अमेरिका में भारतीय नवविवाहिता का दहेज के लिए उत्पीड़न

अमेरिका में भारतीय नवविवाहिता का दहेज के लिए उत्पीड़न

अमेरिका में एक भारतीय नवविवाहिता अपने ही पति के उत्पीड़न का शिकार होकर परदेस में मदद के लिए दर-दर की खाक छान रही है। वह इसी साल मार्च में अमेरिका पहुंची थी और पति के दहेज की मांग के साथ घर से निकालने के बाद से उसके पास वहां पर न सिर छिपाने की कोई जगह है और न ही भारत वापस लौटने के पैसे हैं। वह पिछले कई हफ्तों से अमेरिका में विभिन्न एजेंसियों के सामने न्याय की गुहार लगा रही है लेकिन अब तक उसे कोई मदद नहीं मिली है।

वाशिंगटन में भारतीय दूतावास और सैन फ्रांसिस्को स्थित कांसुलेट में भारतीय अधिकारियों के पास भेजे जाने के बाद बिहार की राजधानी पटना से आई पीडि़ता ने बताया कि उसके पति ने बिना किसी वित्तीय सहायता के उसे छोड़ दिया है। मेरे पास जाने के लिए अब कोई जगह नहीं है। भारत में मेरे माता-पिता ने मेरे ससुर से मदद मांगी है, लेकिन वह मेरे पति के मुझे वापस अपने जीवन में लेने के लिए दहेज देने की मांग कर रहे हैं।

अनामिका (बदला हुआ नाम) ने अमेरिकी विदेश विभाग से भी संपर्क साधा है। चूंकि इसी विभाग ने उसके पति को एफ-1 वीजा जारी किया है। और फ्रेडी मैक के जरिये वह आप्शनल प्रेक्टिकल ट्रेनिंग (ओपीटी) के जरिये अस्थायी रोजगार कर रहा है। पीडि़ता को अब तक कहीं से भी नहीं मिल सका है। नवविवाहिता के खिलाफ उत्पीड़न और दु‌र्व्यवहार इस हद तक बढ़ गया कि 15 जून को वाशिंगटन डीसी के उपनगरीय क्षेत्र वर्जीनिया की पुलिस को उसके पति के घर मैकलेन के अपार्टमेंट में बुलाना पड़ गया।


पीडि़ता ने अपनी शिकायत में लिखा है कि पुलिस ने उसकी मदद कैब से जाने में की थी। स्थानीय फेयरफैक्स काउंटी पुलिस ने उसके पति के खिलाफ आपराधिक शिकायत दर्ज की है। पीड़ि‍ता ने बताया कि उसका जीवन खतरे में था, उस दिन पुलिस ने ही उसे वहां से निकालकर उसकी जान बचाई। उसने बताया कि वह अमेरिका अपने पति के साथ एक मार्च, 2021 को पहुंची और वर्जीनिया के मैक्लीन में रहने लगी।

फिर उसके पति ने उसके मां-बात से दहेज मांगते हुए उसे घरेलू हिंसा का शिकार बनाना शुरू कर दिया। पीडि़ता ने बताया कि उसका पति उसे वाशरूम खुला रखने के लिए उसे मजबूर करता था और उस पर गर्भधारण रोकने के लिए कुछ करने का आरोप लगाता था। जब इस बारे में पीड़ि‍ता की पति से फोन पर पूछताछ की गई तो उसने आरोप झूठे होने की बात कही और फोन काट दिया। पीड़ि‍ता फिलहाल अपने नजदीकी रिश्तेदारों के पास सिएटल में रह रही है। 


एक साल में खत्म हो सकती है कोरोना महामारी, जानिए दिग्गज वैक्सीन निर्माता ने क्यों किया ये दावा

एक साल में खत्म हो सकती है कोरोना महामारी, जानिए दिग्गज वैक्सीन निर्माता ने क्यों किया ये दावा

पिछले डेढ़ साल से भी अधिक समय से दुनियाभर में जारी कोरोना महामारी ने हमारे जीवन को प्रभावित कर दिया है। पढ़ाई से लेकर कामकाज, व्यापार से लेकर नौकरी तक सभी को कोरोना ने गंभीर रूप से प्रभावित किया है। ऐसे में सभी लोगों के मन में बस एक सवाल है, आखिर कोरोना महामारी कब खत्म होगी? इसको लेकर दुनिया के एक दिग्गज वैक्सीन निर्माता ने बड़ा दावा किया है। माडर्ना वैक्सीन के निर्माण (एमआरएनए.ओ) और कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन बंसेल का मानना है कि कोरोना वायरस महामारी एक साल में खत्म हो सकती है।

उन्होंने स्विस अखबार नीयू ज़ुएर्चर ज़ितुंग को बताया कि वैक्सीन उत्पादन में वृद्धि से टीके के वैश्विक आपूर्ति में तेजी होगी। इसका मतलब हुआ कि वैक्सीन दुनिया के सभी कोनों तक तेजी से पहुंच सकेगी। उन्होंने एक इंटरव्यू में अखबार को बताया कि यदि आप पिछले छह महीनों में वैक्सीन की उत्पादन क्षमता को देखते हैं, तो अगले साल के मध्य तक पर्याप्त डोज उपलब्ध होनी चाहिए, जिससे इस धरती पर मौजूद सभी इंसानों को टीका लगाया जा सके। इतना ही नहीं, जिन्हें बूस्टर डोज की जरूरत है उन्हें भी वैक्सीन लग सकेगी। उन्होंने कहा कि जल्द ही शिशुओं के लिए भी कोरोना का टीकाकरण उपलब्ध होगा।


इसके बाद उन्होंने आगे कहा कि जो लोग वैक्सीन नहीं ले रहे हैं वे स्वाभाविक रूप से खुद को प्रतिरक्षित करेंगे क्योंकि डेल्टा वैरिएंट इतना संक्रामक है। इस तरह हम फ्लू जैसी स्थिति में समाप्त हो जाएंगे। आप या तो टीका लगवा सकते हैं और वायरस से संक्रमित होकर प्रतिरक्षा पा सकते हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या इसका मतलब हुआ कि अगले साल की दूसरी छमाही में हम सामान्य स्थिति में लौट सकते हैं। इस पर उन्होंने कहा कि आज के जैसे हालात रहे तो एक साल में मुझे लगता है कि कोरोना महामारी खत्म हो सकती है।