हैं, इसलिए प्रतिरक्षा प्रणाली इससे लड़ना सीख सकती है.

हालांकि आजतक किसी भी mRNA वैक्सीन को मनुष्यों में प्रयोग के लिए स्वीकृति नहीं दी गई है. लेकिन अगर किसी को आखिरकार अनुमति मिल गई तो तो यह पारंपरिक टीकों की तुलना में बेहद तेज व सस्ती होगी.

किसी भी वैक्सीन को स्वीकृत व व्यापक रूप से वितरित करने से पहले इसे प्री-क्लीनिकल चरण में पशुओं व फिर मानव परीक्षणों के कई चरणों से गुजरना होता है. अंतिम रूप से बहुत ही कम संख्या में टीके पास होकर अंतिम चरण में पहुंच पाते हैं. इसलिए कुछ डेवलपर्स एक साथ कई वैक्सीन का परीक्षण कर रहे हैं ताकि उन्हें सबसे अच्छा विकल्प मिल सके.

टीकों के परीक्षण चरण

चरण I: 20 से लेकर 100 या तो स्वस्थ या संक्रमित प्रतिभागियों को यह सुनिश्चित करने के लिए टीका दिया जाता है कि यह मानव पर प्रयोग के लिए सुरक्षित है व कितनी खुराक सबसे अच्छा कार्य करती है. पहले चरण में कई महीने लगते हैं व लगभग 70 प्रतिशत दवाएं अगले चरण में पहुंचती हैं.

चरण II: सैकड़ों संक्रमित लोगों पर टीके का परीक्षण किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह अच्छा हो व इसके साइड इफेक्ट्स इसके फायदे को प्रभावित न करें. दूसरे चरण में दो वर्ष तक का समय लग सकता है, व केवल एक तिहाई ड्रग्स ही तीसरे चरण तक पहुंच पाते हैं.

चरण III: अत्यधिक जरूरी अध्ययन के रूप में भी पहचाने जाने वाले चरण III परीक्षणों का लक्ष्य "किसी विशिष्ट आबादी को इलाज फायदा प्रदान करता है या नहीं" प्रदर्शित करना है. अध्ययन की व्यापकता व अवधि के कारण तीसरे चरण के परीक्षण दुष्प्रभाव को भी पकड़ सकते हैं जिनपर पहले दो परीक्षण चरणों के दौरान किसी का ध्यान नहीं गया था. यह प्रक्रिया आमतौर पर एक से चार वर्ष के बीच होती है व केवल एक चौथाई दवाएं ही इस चरण को पार कर पाती हैं.

चरण IV: दवा का बीमारी से जूझने वाले हजारों लोगों पर लगातार परीक्षण किया जाता है, ताकि प्रभावशीलता व दीर्घकालिक दुष्प्रभावों का अध्ययन किया जा सके. एफडीए द्वारा टीके को मंजूरी दिए जाने के बाद ये परीक्षण किए जाते हैं.

कुछ मामलों में कंपनियां संयुक्त रूप से पहले-दूसरे या दूसरे-तीसरे चरण को एक साथ करती हैं. इसमें वे सैकड़ों या हजारों लोगों पर दवा या टीके की सुरक्षा के लिए व प्रभावकारिता जानने के लिए परीक्षण करती हैं.

यह 17 वैक्सीन मनुष्यों पर या तो परीक्षण प्रारम्भ कर चुकी हैं या इसके लिए अनुमति पा चुकी हैं.

1. AstraZeneca: यूनाइटेड किंगडम की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन.
Trial stage: Phase III

2. Sinopharm: चीन
Trial stage: Phase III

3. Moderna: अमरीका का नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ
Trial stage: Phase II

4. CanSino: चाइना का बीजिंग इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी ( एकेडमी ऑफ मिलिट्री मेडिकल साइंसेज)
Trial stage: Phase II

5. Novavax: अमरीका
Trial stage: Phase I/II

6. Pfizer: अमरीका व जर्मनी
Trial stage: Phase I/II

7. Sinovac: चीन
Trial stage: Phase I/II

8. Imperial College London: यूनाइटेड किंगडम
Trial stage: Phase I/II

9. Inovio: अमरीका
Trial stage: Phase I

10. IMBC AMS: चाइना
Trial stage: Phase I

11. Genexine Consortium: दक्षिण कोरिया
Trial stage: Phase I

12. Gamaleya Research Institute: रूस
Trial stage: Phase I

13. Clover Biopharmaceuticals: चाइना
Trial stage: Phase I

14. Anhui Zhifei Longcom: चीन
Trial stage: Phase I

15. CureVac: जर्मनी
Trial stage: Phase I

16. PLAAMS/Walvax: चाइना
Trial stage: Phase I

17. Vaxine: ऑस्ट्रेलिया
Trial stage: Phase I